अब तक 12 लोगों की मौत; कई मरीज अस्पताल में भर्ती
बंडा क्षेत्र के कई गांवों में जहरीली शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत, प्रशासन ने शुरू की जांच
Sagar । मध्यप्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम-से-कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
बताया जा रहा है कि बंडा क्षेत्र के नौरोजा, घुघरा खुर्द, बराज और आसपास के गांवों में लोगों ने कथित तौर पर शराब का सेवन किया था। इसके बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। मरीजों को बंडा सिविल अस्पताल सहित सागर के जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए ले जाया गया।
प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों को तैनात कर घर-घर जाकर लोगों की जांच शुरू कराई है। अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध शराब के सेवन से प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मेथनॉल poisoning की आशंका
प्रारंभिक जांच में जहरीली शराब में मेथनॉल की मौजूदगी की आशंका जताई गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पोस्टमॉर्टम से मिले शुरुआती संकेत भी मेथनॉल विषाक्तता की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि घटना के पूरे कारण और शराब में मिलाए गए पदार्थ की पुष्टि जांच और रिपोर्टों के आधार पर ही होगी।
मरीजों में तबीयत बिगड़ने के बाद उल्टी, जी मिचलाना और आंखों से संबंधित परेशानी जैसे लक्षण सामने आने की जानकारी दी गई है। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सागर के बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है। एक गंभीर मरीज को बेहतर उपचार के लिए भोपाल भी एयरलिफ्ट किए जाने की रिपोर्ट है।
अवैध शराब के नेटवर्क की जांच
घटना के बाद पुलिस ने शराब की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोगों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से कथित सप्लाई कनेक्शन की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध शराब कहां तैयार हुई, इसे किन लोगों ने उपलब्ध कराया और प्रभावित गांवों तक इसकी सप्लाई कैसे पहुंची।
आपके मूल कंटेंट में FIR के हवाले से गांव में कई लोगों द्वारा अवैध रूप से शराब बेचने और एक कथित नए ब्रांड की शराब कम कीमत पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, इसलिए इन्हें फिलहाल FIR में दर्ज आरोप/शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शराब की दुकानों पर कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्र की शराब दुकानों को सील किया और संदिग्ध शराब के नमूने जांच के लिए लेने के निर्देश दिए। अधिकारियों की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
मामले में पुलिस और प्रशासन यह भी जांच कर रहे हैं कि अवैध शराब का कारोबार कितने व्यापक स्तर पर चल रहा था और संदिग्ध शराब की आपूर्ति में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अस्पतालों में बढ़ा दबाव
जहरीली शराब के सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से बंडा सिविल अस्पताल, सागर जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मरीजों का दबाव बढ़ा है। गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों से तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की जा रही है, जिन्होंने हाल में संदिग्ध शराब का सेवन किया है और उनकी तबीयत बिगड़ रही है।
प्रशासन और सरकार की नजर
घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित क्षेत्र और अस्पतालों का जायजा ले रहे हैं। सरकार की ओर से भी मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
घटना ने एक बार फिर अवैध और मिलावटी शराब की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जांच का मुख्य केंद्र अब संदिग्ध शराब की आपूर्ति, बिक्री और वितरण का नेटवर्क है।
मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
प्रशासन की ओर से लगातार प्रभावित गांवों में लोगों की जांच की जा रही है। अस्पतालों में भर्ती कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है। ऐसे में मृतकों और मरीजों की संख्या को लेकर आगे और अपडेट सामने आ सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर कम-से-कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि वाली जानकारी सामने आई है। अलग-अलग स्थानीय रिपोर्टों में इससे अधिक मौतों के दावे भी किए गए हैं, लेकिन आधिकारिक आंकड़े से अलग संख्या को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
सागर के बंडा क्षेत्र की यह घटना अवैध शराब के खतरे को सामने लाती है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जहरीली शराब की वास्तविक आपूर्ति कहां से हुई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
