दमोह के अमाटा गांव में 20 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या — दैनिक स्वराज वाणी
परिजनों ने अस्पताल में पोस्टमार्टम और शासकीय शव वाहन मिलने में देरी का आरोप लगाया; निजी एम्बुलेंस चालकों पर दबाव बनाने की बात कही
कोमल अहिरवार, जिला ब्यूरो चीफ
दमोह। जबलपुर नाका चौकी क्षेत्र के ग्राम अमाटा में 20 वर्षीय युवक की फांसी लगाने से मौत हो गई। मृतक की पहचान अनिल सिंह गौड़, पिता महेश सिंह गौड़ के रूप में हुई है। घटना के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
परिजनों के अनुसार, घटना पिछली रात की है। मृतक के पिता महेश गौड़ ने बताया कि परिवार के सदस्य खाना खा रहे थे। इसी दौरान अनिल अपने कमरे में चला गया और उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। परिवार वालों को लगा कि वह सोने गया है। कुछ समय बाद जब परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो अनिल फंदे पर लटका हुआ मिला। इसके बाद परिवार ने जबलपुर नाका चौकी पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर शासकीय चिकित्सालय दमोह ले गई। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से जानकारी लेकर घटना के कारणों की पड़ताल कर रही है।
परिजनों ने पोस्टमार्टम में देरी की बात कही
मृतक के पिता महेश गौड़ और किल्लाई के उपसरपंच कन्हैया कुचबदिया ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम कराने के लिए उन्हें करीब चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा। परिजनों के अनुसार, इस दौरान पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शासकीय अस्पताल का निशुल्क शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि शासकीय वाहन की जानकारी लेने पर निजी एम्बुलेंस चालकों ने उनसे शव ले जाने के लिए निजी वाहन किराये पर लेने को कहा। परिवार का कहना है कि चालकों ने उनसे यह भी कहा कि उन्हें सरकारी शव वाहन नहीं मिलेगा और निजी वाहन लेना पड़ेगा। परिजनों ने आरोप लगाया कि इस स्थिति में वे असमंजस में रहे और उन्हें शव ले जाने की व्यवस्था के लिए परेशानी उठानी पड़ी।
निजी एम्बुलेंस को लेकर उठाए सवाल
कन्हैया कुचबदिया और मृतक के पिता ने अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंसों की मौजूदगी तथा उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि दुख की घड़ी में परिवार को शासकीय शव वाहन और अस्पताल की जरूरी सेवाएं समय पर मिलनी चाहिए थीं। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क शव वाहन उपलब्ध हो।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि निजी एम्बुलेंस चालकों ने उन पर वाहन किराये पर लेने का दबाव बनाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों से संपर्क की कोशिश
घटना और अस्पताल में शव वाहन की उपलब्धता संबंधी शिकायतों पर पक्ष जानने के लिए दमोह के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सिविल सर्जन से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। खबर लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों से बात नहीं हो सकी। उनका पक्ष मिलने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, युवक की मौत के संबंध में जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिजनों ने अस्पताल में पोस्टमार्टम प्रक्रिया और शव वाहन की व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारों से जवाब लेने की मांग की है।
