दिल्ली में महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार पर पत्रकार राहुल नवरंग ने उठाई आवाज
विशेष संवाददाता फुलचंद मालवीय | स्वराज वाणी समाचार, देवास
दोषी पुलिसकर्मियों और महिला अधिकारी के निलंबन तथा पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग
नई दिल्ली। दिल्ली में महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट, दुर्व्यवहार और अभद्रता के मामले को लेकर पत्रकार एवं मिशन महाराजा सेना प्रमुख राहुल नवरंग ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मियों एवं संबंधित महिला अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने तथा देश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की है।
महिला पत्रकारों के साथ व्यवहार पर उठाए सवाल
राहुल नवरंग ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान पत्रकारिता कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज एवं अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी पत्रकार के साथ उसकी पत्रकारिता या पहचान के आधार पर आपत्तिजनक व्यवहार किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने संबंधित मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
मीडिया की भूमिका पर भी जताई नाराजगी
नवरंग ने मुख्यधारा के मीडिया के एक हिस्से की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के साथ होने वाली घटनाओं पर मीडिया संस्थानों को निष्पक्षता के साथ आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने देश के पत्रकारों से पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा पत्रकारों को बिना भय के अपना कार्य करने का वातावरण मिलना चाहिए।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग
पत्रकारों पर कथित हमलों और उत्पीड़न की घटनाओं का हवाला देते हुए राहुल नवरंग ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था आवश्यक है, ताकि पत्रकारों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय अनावश्यक दबाव, धमकी या दुर्व्यवहार का सामना न करना पड़े।
उनका कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
राहुल नवरंग ने शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की कि मामले में शामिल बताए जा रहे पुलिसकर्मियों तथा संबंधित महिला अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को अपने पद या वर्दी का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी शिकायत की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए।
पत्रकारों से एकजुट होने का आह्वान
नवरंग ने देशभर के पत्रकारों से पत्रकारों के अधिकार एवं सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार के मामलों को गंभीरता से उठाया जाना चाहिए और संबंधित संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आक्रामक भाषा का इस्तेमाल भी किया। हालांकि, किसी भी विवाद या विरोध का समाधान कानूनी और लोकतांत्रिक माध्यमों से ही किए जाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
राहुल नवरंग ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की पूर्वधारणा के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घटना की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि संविधान और कानून से ऊपर कोई भी व्यक्ति या संस्था नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपने अधिकारों का इस्तेमाल संवैधानिक एवं कानूनी सीमाओं के भीतर ही करना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
नवरंग ने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं बनाई जाती है तो वे पत्रकारों एवं लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण एवं कानूनी तरीके से आंदोलन करेंगे।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने मांग दोहराते हुए कहा कि कथित घटना की निष्पक्ष जांच, दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था समय की आवश्यकता है।
