इंदौर में 66 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का चालान, 21 आरोपी और संस्थाएं तलब
इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड, जिसका वर्तमान नाम एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड है, से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ईडी के इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार, एक अक्टूबर को विशेष पीएमएलए न्यायालय में यह शिकायत प्रस्तुत की। इसमें कुल 21 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी कर प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है।
सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुई जांच
प्रकाशित विवरण के अनुसार, ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की भोपाल इकाई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत जांच शुरू की थी। एफआईआर में कंपनी और उसके निदेशकों पर बैंकों के समूह को अनुचित आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद ईडी ने संबंधित वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की जांच की। अब अभियोजन शिकायत के माध्यम से मामला विशेष न्यायालय के समक्ष पहुंचा है।
कृषि जिंसों की खरीद के नाम पर सुविधाएं लेने का आरोप
ईडी की जांच के संबंध में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर बैंक के समूह से लगभग 66 करोड़ रुपये की गैर-निधि आधारित ऋण सुविधाएं कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त कीं। इनमें मुख्य रूप से लेटर ऑफ क्रेडिट यानी एलसी शामिल थे। आरोप है कि ये सुविधाएं संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि जिंसों की खरीद के नाम पर ली गई थीं।
एजेंसी के अनुसार, इन लेनदेन में वास्तविक खरीद को दर्शाने के लिए कथित रूप से मनगढ़ंत दस्तावेज इस्तेमाल किए गए। इनमें जाली विनिमय बिल और फर्जी माल परिवहन रसीदें शामिल बताई गई हैं। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि बैंक सुविधाओं के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों के पीछे वास्तविक व्यापार था या नहीं।
एक से तीन दिन में कंपनी के खातों में वापस पहुंची राशि
ईडी का आरोप है कि बिलों को बैंकों के माध्यम से भुनाने के बाद प्राप्त राशि कई शेल कंपनियों और अन्य संस्थाओं के खातों से होकर गुजारी गई। यह रकम कथित तौर पर एक से तीन दिनों के भीतर रुचि ग्लोबल लिमिटेड के बैंक खातों में वापस पहुंच गई। एजेंसी ने इस प्रक्रिया को धन की कई स्तरों पर आवाजाही और उसके मूल स्रोत को छिपाने से जोड़ा है।
जांच संबंधी विवरण के अनुसार, निर्धारित तारीखों पर कंपनी द्वारा भुगतान नहीं किए जाने से एलसी का दायित्व उन्हें जारी करने वाले बैंकों पर आ गया। इससे बैंकों के समूह को आर्थिक नुकसान होने का आरोप है। वित्तीय लेनदेन की इसी श्रृंखला को अभियोजन शिकायत का आधार बनाया गया है।
तलाशी में नकदी जब्त, संपत्ति भी कुर्क
इस मामले में ईडी ने 23 दिसंबर 2025 को तलाशी कार्रवाई की थी। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 23.50 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई और बैंक खाते फ्रीज किए गए थे। इसके बाद संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी हुई।
ईडी की 20 फरवरी 2026 की आधिकारिक विज्ञप्ति में 5.13 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क किए जाने की पुष्टि की गई थी। विज्ञप्ति के अनुसार, यह संपत्ति उमेश शाहर्रा की पत्नी नीता शाहर्रा के नाम दर्ज भूमि है। एजेंसी ने उस समय बताया था कि कथित रूप से निकाली गई राशि विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से घुमाकर संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल की गई।
आगे की जांच जारी
अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बावजूद मामले की जांच जारी है। अब नोटिस प्राप्त व्यक्तियों और संस्थाओं को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। फिलहाल सामने आए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं; आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा।
