करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को, मुरैना में शाम 5:38 से 6:55 बजे तक पूजा का मुहूर्त
मुरैना। सुहागिन महिलाओं का प्रमुख पर्व करवा चौथ इस वर्ष गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना के साथ व्रत रखेंगी। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, मुरैना में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:55 बजे तक रहेगा। मुरैना में चंद्रोदय रात 8:20 बजे होने की संभावना है। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय स्थानीय स्थिति के अनुसार बदल सकता है।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को रखा जाएगा व्रत
करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 10:09 बजे तक रहेगी। पर्व गुरुवार को पड़ने के कारण महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा करेंगी और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करेंगी।
डॉ. जैन ने बताया कि इस बार करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का विशेष संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। महिलाएं अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम व विश्वास बनाए रखने की कामना करती हैं।
करवा चौथ का धार्मिक और पारिवारिक महत्व
करवा चौथ को पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी इस पर्व से जुड़ी है। कई घरों में महिलाएं एक साथ पूजन करती हैं, कथा सुनती हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देती हैं।
पूजा में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानकर उनका स्मरण किया जाता है। भगवान शिव और गणेशजी की आराधना के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा भी निभाई जाती है। परिवारों में पूजा की विधि और रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है।
मिट्टी के करवे का विशेष महत्व
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी का करवा विशेष महत्व रखता है। करवे में जल भरकर उसे पूजा में रखा जाता है। इसे मंगलभाव, शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। चंद्रोदय के बाद इसी करवे के जल से चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प और मिठाई रखकर पूजन की तैयारी की जाती है।
सरगी से शुरू होगा व्रत
करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करती हैं और परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करती हैं। सरगी में फल, दूध, मेवे और मिठाई जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि व्रत की परंपरा और नियम परिवार तथा स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा की चौकी सजाकर माता पार्वती, भगवान शिव, गणेशजी और करवा माता का पूजन किया जाता है। करवे में जल भरकर दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी या पढ़ी जाती है। कई परिवारों में करवे का आदान-प्रदान करने और सामूहिक रूप से पूजा की थाली घुमाने की परंपरा भी है।
चंद्रमा को अर्घ्य देकर होगा व्रत का पारण
चंद्रोदय के बाद महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और करवे के जल से अर्घ्य देती हैं। इसके बाद पति के दर्शन कर उनकी दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। परंपरा के अनुसार, पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
मुरैना में चंद्रोदय रात 8:20 बजे संभावित है, जबकि अन्य शहरों में समय अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं अपने शहर के स्थानीय चंद्रोदय समय की जानकारी अवश्य लें। करवा चौथ आस्था के साथ-साथ परिवार और दांपत्य जीवन में प्रेम व एकता का संदेश देने वाला पर्व है।
