रेस्क्यू टीम ने पकड़ा बाघ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
आठनेर। ब्राह्मणवाड़ा एवं मोर्शी रेंज क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों से दहशत में रह रहे ग्रामीणों को आखिरकार राहत मिली। पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू कर पिंजरे में कैद कर लिया। बाघ के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू अभियान में शामिल टीमों के प्रयासों की सराहना की।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भय का वातावरण बना हुआ था। बाघ की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद पुलिस एवं वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
संयुक्त टीम ने चलाया सर्च ऑपरेशन
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार जैन के निर्देश तथा थाना प्रभारी आठनेर नरेंद्र सिंह परिहार के नेतृत्व में पुलिस, वन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई। टीम ने ब्राह्मणवाड़ा और मोर्शी रेंज क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सर्च अभियान चलाया।
अभियान के दौरान टीम ने सतर्कता के साथ बाघ की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभियान को आगे बढ़ाया गया। अंततः टीम को बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने में सफलता मिली।
बाघ को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में कैद किए जाने के बाद ग्रामीणों में व्याप्त भय काफी हद तक कम हुआ। लंबे समय से बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों में बना हुआ था भय का माहौल
बाघ की गतिविधियों के चलते आसपास के गांवों के लोग काफी सतर्कता बरत रहे थे। ग्रामीणों को खेतों और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने के दौरान विशेष सावधानी रखने की जरूरत महसूस हो रही थी। खासकर सुबह और देर शाम के समय बाघ की संभावित मौजूदगी को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई थी।
ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस और वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाया गया। रेस्क्यू टीम ने क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी और बाघ को पकड़ने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की।
बाघ के रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने पुलिस, वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के पकड़े जाने से अब क्षेत्र में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद है।
सीमा से लगे क्षेत्रों में राहत
ब्राह्मणवाड़ा और मोर्शी रेंज से जुड़े क्षेत्र मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा के आसपास स्थित हैं। ऐसे में बाघ की गतिविधियों को लेकर दोनों राज्यों की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिंता बनी हुई थी।
बाघ के सफल रेस्क्यू की जानकारी मिलने के बाद सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी राहत का माहौल देखने को मिला। लोगों ने उम्मीद जताई कि वन विभाग आगे भी क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी बनाए रखेगा, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो।
वन्यजीव और ग्रामीण सुरक्षा पर जोर
वन क्षेत्रों से लगे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही सामान्य रूप से देखी जाती है। ऐसे मामलों में ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों को भी सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण होता है। बाघ के रेस्क्यू अभियान में टीम ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की।
रेस्क्यू के बाद बाघ को आगे कहां रखा जाएगा और उसके संबंध में वन विभाग द्वारा क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह संबंधित अधिकारियों के निर्णय के अनुसार तय किया जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों द्वारा बाघ की स्थिति का आकलन किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेस्क्यू अभियान की सफलता के बाद ग्रामीणों ने राहत जताई। क्षेत्र में भय का माहौल कम होने से लोग अपने दैनिक कार्यों की ओर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।
पुलिस एवं वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि वन्यजीवों से जुड़े संवेदनशील मामलों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। समय पर सूचना, निगरानी और योजनाबद्ध रेस्क्यू ऑपरेशन के माध्यम से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
फिलहाल बाघ के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र में राहत का वातावरण है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भविष्य में भी वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
रिपोर्ट: आशीष ठाकरे, संवाददाता
