तिब्बत में 7 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 16 की मौत और 54 घायल; बचाव अभियान जारी
नागकू क्षेत्र में कई मकान ढहे, 1,600 से अधिक बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे; भूकंप के बाद कई झटके भी आए
तिब्बत। चीन के तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार रात आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत और 54 लोगों के घायल होने की सूचना है। भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागकू क्षेत्र में था। झटके इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों और वाहनों में शरण लेने लगे। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है।
भूकंप भारतीय समयानुसार गुरुवार रात करीब 8:03 बजे आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इसका केंद्र नागकू के पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। एजेंसियों ने भूकंप की गहराई अलग-अलग बताई है—USGS ने इसे करीब 18 किलोमीटर दर्ज किया, जबकि चीन की रिपोर्टों में गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। नागकू क्षेत्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर है।
सैकड़ों मकान और पशुशालाएं ढहीं
भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान नागकू क्षेत्र के बाचेन काउंटी और आसपास के इलाकों में हुआ है। स्थानीय प्रशासन की जानकारी के आधार पर एपी ने बताया कि कम से कम 339 मकान और 20 पशुशालाएं ढह गईं। कुछ गांवों में मकानों की दीवारों में दरारें आई हैं। प्रभावित क्षेत्र ऊंचाई पर और कम आबादी वाला है, जिससे वहां तक पहुंचना और राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भूकंप के बाद स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने रात खुले स्थानों या अपनी गाड़ियों में बिताई। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक अस्थायी आवास, टेंट, बिस्तर, सर्दियों के कपड़े और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की है।
1,600 से ज्यादा लोग बचाव कार्य में तैनात
राहत और बचाव अभियान के लिए स्थानीय स्तर पर 1,600 से अधिक कर्मियों को लगाया गया है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और क्षतिग्रस्त इलाकों का आकलन कर रहे हैं। अधिकारियों ने घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी बचाव और चिकित्सा राहत कार्य तेजी से चलाने के निर्देश दिए हैं।
भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, USGS ने कम से कम सात बड़े आफ्टरशॉक्स की जानकारी दी, जिनकी तीव्रता 4.3 से 5.2 के बीच थी। लगातार आ रहे झटकों के कारण लोगों में डर बना हुआ है और कई परिवार घरों में लौटने से बच रहे हैं।
सड़क और संचार सेवाओं पर असर
भूकंप के कारण कुछ इलाकों में संचार सेवाएं बाधित हुई हैं। चट्टानें खिसकने से राष्ट्रीय राजमार्ग-317 का एक हिस्सा बंद करना पड़ा है। फिलहाल इस मार्ग से केवल बचाव दल और आपात सहायता से जुड़े वाहनों को गुजरने दिया जा रहा है। क्षेत्र से गुजरने वाली रेल सेवाओं पर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं और कुछ ट्रेनों को रोका गया है।
मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में अगले कुछ दिनों के दौरान रुक-रुककर बर्फबारी की आशंका जताई है। खराब मौसम से राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने घायलों तक पहुंचने, अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने और दूरस्थ गांवों से संपर्क बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में झटकों के दावे की पुष्टि जरूरी
कुछ खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी झटके महसूस होने की बात कही जा रही है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि वहां दर्ज भूकंपीय गतिविधियां तिब्बत के इसी भूकंप से जुड़ी थीं या अलग घटनाएं थीं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की सूची में अफगानिस्तान में अलग से 4.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज है। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही भूकंप का असर बताने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
फिलहाल प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत कार्य और नुकसान का आकलन कर रहा है। मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और आफ्टरशॉक्स के दौरान खुले तथा सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है।
