करवा चौथ 2026 पर भद्रा और शुक्र उदय को लेकर पंडित निलेश मेहता ने दी जानकारी। जानें नवविवाहिताओं के व्रत की मान्यता और नागदा में चंद्रोदय का समय।
Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को नवविवाहिताएं भी रख सकती हैं करवा चौथ का व्रत, भद्रा और शुक्र उदय को लेकर दूर की भ्रांतियां
नागदा में रात 8:33 बजे होगा चंद्रोदय, पंडित निलेश मेहता ने पंचांग गणना और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर दी जानकारी
दैनिक स्वराज वाणी | नागदा।
अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना का पर्व करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष करवा चौथ को लेकर भद्रा काल और शुक्र तारा उदय से संबंधित कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से नवविवाहित महिलाओं के बीच इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि वे इस वर्ष करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं या नहीं।
इन्हीं भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार की पहल पर श्री विनायक ज्योतिष सलाहकार, नागदा के पंडित निलेश मेहता ने पंचांग गणना और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भद्रा या शुक्र तारा उदय की चर्चा के आधार पर करवा चौथ के व्रत को निषिद्ध मानना उचित नहीं है। नवविवाहित महिलाएं भी अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार व्रत रख सकती हैं।
करवा चौथ की शाम नहीं रहेगा भद्रा का प्रभाव
पंडित निलेश मेहता के अनुसार पंचांग गणना में भद्रा का प्रारंभ 28 अक्टूबर को दोपहर 2:37 बजे और समापन 29 अक्टूबर को रात्रि 1:07 बजे बताया गया है। इस गणना के अनुसार करवा चौथ की शाम तक भद्रा समाप्त हो चुकी होगी।
ऐसे में शाम के समय होने वाले करवा चौथ पूजन को लेकर भद्रा के कारण किसी प्रकार का अनावश्यक भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्वों के संबंध में सही पंचांग गणना और शास्त्रीय जानकारी को समझना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं में गलत धारणाएं न फैलें।
शुक्र तारा उदय का नियम हर व्रत पर लागू नहीं
पंडित मेहता ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में शुक्र तारा उदय और अस्त से संबंधित नियमों का विशेष महत्व है। इनका विचार मुख्य रूप से विवाह और कुछ अन्य मांगलिक संस्कारों के शुभ मुहूर्त निर्धारित करने में किया जाता है।
हालांकि, इन नियमों को प्रत्येक पारंपरिक व्रत और धार्मिक अनुष्ठान पर स्वतः लागू मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नवविवाहित महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत निषिद्ध होने का कोई स्पष्ट सामान्य शास्त्रीय निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
यदि किसी परिवार में विशेष धार्मिक परंपरा प्रचलित है या व्रत को लेकर संशय है, तो संबंधित परिवार को योग्य आचार्य अथवा विद्वान पंडित से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।
नागदा में रात 8:33 से 8:34 बजे के बीच चंद्रोदय
उज्जैन महाकाल पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को नागदा में चंद्रोदय का समय रात्रि 8:33 से 8:34 बजे के बीच बताया गया है। वहीं जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:33 से 8:40 बजे के बीच रहेगा।
पंडित मेहता ने बताया कि महिलाएं अपने क्षेत्र में प्रचलित मान्य पंचांग और स्थानीय चंद्रदर्शन के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण कर सकती हैं।
भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी की होती है पूजा
करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।
परंपरानुसार महिलाएं प्रातःकाल से व्रत का संकल्प लेकर दिनभर उपवास रखती हैं। शाम के समय भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है।
कई परिवारों में करवा चौथ की कथा सुनने और सामूहिक पूजन करने की भी परंपरा है। रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद उसे जल अर्पित किया जाता है और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।
नवविवाहित महिलाएं भी परंपरा के अनुसार रख सकती हैं व्रत
पंडित निलेश मेहता ने बताया कि करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, विश्वास और वैवाहिक जीवन के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। नवविवाहित महिलाओं को केवल अपुष्ट चर्चाओं के आधार पर व्रत रखने या नहीं रखने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार की अपनी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हो सकती हैं। इसलिए महिलाओं को अपने परिवार की परंपरा और उचित धार्मिक मार्गदर्शन के अनुसार पर्व मनाना चाहिए।
धार्मिक भ्रांतियां दूर करना पहल का मुख्य उद्देश्य
ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्वों से जुड़ी अपुष्ट जानकारियों और भ्रांतियों को दूर करना है।
पंडित निलेश मेहता ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के संबंध में बिना प्रमाण के प्रसारित होने वाली सूचनाओं से लोगों में अनावश्यक भ्रम उत्पन्न होता है। ऐसे में पंचांग और शास्त्रीय परंपराओं के आधार पर सही जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने महिलाओं, विशेषकर नवविवाहिताओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी से प्रभावित हुए बिना अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और उचित मार्गदर्शन के अनुसार करवा चौथ का पर्व मनाएं।
जानकारी: पंडित निलेश मेहता, श्री विनायक ज्योतिष सलाहकार,नागदा

