पंप संचालक का 6 साल पुराना भरोसा टूटा; मैनेजर ने डिजिटल पेमेंट में सेंध लगाकर उड़ाए 5 लाख रुपये, फरार
Dhar। छह साल का भरोसा, संस्थान की चाबियां और लाखों का हिसाब-किताब… जिसे पंप संचालक ने अपनी आंख मूंदकर सौंप रखा था, उसी वफादार कर्मचारी ने मौका पाते ही संस्थान की तिजोरी साफ कर दी। सादलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भारत पेट्रोलियम के पंप पर कार्यरत मैनेजर ने छुट्टियों का फायदा उठाकर और डिजिटल पेमेंट में सेंध लगाकर संचालक को करीब 5 लाख रुपये की चपत लगा दी और फरार हो गया। मामला सामने आने के बाद पंप संचालक में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है, वहीं पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्रियता से जांच में जुट गई है।
धार-नागदा रोड पर सामने आया धोखाधड़ी का मामला
धार-नागदा रोड स्थित ग्राम कलसाड़ा बुजुर्ग के ‘वंदना फ्यूल स्टेशन’ पर यह धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पंप संचालक प्रतीक राय (67 वर्ष, निवासी ग्राम खेरोद) की शिकायत पर पुलिस ने मैनेजर ओमप्रकाश चौहान (निवासी ग्राम भोपावली नागदा, थाना कानवन) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) के तहत अमानत में खयानत का प्रकरण दर्ज किया है। घटना 1 से 4 सितंबर के बीच की बताई जा रही है, जबकि पुलिस ने मामले में 17 सितंबर को दोपहर 12:05 बजे प्राथमिकी दर्ज की। लंबे समय की जान-पहचान और कर्मचारी पर जताए गए भरोसे के चलते संचालक को शुरुआती दिनों में इस गड़बड़ी का आभास तक नहीं हुआ।
डिजिटल रिकॉर्ड निकालने में लगा समय, इसलिए हुई प्राथमिकी में देरी
पुलिस के अनुसार, बीपीसीएल कंपनी के ऑटोमेशन सिस्टम से विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड निकालने में काफी समय लगने के कारण प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब हुआ। कंपनी के लेन-देन संबंधी रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद ही पूरे मामले की सही तस्वीर सामने आ सकी, जिसके उपरांत संचालक की शिकायत पर औपचारिक कार्रवाई प्रारंभ की गई। इस दौरान डिजिटल ट्रांजैक्शन के आंकड़ों का मिलान करना पुलिस और संचालक दोनों के लिए एक जटिल प्रक्रिया साबित हुई।
धोखाधड़ी का अनूठा तरीका: छुट्टियों का उठाया फायदा
फरियादी के अनुसार, आरोपी ओमप्रकाश बीते 6 वर्षों से पंप पर कार्यरत था और संस्थान के लगभग हर महत्वपूर्ण काम से जुड़ा हुआ था। उसने जन्माष्टमी के दौरान लगातार बैंक अवकाश का फायदा उठाया और 1 से 4 सितंबर के बीच काउंटर से 2 लाख 40 हजार रुपये की नकदी बैंक में जमा कराने के बजाय हड़प ली। बैंक अवकाश की पूरी जानकारी होने के कारण आरोपी ने बेहद सुनियोजित ढंग से इसी अवधि को अपनी योजना के लिए चुना, ताकि नकदी जमा न होने का शक तत्काल न उठे और उसे भागने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
डिजिटल ट्रांजैक्शन में भी किया गबन
नकदी के अतिरिक्त आरोपी ने पिछले 15 से 20 दिनों में विभिन्न कार्ड स्वाइप और अन्य डिजिटल माध्यमों से 2 लाख 61 हजार 500 रुपये का गबन किया। इस तरह आरोपी ने नकद और डिजिटल दोनों माध्यमों को मिलाकर कुल करीब 5 लाख रुपये की बड़ी हेराफेरी को अंजाम दिया। संचालक को जब तक इस पूरी हेराफेरी की भनक लगी, तब तक आरोपी पंप के जरूरी रजिस्टर्स और लॉकर की चाबियां लेकर रफूचक्कर हो चुका था, जिससे संचालक के लिए स्थिति और भी पेचीदा हो गई।
प्रबंधन के भरोसे का उठाया नाजायज फायदा
लंबे समय से संस्थान में काम करने के कारण आरोपी पर प्रबंधन का अटूट विश्वास था, जिसका फायदा उठाकर उसने बेहद सुनियोजित तरीके से नकदी और डिजिटल ट्रांजैक्शन में हेरफेर किया। छह वर्षों की नौकरी के दौरान बनी भरोसेमंद छवि ने ही आरोपी को यह अवसर दिया, जिसका उसने पूरी योजना और धैर्य के साथ दुरुपयोग किया।
पुलिस ने शुरू की आरोपी की तलाश
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। वहीं पेट्रोल पंप संचालक अब संस्थान के रिकॉर्ड और चाबियां बरामद कराने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि पंप का सामान्य संचालन जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है।
