पड़ाना और आसपास के गांवों में गणपति बप्पा को दी विदाई, बच्चों की झांकियों ने बढ़ाई उत्सव की रौनक
दैनिक स्वराज वाणी | पड़ाना। अनंत चतुर्दशी पर पड़ाना नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर गणेश उत्सव का समापन किया गया। दस दिनों तक घरों और पंडालों में विराजे गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने उन्हें विदाई दी। कई स्थानों पर छोटे बच्चों ने भी झांकी पंडाल बनाकर गणेश प्रतिमा स्थापित की थी। शुक्रवार, 25 सितंबर को इन पंडालों में पूजा के बाद विसर्जन किया गया।
पड़ाना के साथ मऊ, बरूखेड़ी, नारायणपुर, मल्हारगंज, काकरिया, कचरिया, मंगराना, रामपुरखेड़ा, आसारेटा पवार, हीरापुर, नारायणगंज खेड़ा, करौंदी और टीकोद सहित आसपास के क्षेत्रों में गणेश उत्सव मनाया गया। आयोजकों के अनुसार, बच्चों ने अपने-अपने स्थानों पर छोटे पंडाल और झांकियां तैयार की थीं। दस दिनों तक इन स्थानों पर गणपति जी की आराधना हुई।
बच्चों ने सजाए छोटे-छोटे पंडाल
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सहभागिता उत्सव का खास हिस्सा रही। उन्होंने समूह बनाकर झांकी पंडाल तैयार किए और उनमें भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की। प्रतिदिन पूजा-अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा को विदाई देने की तैयारी की गई।
इन छोटे आयोजनों में बच्चों के साथ उनके परिवारों और आसपास के लोगों की भी भागीदारी रही। पंडाल सजाने से लेकर विसर्जन तक की गतिविधियों में बच्चों ने उत्साह दिखाया। इससे उन्हें सामूहिक रूप से धार्मिक आयोजन में भाग लेने का अवसर मिला। कई परिवारों के लिए बच्चों द्वारा सजाई गई झांकी उत्सव के दस दिनों का आकर्षण रही।
घरों में विराजे गणपति को भी किया विदा
सार्वजनिक पंडालों के अलावा जिन श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना की थी, उन्होंने भी अनंत चतुर्दशी पर पूजा कर प्रतिमा का विसर्जन किया। परिवारों ने गणपति बप्पा से सुख-शांति की कामना की और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना के साथ विदाई दी।
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ उत्सव अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ समाप्त होता है। इस दौरान कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार घर में प्रतिमा स्थापित कर नियमित पूजा करते हैं। वहीं बच्चों और युवाओं के समूह छोटे पंडाल बनाकर मोहल्ले या गांव में सामूहिक आयोजन करते हैं। पड़ाना और आसपास के गांवों में भी इस वर्ष दोनों तरह के आयोजन देखने को मिले।
पूजा-अर्चना के बाद हुआ विसर्जन
शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की। इसके बाद विसर्जन के लिए प्रतिमाओं को ले जाया गया। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि दस दिनों तक की आराधना के बाद बप्पा को विदा करते समय बच्चों और श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखाई दी।
अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन का समय परिवारों और आयोजकों ने अपनी परंपरा तथा स्थानीय व्यवस्था के अनुसार तय किया। उपलब्ध जानकारी में किसी एक निर्धारित शुभ मुहूर्त या सभी स्थानों के विसर्जन स्थल का विवरण नहीं दिया गया है।
पड़ाना नगर से लेकर आसपास के गांवों तक गणेश उत्सव के समापन में बच्चों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। छोटे पंडालों में गणपति की स्थापना, दस दिनों की पूजा और अंतिम दिन विसर्जन के साथ इस वर्ष का आयोजन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा को विदा करते हुए अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना की।
