बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता की पहल, अबगांवकला और रन्हाईकला में कार्यशालाएं आयोजित
बाल विवाह, बाल तस्करी और शोषण से बचाव की दी जानकारी; विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 181 के बारे में बताया
राजकुमार मौर्य
हरदा सिटी रिपोर्टर
हरदा, 23 अक्टूबर। बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग, हरदा ने अबगांवकला और रन्हाईकला के शासकीयविद्यालयों में विशेष कार्यशालाएं आयोजित कीं। ये कार्यक्रम मिशन वात्सल्य योजना और हब फॉर वूमेन एम्पावरमेंट के अंतर्गत हुए। विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों, अधिकारों और जरूरत के समय सहायता लेने के तरीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशालाएं शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अबगांवकला तथा शासकीय हाई स्कूल और शासकीय माध्यमिक स्कूल, रन्हाईकला में आयोजित की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सुरक्षा से जुड़े विषयों की समझ विकसित करना और उन्हें यह बताना था कि किसी विपरीत परिस्थिति में मदद कहां से ली जा सकती है।
बाल सुरक्षा कानूनों की दी जानकारी
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही बाल तस्करी और बाल शोषण से बचाव के विषय पर भी चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि किसी भी तरह की हिंसा, शोषण या असुरक्षित परिस्थिति का सामना होने पर चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना और सहायता लेना जरूरी है।
विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी होने पर वे जोखिम वाली परिस्थितियों को पहचानने और उचित सहायता तक पहुंचने में अधिक सक्षम हो सकते हैं। कार्यशाला में बच्चों को सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करने के लिए जागरूक किया गया।
हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी
कार्यशाला में बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और महिला हेल्पलाइन नंबर 181 की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि जरूरत पड़ने पर इन नंबरों के माध्यम से सहायता मांगी जा सकती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, मिशन वात्सल्य के तहत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के समन्वय से संचालित होती है। Ministry of Women and Child Development
विभाग की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाना भी रहा कि किसी परेशानी या असुरक्षित स्थिति में सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि समस्या को छिपाने के बजाय समय पर किसी जिम्मेदार व्यक्ति या संबंधित सेवा तक पहुंचाना जरूरी है। इससे बच्चों को अपने और दूसरे बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की मौजूदगी
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग से गजेंद्र बरकड़े और प्रियांश नामदेव उपस्थित रहे। परियोजना चाइल्ड हेल्पलाइन से रविराज राजपूत और शुभम धार्मिक ने भी कार्यशालाओं में सहभागिता की। विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं भी इस दौरान मौजूद रहे।
कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यालयों में बाल सुरक्षा, अधिकारों और सहायता सेवाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई। विद्यार्थियों को बाल विवाह, तस्करी और शोषण जैसे विषयों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में सहायता लेने का संदेश दिया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित इन कार्यशालाओं में अबगांवकला और रन्हाईकला के शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और शिक्षकों ने बच्चों को जागरूकता संबंधी जानकारी पर ध्यान देने तथा जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए प्रेरित किया।
