दांतों में झनझनाहट क्यों होती है? जानिए Tooth Sensitivity के कारण, बचाव और सही उपचार
ठंडा-गर्म या मीठा खाते ही दांतों में उठता है तेज दर्द तो न करें नजरअंदाज, गलत तरीके से ब्रश करना भी हो सकता है कारण
नई दिल्ली। ठंडा पानी पीते, आइसक्रीम खाते या गर्म चाय की चुस्की लेते समय दांतों में अचानक तेज झनझनाहट महसूस होना एक सामान्य समस्या मानी जाती है। कई बार यह दर्द कुछ सेकंड में समाप्त हो जाता है, लेकिन बार-बार होने वाली झनझनाहट दांतों की किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकती है। चिकित्सा भाषा में इसे डेंटिन हाइपरसेंसिटिविटी या टूथ सेंसिटिविटी कहा जाता है।
एम्स, नई दिल्ली के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च में कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडॉन्टिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय लोगानी के अनुसार, दांतों की संवेदनशीलता की समस्या बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। समय रहते इसका कारण समझकर उचित देखभाल और उपचार किया जाए तो झनझनाहट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
दांत की अंदरूनी संरचना को समझना जरूरी
दांत मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण हिस्सों से मिलकर बना होता है। सबसे बाहर कठोर इनेमल, उसके नीचे डेंटिन और मध्य भाग में पल्प यानी नर्व तथा रक्त वाहिकाएं होती हैं। इनेमल दांतों को ठंडे, गर्म, खट्टे और मीठे पदार्थों के प्रभाव से बचाने वाली सुरक्षा परत का काम करता है।
जब किसी कारण से इनेमल घिसने लगता है या मसूड़े पीछे हटने के कारण दांत की जड़ खुल जाती है, तो उसके नीचे मौजूद डेंटिन बाहरी वातावरण के संपर्क में आ जाता है। डेंटिन में बहुत छोटी नलिकाएं होती हैं, जो दांत की नर्व से जुड़ी रहती हैं। ठंडा, गर्म, मीठा या खट्टा पदार्थ इन नलिकाओं के संपर्क में आता है तो उसका प्रभाव नर्व तक पहुंचता है और अचानक तेज झनझनाहट महसूस होती है।
टूथ सेंसिटिविटी के प्रमुख कारण
दांतों की संवेदनशीलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बहुत अधिक दबाव डालकर या हार्ड ब्रिसल वाले ब्रश से दांत साफ करने पर इनेमल धीरे-धीरे घिस सकता है। गलत ब्रशिंग से मसूड़े भी पीछे हट सकते हैं, जिससे दांतों की जड़ खुलने लगती है।
दांतों में कैविटी, दरार, टूटी हुई फिलिंग, मसूड़ों की बीमारी और दांत पीसने की आदत भी सेंसिटिविटी की वजह बन सकती है। इसके अलावा नींबू, संतरा, सिरका, कार्बोनेटेड ड्रिंक और अन्य अम्लीय खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है।
कई लोगों को दांतों की सफाई, फिलिंग, क्राउन लगाने या व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट के बाद कुछ समय के लिए झनझनाहट महसूस हो सकती है। ऐसी संवेदनशीलता कई बार अस्थायी होती है, लेकिन लगातार बनी रहने पर दंत चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
सेंसिटिव दांतों को ब्रश करने का सही तरीका
सेंसिटिविटी होने पर दांतों की सफाई बंद नहीं करनी चाहिए। दांतों को दिन में दो बार लगभग दो मिनट तक सॉफ्ट ब्रिसल वाले टूथब्रश से धीरे-धीरे साफ करना चाहिए। ब्रश को बहुत अधिक दबाकर चलाने या तेजी से आगे-पीछे रगड़ने से बचना चाहिए।
ब्रश को मसूड़ों की लाइन पर हल्के हाथ से रखकर छोटे और नियंत्रित गोलाकार स्ट्रोक में चलाया जा सकता है। दांतों की बाहरी, अंदरूनी और चबाने वाली सभी सतहों की सफाई करनी चाहिए। मेयो क्लिनिक भी दिन में दो बार सॉफ्ट ब्रिसल वाले ब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट से सफाई करने की सलाह देता है।
ब्रश के बाल फैल जाने या घिसने पर ब्रश बदल देना चाहिए। सामान्य तौर पर टूथब्रश को तीन से चार महीने में बदलने की सलाह दी जाती है।
डिसेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट से मिल सकती है राहत
सेंसिटिव दांतों के लिए तैयार किए गए डिसेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट झनझनाहट कम करने में मदद कर सकते हैं। इनमें मौजूद तत्व डेंटिन की खुली नलिकाओं को बंद करने या दर्द के संकेत को नर्व तक पहुंचने से रोकने का काम करते हैं। हालांकि, इनका असर एक-दो बार इस्तेमाल करने से नहीं, बल्कि नियमित उपयोग से दिखाई देता है।
टूथपेस्ट का चुनाव दंत चिकित्सक की सलाह से करना बेहतर होता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, डिसेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट और माउथवॉश हल्की संवेदनशीलता में मदद कर सकते हैं। गंभीर मामलों में डेंटिस्ट फ्लोराइड, डेंटल सीलेंट, बॉन्डिंग या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।
इन चीजों से बनाएं दूरी
दांतों में झनझनाहट होने पर बहुत अधिक ठंडे और गर्म पदार्थों का लगातार सेवन कम करना चाहिए। अत्यधिक खट्टे खाद्य पदार्थ, सोडा और एसिडिक ड्रिंक्स भी सीमित मात्रा में लेने चाहिए। अम्लीय पदार्थ खाने या पीने के तुरंत बाद जोर लगाकर ब्रश करने से इनेमल को अधिक नुकसान हो सकता है।
दांत पीसने या जबड़ा भींचने की आदत हो तो डेंटिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर रात में पहनने के लिए माउथ गार्ड दिया जा सकता है। तंबाकू और धूम्रपान मसूड़ों की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनसे बचना भी जरूरी है।
कब तुरंत डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए?
अगर झनझनाहट केवल कुछ सेकंड तक रहती है और डिसेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट से धीरे-धीरे कम हो रही है तो यह सामान्य संवेदनशीलता हो सकती है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बिना कुछ खाए भी हो, एक ही दांत में अधिक हो या गर्म-ठंडा हटाने के बाद भी देर तक जारी रहे तो जांच आवश्यक है।
दांत या मसूड़े में सूजन, बुखार, पस, चेहरे पर सूजन, चबाने में दर्द या दांत टूटने जैसे लक्षण हों तो उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, तेज या लगातार बना रहने वाला दर्द कैविटी, संक्रमण, मसूड़ों के पीछे हटने या दूसरी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
घरेलू उपाय इलाज का विकल्प नहीं
दांतों पर नींबू, नमक, बेकिंग सोडा या अन्य तेज पदार्थ रगड़ने जैसे घरेलू नुस्खे नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे इनेमल और अधिक घिस सकता है और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसलिए बिना जांच के किसी दवा, केमिकल या तेज घरेलू पदार्थ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
दांतों की झनझनाहट अपने आप में बीमारी होने के साथ-साथ कैविटी, मसूड़ों की बीमारी या दांत की नर्व से जुड़ी समस्या का लक्षण भी हो सकती है। सही कारण की पहचान के लिए दंत चिकित्सक की जांच सबसे जरूरी है।
