MP Police Smriti Diwas 2026: CM मोहन यादव ने शहीद पुलिसकर्मियों को दी श्रद्धांजलि, नशे को बताया बड़ी चुनौती
भोपाल के लाल परेड मैदान स्थित शहीद स्मारक प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बलिदान को किया याद। कहा—मध्यप्रदेश सबसे पहले नक्सलमुक्त प्रदेश बना।
भोपाल। मध्यप्रदेश में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। बुधवार, 21 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान स्थित शहीद स्मारक प्रांगण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को याद किया और उनके योगदान को नमन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सबसे पहले नक्सलमुक्त प्रदेश बना है। उन्होंने नशे और ड्रग्स को पुलिस तथा समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बताया। पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
लाल परेड मैदान में शहीदों को श्रद्धांजलि
भोपाल के लाल परेड मैदान स्थित शहीद स्मारक प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पुलिस स्मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन उन पुलिसकर्मियों की याद में समर्पित है, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम का उद्देश्य शहीद पुलिसकर्मियों के त्याग और सेवा को याद करना है। पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध रोकने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। कई बार ड्यूटी के दौरान उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। स्मृति दिवस पर उनके इसी साहस और समर्पण को सम्मान दिया जाता है।
नक्सलमुक्त प्रदेश बनने का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश सबसे पहले नक्सलमुक्त प्रदेश बना। उन्होंने इस उपलब्धि को पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रयासों से जोड़ते हुए उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ा है।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन और विकास को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के वक्तव्य में प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की भूमिका का उल्लेख रहा। उन्होंने शहीदों को याद करते हुए सुरक्षा और शांति बनाए रखने में पुलिसकर्मियों के योगदान को रेखांकित किया।
ड्रग्स और नशा पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने ड्रग्स को मौजूदा समय की चुनौती बताया। नशे का अवैध कारोबार और युवाओं तक नशीले पदार्थों की पहुंच परिवारों और समाज के लिए चिंता का विषय है। इस पर नियंत्रण के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ जागरूकता और सामाजिक भागीदारी भी जरूरी है।
नशे से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने में पुलिस को तस्करी और बिक्री के नेटवर्क पर कार्रवाई करनी होती है। साथ ही, युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से बचाने के लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की भूमिका भी अहम रहती है। मुख्यमंत्री के संबोधन में ड्रग्स को चुनौती बताना इस बात की ओर संकेत करता है कि नशे के खिलाफ प्रयास लगातार जारी रखने होंगे।
पुलिस स्मृति दिवस का महत्व
पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीदों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों और जोखिमों को समझने का भी दिन है। ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी अपराध, हिंसा, दुर्घटना और आपात स्थितियों का सामना करते हैं। कई बार आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वे कठिन निर्णय लेते हैं और जोखिम उठाते हैं।
ऐसे अवसर पर शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त की जाती है। उनका बलिदान पुलिस बल के लिए प्रेरणा का स्रोत है और नागरिकों को सुरक्षा देने के संकल्प की याद दिलाता है।
भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि देकर उनके योगदान को नमन किया। साथ ही, नक्सलमुक्त प्रदेश बनने और ड्रग्स के खिलाफ चुनौती का जिक्र करते हुए राज्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों के त्याग और पुलिसकर्मियों की सेवा भावना को याद किया गया।
