अयोध्या Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामला: अखिलेश यादव ने शेयर किया AI वीडियो,
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर फिर हमलावर हुए अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या Ram Mandir में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम पर आधारित 4 मिनट 40 सेकेंड का एक AI जनरेटेड वीडियो साझा किया, जिसमें प्रतीकात्मक तरीके से पूरे विवाद को दिखाया गया है।
वीडियो शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” उनके इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
AI वीडियो में दिखाई गई प्रतीकात्मक कहानी
अखिलेश यादव द्वारा साझा किया गया वीडियो किसी सामान्य भजन या गीत की तरह नहीं, बल्कि सिनेमाई शैली में तैयार किया गया है। वीडियो की शुरुआत शांत और सूनी अयोध्या के दृश्य से होती है। इसके बाद भगवान श्रीराम की AI तकनीक से तैयार की गई छवि मंदिर परिसर में दिखाई देती है।
पूरे वीडियो में गंभीर माहौल बनाया गया है, जिसके माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि मंदिर में कथित चोरी की घटना से अयोध्या का वातावरण प्रभावित हुआ है।
दानपात्र और श्रद्धालुओं के जरिए दिया गया संदेश
वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर परिसर का वह स्थान दिखाया गया है, जहां कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी हुई थी। इसमें बड़ा दानपात्र और आसपास का परिसर भी नजर आता है।
इसके बाद श्रद्धालु और साधु-संत हाथ जोड़कर खड़े दिखाई देते हैं, जबकि प्रतीकात्मक दृश्यों में भगवान श्रीराम को अयोध्या की सीमा की ओर जाते हुए दर्शाया गया है। इस वीडियो के जरिए अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा चढ़ावा चोरी मामला?
यह मामला 5 जून 2026 को सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में नियमित जांच के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों के पास से नकदी बरामद की थी। इसके बाद 7 जून को मामला सार्वजनिक हुआ और विपक्ष ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए।
SIT कर रही है मामले की जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
SIT को कथित चढ़ावा चोरी, उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन और अन्य पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
सात आरोपियों के घरों पर छापेमारी
जांच के तहत पुलिस और प्रशासन की टीमों ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा समेत सात लोगों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। कई घंटों तक चली कार्रवाई के दौरान अलमारियों, बक्सों और अन्य स्थानों की तलाशी ली गई।
जांच एजेंसियां कथित रूप से मामले से जुड़े दस्तावेज, नकदी और अन्य सबूतों की जांच कर रही हैं।
रामकथा आयोजन भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिवसीय रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात कही जा रही है।
इस आयोजन का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय दिखाई देते हैं। हालांकि, किसी भी जांच एजेंसी ने अब तक उनकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव के AI वीडियो के सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है। विशेष जांच दल (SIT), पुलिस और प्रशासनिक टीमें सभी आरोपियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित तौर पर चढ़ावे की रकम का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया। इसी क्रम में आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई भी लगातार जारी है।
दूसरी ओर, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अखिलेश यादव द्वारा साझा किए गए AI वीडियो के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। अब सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित नए खुलासों की दिशा तय होगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
