आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता के तहत भीनमाल के आदर्श विद्या मंदिर में बच्चों के बीच शानदार गणवेश प्रतियोगिता आयोजित हुई। जानिए विजेताओं के चयन, निर्णायकों, प्रधानाचार्या उर्मिला खंडेलवाल के संदेश और कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट।
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता: शानदार आयोजन ने बच्चों में अनुशासन, संस्कार और स्वच्छता का दिया प्रेरक संदेश
रिपोर्ट: मुकेश सोलंकी | भीनमाल
भीनमाल। आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, स्वच्छता और भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित स्थानीय आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीनमाल में बुधवार को भव्य गणवेश प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छ गणवेश पहनने की आदत विकसित करना, अनुशासन का भाव मजबूत करना तथा समानता एवं आत्मविश्वास का संदेश देना था।
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता का उद्देश्य
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता का आयोजन विद्यार्थियों को स्वच्छता, अनुशासन, समयपालन और संस्कारों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से किया गया। विद्यालय प्रशासन का मानना है कि स्वच्छ एवं व्यवस्थित गणवेश बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और सभी विद्यार्थियों में समानता की भावना विकसित होती है।
दो वर्गों में हुई प्रतियोगिता
प्रतियोगिता को दो अलग-अलग वर्गों में आयोजित किया गया।
वर्ग (अ)
- अरुण (नर्सरी)
- प्रथम से पंचमी (कक्षा 5) तक के भैया-बहन
वर्ग (ब)
- षष्ठी (कक्षा 6)
- सप्तमी
- अष्टमी (कक्षा 8) तक के भैया-बहन
दोनों वर्गों में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और आकर्षक, स्वच्छ एवं निर्धारित गणवेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इन आधारों पर हुआ चयन
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल गणवेश तक सीमित नहीं रहा बल्कि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से—
- स्वच्छ एवं व्यवस्थित गणवेश
- साफ-सुथरे जूते
- व्यक्तिगत स्वच्छता
- अनुशासित व्यवहार
- आत्मविश्वास
- हाव-भाव एवं प्रस्तुति
इन सभी मापदंडों के आधार पर उत्कृष्ट विद्यार्थियों का चयन किया गया।
निर्णायक मंडल ने किया निष्पक्ष मूल्यांकन
प्रतियोगिता की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अनुभवी निर्णायक मंडल का गठन किया गया।
निर्णायक मंडल में शामिल रहे—
- जोगाराम चौधरी
- भरत सिंह राव
- पूजा सोलंकी
तीनों निर्णायकों ने प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थियों का बारीकी से निरीक्षण किया और निष्पक्ष मूल्यांकन करते हुए उत्कृष्ट गणवेश धारण करने वाले भैया-बहनों का चयन किया।
प्रधानाचार्या उर्मिला खंडेलवाल ने दिया प्रेरक संदेश
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या उर्मिला खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
उन्होंने कहा कि—
“स्वच्छ एवं सही गणवेश केवल विद्यालय की पहचान नहीं होता, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, अनुशासन और संस्कारों का भी प्रतीक है। गणवेश सभी विद्यार्थियों में समानता का भाव पैदा करता है तथा उनमें आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन स्वच्छ गणवेश पहनकर विद्यालय आने और अनुशासन का पालन करने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया।
चयनित विद्यार्थियों का विद्यालय परिवार द्वारा उत्साहवर्धन किया गया तथा भविष्य में भी अनुशासन, स्वच्छता और संस्कारों को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्या भारती की संस्कार आधारित शिक्षा
विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, स्वच्छता और भारतीय संस्कृति पर विशेष बल दिया जाता है।
आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता जैसे आयोजन विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित करने के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को भी मजबूत करते हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
निष्कर्ष
भीनमाल के आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित आदर्श विद्या मंदिर गणवेश प्रतियोगिता केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुई। विद्यालय परिवार, निर्णायक मंडल और प्रधानाचार्या के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को स्वच्छता, अनुशासन, आत्मविश्वास और संस्कारों का महत्वपूर्ण संदेश दिया।



