मल्लिकार्जुन खरगे के समर्थन में अशोक गहलोत, बोले—‘भाजपा को हंगामा करने का हक नहीं’
जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। वहीं, कांग्रेस के कई नेता अपने अध्यक्ष के बयान का बचाव कर रहे हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भी खरगे का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी का व्यक्तिगत अपमान करने की नहीं थी।
गहलोत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि खरगे भारत के अनुभवी राजनेताओं में शामिल हैं और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझते हैं। गहलोत के अनुसार, खरगे का उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं था और उनकी मंशा प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ नहीं हो सकती।
‘आम बोलचाल में इस्तेमाल होते हैं मुहावरे’
अपने पोस्ट में गहलोत ने कहा कि “नानी याद दिला देना” और “बाप की जागीर समझना” जैसे रिश्तों से जुड़े मुहावरे और लोकोक्तियां आम बोलचाल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी अभिव्यक्तियां लंबे समय से भाषा और संवाद में इस्तेमाल होती रही हैं।
गहलोत की दलील है कि खरगे की टिप्पणी को उसके संदर्भ और बोलचाल की शैली में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इन शब्दों को व्यक्तिगत अपमान के रूप में पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने इस विवाद पर भाजपा की प्रतिक्रिया को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी को इस विषय पर हंगामा करने का अधिकार नहीं है।
खरगे की टिप्पणी पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
खरगे की टिप्पणी सामने आने के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से खरगे के बयान को लेकर जवाब मांगा और इसे प्रधानमंत्री पद से जोड़कर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बयान को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में खरगे की मंशा और संदर्भ को नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्टी के नेता इसे राजनीतिक भाषण के दौरान इस्तेमाल की गई आम बोलचाल की अभिव्यक्ति बता रहे हैं। अशोक गहलोत ने भी इसी आधार पर खरगे का बचाव किया और कहा कि उनके शब्दों को व्यक्तिगत अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गहलोत ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा का किया जिक्र
गहलोत ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री पद की गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि खरगे इस पद के महत्व और सम्मान को समझते हैं। उन्होंने कहा कि देश के वरिष्ठ नेताओं में शामिल खरगे की नीयत किसी व्यक्ति या पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नहीं हो सकती।
गहलोत के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद में अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ खड़ा है। उनका कहना है कि राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किए गए मुहावरों को सीधे अपमानजनक टिप्पणी करार देने से पहले उनका संदर्भ समझना चाहिए। भाजपा के आरोपों और कांग्रेस के जवाब के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी है।
दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज
इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। भाजपा की ओर से खरगे की टिप्पणी की आलोचना की जा रही है, जबकि कांग्रेस नेता इसे सामान्य बोलचाल के मुहावरे के तौर पर देख रहे हैं। अशोक गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष का समर्थन करते हुए भाजपा की आपत्ति को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया।
फिलहाल, खरगे की टिप्पणी को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। गहलोत के बयान के बाद कांग्रेस का पक्ष सामने आया है, जबकि भाजपा नेताओं की आपत्तियां भी चर्चा में बनी हुई हैं। विवाद का केंद्र यही है कि खरगे के शब्दों को किस संदर्भ में समझा जाए और क्या उन्हें प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत अपमान माना जाना चाहिए।
