लंबित मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन, पुरानी पेंशन बहाली की उठाई मांग
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम प्रस्तुत किया मांग-पत्र; TET से मुक्ति, नियमितीकरण और वेतन विसंगतियों के निराकरण की मांग
मंडलेश्वर। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ की तहसील एवं ब्लॉक महेश्वर इकाई ने प्रदेश के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने, केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने, पदोन्नति प्रारंभ करने और वेतन विसंगतियां दूर करने सहित अनेक मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।
संगठन ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, आयुष तथा अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की मांग की। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण विषयों पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग
ज्ञापन में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को प्रमुख स्थान दिया गया। कर्मचारी संघ का कहना है कि सेवाकाल पूरा करने के बाद पेंशन कर्मचारी और उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती है। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निश्चित मासिक आय प्राप्त हो सकेगी।
संगठन ने कहा कि कर्मचारियों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा शासन और जनता की सेवा में लगाया है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था पर सरकार को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।
इसके साथ ही परिवार पेंशन की पात्रता के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि कम करने की मांग की गई। संघ के अनुसार, कम सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए परिवार पेंशन के नियमों को अधिक व्यावहारिक और कर्मचारी हितैषी बनाया जाना चाहिए।
ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने और केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने की मांग
राज्य कर्मचारी संघ ने प्रदेश के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की। संगठन का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए वर्तमान ग्रेच्युटी सीमा की समीक्षा करना आवश्यक है।
संघ ने राज्य कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान और उसी तिथि से महंगाई भत्ता प्रदान करने की मांग की। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि महंगाई भत्ते में अंतर या देरी होने से राज्य कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
महंगाई का प्रभाव केंद्र और राज्य के कर्मचारियों पर समान रूप से पड़ता है। इसलिए महंगाई भत्ते की दर और उसके भुगतान की तिथि में समानता रखी जानी चाहिए। लंबित अंतर राशि का भुगतान किए जाने की मांग भी कर्मचारियों द्वारा उठाई गई।
पदोन्नति प्रारंभ करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
ज्ञापन में विभिन्न विभागों में लंबे समय से प्रभावित पदोन्नति प्रक्रिया को प्रारंभ करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि पदोन्नति नहीं होने के कारण कई कर्मचारी वर्षों तक एक ही पद पर कार्य करते रहते हैं। इससे कर्मचारियों के वेतन, वरिष्ठता और मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
संघ ने मांग की कि पदोन्नति से संबंधित सभी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों का समाधान करते हुए कर्मचारियों को समय पर लाभ दिया जाए। अलग-अलग विभागों और संवर्गों में मौजूद वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए भी प्रभावी प्रक्रिया अपनाई जाए।
समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों के वेतनमान में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। संगठन ने सरकार से वेतन विसंगति संबंधी प्रकरणों की समीक्षा कर न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की।
संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का हो नियमितीकरण
राज्य कर्मचारी संघ ने संविदा तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने का मुद्दा भी उठाया। संगठन का कहना है कि कई कर्मचारी वर्षों से विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन नियमित पद का लाभ नहीं मिलने के कारण उन्हें सेवा सुरक्षा, निर्धारित वेतनमान और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
संघ ने मांग की कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर चुके संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति तैयार की जाए। नियमित पदों के विरुद्ध कार्य कर रहे पात्र कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि नियमितीकरण से कर्मचारियों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। इससे विभागों में कार्यरत अनुभवी मानव संसाधन का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।
सेवारत शिक्षकों को TET से मुक्त करने की मांग
ज्ञापन में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की गई। कर्मचारी संघ का कहना है कि निर्धारित नियुक्ति प्रक्रिया के माध्यम से सेवा में आए और लंबे समय से अध्यापन कर रहे शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
संगठन ने कहा कि अनुभवी शिक्षकों की सेवा और उनके अध्यापन कार्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को विशेष निर्णय लेना चाहिए। सेवारत शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए उन्हें TET से छूट प्रदान की जाए।
संघ ने शिक्षक संवर्ग की अन्य समस्याओं के निराकरण, समयमान वेतनमान और विभागीय लाभों के लंबित मामलों पर भी कार्रवाई करने की मांग उठाई।
पंचायत सचिवों के संविलियन की मांग
राज्य कर्मचारी संघ ने पंचायत सचिवों का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संविलियन करने की मांग की। संगठन ने कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की योजनाओं को लागू करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
हितग्राही योजनाओं के संचालन, ग्रामीणों के दस्तावेज तैयार करने, पंचायत रिकॉर्ड के संधारण और प्रशासनिक कामकाज में पंचायत सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद उनकी कई सेवा संबंधी मांगें लंबे समय से लंबित हैं।
संघ ने पंचायत सचिवों को विभागीय कर्मचारी का दर्जा देते हुए वेतन, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभ प्रदान करने की मांग की।
वाहन चालकों की नियमित भर्ती और अनुकंपा नियुक्ति पर जोर
ज्ञापन में सरकारी विभागों में रिक्त वाहन चालक पदों पर नियमित भर्ती करने की मांग की गई। कर्मचारी संघ के अनुसार, नियमित वाहन चालकों की कमी के कारण कई विभागों में वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से काम चलाया जा रहा है। इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार पड़ता है और शासकीय कार्य भी प्रभावित होते हैं।
अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग भी रखी गई। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है। अनुकंपा नियुक्ति में देरी होने से आश्रित परिवारों की परेशानियां बढ़ जाती हैं।
संगठन ने सरकार से मांग की कि सभी विभागों में लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों की समीक्षा कर पात्र आश्रितों को समयबद्ध रूप से नियुक्ति दी जाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आयुष कर्मचारियों की समस्याएं उठाईं
ज्ञापन में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, आयुष और अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की संवर्गवार समस्याओं को भी शामिल किया गया। संघ ने कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, नियमितीकरण, पदोन्नति, सेवा सुरक्षा और रिक्त पदों पर भर्ती से संबंधित मांगों का निराकरण करने का आग्रह किया।
संगठन का कहना है कि कर्मचारी शासन की योजनाओं को धरातल पर लागू करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होने से विभागीय कामकाज बेहतर होगा और जनता को भी अधिक प्रभावी सेवाएं मिल सकेंगी।
तहसील अध्यक्ष ने किया ज्ञापन का वाचन
कार्यक्रम के दौरान ज्ञापन का वाचन राज्य कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों की जानकारी देते हुए सरकार से सकारात्मक और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में ब्लॉक अध्यक्ष जुगल किशोर पाटीदार ने उपस्थित कर्मचारियों का आभार माना। उन्होंने कहा कि संगठन कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों को अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से शासन के सामने रखता रहेगा।
इस अवसर पर तहसील सचिव शैलेंद्र जामुने, ब्लॉक सचिव अर्जुन सिंह भावर, संजय पाटीदार, अनिल भटोरे, भंवर पटेल, हिम्मत सीटोले, संजय पटेल, दीपक चौबे, संजयराज पाटीदार, मोहन चौहान, गायत्री चौहान, ज्योत्सना शर्मा, राधा मंडलोई और नाजिमा खान सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
