टीकमगढ़ के प्रखर विश्वकर्मा को ‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ का सम्मान
40 से अधिक देशों के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा देने का दावा, नई दिल्ली में मिला सम्मान
पलेरा। बुंदेलखंड के युवा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष शिक्षक प्रखर विश्वकर्मा को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया स्कूल लीडरशिप समिट एंड अवार्ड्स 2026 में ‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ के सम्मान से नवाजा गया। 25 अक्टूबर को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुए कार्यक्रम में वर्ल्ड अलायंस ऑफ स्कूल प्रिंसिपल्स (WASP) की ओर से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। पुरस्कार एंबेसडर डॉ. ओफाडिले टी. गोफामोडिमो ने दिया।
टीकमगढ़ जिले के प्रखर भोपाल के बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BIST) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। पढ़ाई के साथ वे अंतरिक्ष विज्ञान, एयरोस्पेस तकनीक और वैज्ञानिक शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना की है। इसके माध्यम से उनका प्रयास विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विषयों की जानकारी देना है।
40 से अधिक देशों के विद्यार्थियों तक पहुंच
प्रखर के अनुसार, वे 40 से अधिक देशों के एक हजार से ज्यादा बच्चों को स्पेस टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और रॉकेट साइंस जैसे विषयों में शिक्षा एवं मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस शैक्षणिक पहल के तहत विद्यार्थियों को रॉकेट की कार्यप्रणाली, अंतरिक्ष अभियानों की योजना, उपग्रहों की भूमिका और आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के बारे में समझाया जाता है।
प्रखर का कहना है कि अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा बड़े शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी विज्ञान के इन विषयों को सीखने और उनमें आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। उनकी पहल में जटिल तकनीकी विषयों को सरल तरीके से समझाना और बच्चों में सवाल पूछने की जिज्ञासा जगाना शामिल है।
एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक में नवाचार पर जोर
एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रखर एयरोस्पेस और रक्षा प्रौद्योगिकी से जुड़े नवाचारों पर भी काम कर रहे हैं। उनका विशेष ध्यान रॉकेट प्रणालियों, अंतरिक्ष तकनीक और भविष्य की जरूरतों से जुड़े विचारों तथा प्रोटोटाइप के विकास पर है। उनका मानना है कि अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में देश को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को शुरुआती स्तर से ही विज्ञान, इंजीनियरिंग और अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
वे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय तकनीक के व्यावहारिक उपयोग, डिजाइन, नवाचार और समस्या-समाधान से भी परिचित कराना चाहते हैं। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान की अवधारणाओं को समझने और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
प्रतिभा को अवसरों से जोड़ने का प्रयास
प्रखर के अनुसार, विद्यार्थी की प्रतिभा उसकी आर्थिक स्थिति या भौगोलिक पृष्ठभूमि से तय नहीं होनी चाहिए। सही मार्गदर्शन, सीखने के अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर बच्चे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपनी रुचि विकसित कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से वे विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ परियोजनाओं पर काम करना और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद वे अपनी पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहे हैं। उनका लक्ष्य अंतरिक्ष शिक्षा को अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाना और युवा पीढ़ी को विज्ञान तथा अनुसंधान के लिए प्रेरित करना है।
बुंदेलखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा
टीकमगढ़ जिले से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी शिक्षा में सक्रिय प्रखर की उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण है। उनकी यात्रा बताती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने में निरंतर सीखने, मेहनत और नए विचारों पर काम करने की इच्छाशक्ति अहम भूमिका निभाती है।
‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ का सम्मान प्रखर की शैक्षणिक और तकनीकी यात्रा का नया पड़ाव है। वे अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा को व्यापक स्तर पर पहुंचाने और विद्यार्थियों को तकनीक एवं अनुसंधान से जोड़ने के अपने प्रयास आगे जारी रखना चाहते हैं।
