शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन, अध्यादेश लाकर TET निरस्त करने की मांग
पुरानी पेंशन बहाली, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और कर्मचारी आयोग के गठन सहित मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 25 सूत्रीय मांग-पत्र
नटेरन। सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ की नटेरन इकाई ने प्रांतीय आह्वान पर प्रदर्शन करते हुए अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संघ ने प्रधानमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की। इसके अलावा मुख्यमंत्री के नाम सभी विभागों के कर्मचारियों की समस्याओं से संबंधित 25 सूत्रीय मांग-पत्र भी प्रस्तुत किया गया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को नौकरी के अंतिम पड़ाव में दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस विषय में हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।
नौकरी के अंतिम पड़ाव में परीक्षा लेना अनुचित: विश्वकर्मा
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष शिवप्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि संगठन की ओर से दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए हैं। पहला ज्ञापन सेवारत शिक्षकों से शिक्षक पात्रता परीक्षा लिए जाने के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम दिया गया है। दूसरे ज्ञापन में प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की 25 सूत्रीय मांगों को शामिल करते हुए मुख्यमंत्री से निराकरण की मांग की गई है।
शिवप्रसाद विश्वकर्मा ने कहा कि यह पहली बार देखने में आ रहा है कि वर्षों से शासकीय विद्यालयों में सेवा दे रहे शिक्षकों को नौकरी बचाने के लिए अपने सेवाकाल के अंतिम पड़ाव में पात्रता परीक्षा देनी पड़ रही है। कई शिक्षक वर्षों से विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। ऐसे शिक्षकों की सेवा और अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए।
संघ ने मांग की कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से संबंधित अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए। इसके लिए प्रदेश और केंद्र सरकार आवश्यक अध्यादेश लेकर आए, ताकि सेवारत शिक्षकों के मन में उत्पन्न असुरक्षा और तनाव दूर हो सके।
प्रधानमंत्री के नाम सौंपा पहला ज्ञापन
राज्य कर्मचारी संघ द्वारा प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षक पात्रता परीक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवारत शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा की शर्त लागू होने से उनके भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि जिन शिक्षकों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की और कई वर्षों तक सेवाएं दी हैं, उनकी योग्यता को दोबारा परीक्षा से जोड़ना व्यावहारिक नहीं है। शिक्षक अपनी सेवा अवधि में समय-समय पर प्रशिक्षण और विभागीय प्रक्रियाओं में भाग लेते रहे हैं। इसलिए उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए। संगठन ने इस संबंध में कानूनी और प्रशासनिक समाधान निकालने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री के नाम 25 सूत्रीय मांग-पत्र
कर्मचारी संघ ने दूसरा ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम सौंपा, जिसमें प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की 25 मांगों को शामिल किया गया। इनमें कर्मचारियों के स्वास्थ्य, वेतन, पेंशन, सेवा शर्तों और पदोन्नति से जुड़े विषय प्रमुख हैं।
संघ ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग की। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों को उपचार के लिए बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। कैशलेस स्वास्थ्य योजना लागू होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
इसके अलावा तीन संतान से संबंधित आदेश को निरस्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। कर्मचारियों ने कहा कि इस आदेश से जुड़े व्यावहारिक और सेवा संबंधी प्रभावों पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
लिपिक और पटवारी संवर्ग के वेतनमान में सुधार की मांग
ज्ञापन में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को मंत्रालय में कार्यरत कर्मचारियों के समान वेतनमान प्रदान करने की मांग उठाई गई। कर्मचारी संघ का कहना है कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों के वेतनमान में बड़ी असमानता नहीं होनी चाहिए।
इसके साथ ही पटवारी संवर्ग के वेतनमान की समीक्षा करने की मांग की गई। पटवारियों की जिम्मेदारियों, फील्ड ड्यूटी और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए उनके वेतनमान और सेवा सुविधाओं में आवश्यक सुधार किए जाने की मांग संघ द्वारा रखी गई है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि राजस्व विभाग के फील्ड कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार काम करना पड़ता है। शासन की कई योजनाओं, सर्वेक्षणों और प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में उनके वेतन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा जरूरी है।
पंचायत सचिवों को सातवां वेतनमान देने की मांग
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने पंचायत सचिवों को सातवें वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग भी प्रमुखता से रखी। संगठन का कहना है कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासन और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
पंचायत स्तर पर पात्र हितग्राहियों की पहचान, योजनाओं का संचालन, सरकारी रिकॉर्ड का संधारण और ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने में पंचायत सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए उन्हें सातवें वेतनमान का पूरा लाभ दिया जाना चाहिए।
आउटसोर्स और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की समस्याएं उठाईं
25 सूत्रीय मांग-पत्र में कृषि विभाग, नगरीय निकाय, आयुष विभाग, स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग सहित अलग-अलग विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं का उल्लेख किया गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
कर्मचारी संघ ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों को कई बार नियमित वेतन, निर्धारित अवकाश और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पाता। सरकार को उनके हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
आयुष, स्वास्थ्य और वन विभाग के कर्मचारियों से जुड़ी विभागीय मांगों का भी शीघ्र समाधान करने की मांग की गई। संघ ने सभी विभागों के कर्मचारियों की लंबित समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
पुरानी पेंशन बहाली और कर्मचारी आयोग के गठन की मांग
राज्य कर्मचारी संघ ने प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग दोहराई। कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन उनके सेवाकाल के बाद आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का प्रमुख माध्यम है। पुरानी पेंशन बहाल होने से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिल सकेगी।
इसके साथ ही राज्य कर्मचारी आयोग के गठन की मांग की गई। संघ का मानना है कि आयोग बनने से कर्मचारियों की समस्याओं, सेवा शर्तों और वेतन संबंधी मामलों पर नियमित रूप से विचार किया जा सकेगा। आयोग कर्मचारियों और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपे जाने के अवसर पर तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा, राहुल मालवीय, सुधीर जैन, मुन्नालाल शर्मा, प्रियंका विश्वकर्मा, शालिनी भावसार, प्रगति श्रीवास्तव, शोषण लकड़ा, वर्षा तिवारी, सावित्री सोनी, भावना जैन, आरती सेनदे, तरंग पाराशर, अंजलि मालवीय, अशोक शर्मा, राजाराम कोरी, राहुल पाठक, तखत सिंह और रामकरण मीणा सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
संघ पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार ज्ञापनों में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगी। कर्मचारियों ने चेतावनी देने के बजाय फिलहाल सरकार से संवाद और उचित निर्णय की अपेक्षा व्यक्त की है। उनका कहना है कि मांगों के निराकरण से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शासकीय सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
