IDFC First Bank के वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के नतीजे: पीएटी 196.5% बढ़कर 1,045 करोड़ रुपए हुआ
मुंबई, अक्टूबर 2026
लगातार दूसरी तिमाही में पीएटी 1,000 करोड़ के पार
IDFC First Bank ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे घोषित किए। वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में बैंक का टैक्स के बाद मुनाफा (पीएटी) सालाना आधार पर 196.5% बढ़कर 1,045 करोड़ रुपए हो गया। पहली छमाही में पीएटी 2,120 करोड़ रुपए रहा, जबकि एसेट्स पर रिटर्न (आरओए) 0.99% रहा। दूसरी तिमाही में आरओए 0.93% रहा। लगातार दूसरी तिमाही में पीएटी 1,000 करोड़ रुपए के पार रहा।
डिपॉजिट में मजबूत बढ़ोतरी
कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 25.9% और पिछली तिमाही के मुकाबले 11.8% बढ़कर 3,48,583 करोड़ रुपए हो गया। दूसरी तिमाही में औसत सीएएसए रेशियो 48.4% पर मजबूत बना रहा। पिछली तिमाही के 50.1% से आई मामूली गिरावट की मुख्य वजह तिमाही के दौरान एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में हुई बड़ी बढ़ोतरी रही।
लोन ग्रोथ
क्रेडिट सब्स्टीट्यूट्स और एफसीएनआर (बी) के बदले दिए गए लोन सहित कुल लोन और एडवांस सालाना आधार पर 30.1% बढ़कर 3,46,913 करोड़ रुपए हो गए। एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के बदले दिए गए लोन को हटाने पर, आईबीपीसी को शामिल करते हुए, लोन ग्रोथ 22.2% रही।
ऑपरेटिंग लेवरेज और कॉस्ट-टू-इनकम में सुधार
लगातार दूसरी तिमाही में खर्चों की बढ़ोतरी, आय की बढ़ोतरी से करीब 500 बेसिस पॉइंट कम रही। पहली छमाही में अतिरिक्त आय के मुकाबले खर्च का रेशियो 55% रहा। ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे को हटाने पर मुख्य कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो पहली तिमाही के 70.73% से सुधरकर दूसरी तिमाही में 70.16% हो गया। इसी तरह ट्रेडिंग मुनाफा हटाने पर मुख्य ऑपरेटिंग प्रॉफिट दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 38.5% बढ़कर 2,527 करोड़ रुपए हो गया।
एसेट क्वालिटी स्थिर
ग्रॉस एनपीए (जीएनपीए) 1.32% और नेट एनपीए 0.40% रहा। औसत एसेट्स के मुकाबले क्रेडिट कॉस्ट घटकर 1.01% हो गई।
एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट से जुटाए 34,390 करोड़ रुपए
दूसरी तिमाही में बैंक ने 34,390 करोड़ रुपए (करीब 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर) के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाए। खास बात यह है कि बैंक की भारत के बाहर कोई शाखा, सब्सिडियरी या प्रतिनिधि कार्यालय नहीं है। बैंक के अनुसार यह उसकी डिजिटल क्षमता और ग्राहकों के भरोसे को दिखाता है।
ये डिपॉजिट मुख्य रूप से 3 से 5 साल की अवधि के हैं, जिससे आने वाले वर्षों में लंबे समय तक स्थिर लिक्विडिटी मिलेगी। पीएसएल से मिलने वाले लाभ को शामिल करने पर इनकी कुल लागत घरेलू फिक्स्ड डिपॉजिट की लागत से करीब 1% कम है।
एफसीएनआर डिपॉजिट से नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई), पीएटी, प्रति शेयर कमाई (ईपीएस) और रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि इससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) का आंकड़ा देखने में कम हुआ है, क्योंकि एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के बदले आईबीयू शाखा से लोन दिए जाने से बैलेंस शीट में 24,885 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई।
पहली बार इंटरनेशनल रेटिंग
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बैंक को निवेश के दृष्टिकोण से अच्छी मानी जाने वाली लंबी अवधि की ‘बीबीबी-‘ रेटिंग दी है।
सीईओ वी. वैद्यनाथन का बयान
नतीजों पर बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने कहा, “वित्त वर्ष 27 की पहली और दूसरी, दोनों तिमाहियों में हमारा पीएटी 1,000 करोड़ रुपए के पार रहा। अब हमें एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स से निवेश के लिहाज से अच्छी मानी जाने वाली रेटिंग भी मिली है। लगातार दूसरी तिमाही में हमारे खर्चों की बढ़ोतरी, आय की बढ़ोतरी से करीब 500 बेसिस पॉइंट कम रही। इसके चलते हमारा कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो लगातार घट रहा है और हमारा आरओए अब 1% के करीब पहुंच गया है।”
उन्होंने कहा, “34,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाना बैंक के लिए बड़ी उपलब्धि रही है। इससे हमें 3 से 5 साल तक की स्थिर लिक्विडिटी मिलती है, जो खासकर ब्याज दरें बढ़ने के माहौल में बहुत अहम है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही हमारे लिए शानदार रही और हमें उम्मीद है कि हम इस रफ्तार को बनाए रखेंगे।”
