ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन सम्मानित, बोले- ज्योतिष प्रकाश की तरह जीवन के रहस्यों को समझने का माध्यम
संवाददाता: मनोज जैन नायक
मुरैना। अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद, दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ज्योतिष अधिवेशन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 50 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने भाग लिया। अधिवेशन में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए और विद्वानों ने अपने अध्ययन एवं अनुभव साझा किए। इस अवसर पर ग्वालियर के ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन को ज्योतिष के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
दो दिवसीय अधिवेशन का पहला दिन दिल्ली के ऋषभ विहार में चर्याशिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित हुआ। वहीं अधिवेशन का दूसरा दिन आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज की प्रेरणा से राजस्थान के तिजारा में संपन्न हुआ। दोनों दिनों के कार्यक्रम में ज्योतिष से जुड़े अलग-अलग विषयों पर चर्चा के साथ शोध और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।
देशभर से 50 से अधिक ज्योतिष विद्वान हुए शामिल
अधिवेशन में दिल्ली के अलावा जयपुर, नागपुर, इंदौर, वापी, उज्जैन, भोपाल, झांसी, बड़ामलहरा, जबलपुर और अन्य शहरों से ज्योतिष विद्वान पहुंचे। विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने ज्योतिष शास्त्र से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में रवि जैन गुरुजी दिल्ली, ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ग्वालियर, विमल जैन जबलपुर, मंजुला जैन उज्जैन, विकास जैन, सुनील कुमार भंडारी, डी.के. जैन दिल्ली और पंडित नितिन जैन इंदौर सहित कई विद्वानों ने सहभागिता की। अधिवेशन के दौरान अलग-अलग विषयों पर शोध और अनुभव प्रस्तुत किए गए।
डॉ. हुकुमचंद जैन का किया गया सम्मान
कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन को ज्योतिष के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उनके ज्योतिषीय अध्ययन और इस क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया गया।
डॉ. जैन ने इस अवसर पर ज्योतिष के महत्व और इसके व्यावहारिक पक्ष को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को केवल भविष्य जानने के माध्यम के रूप में देखने के बजाय जीवन में मार्गदर्शन देने वाली विद्या के रूप में समझा जाना चाहिए।
‘ज्योतिष का अर्थ ही ज्योति अर्थात प्रकाश’
अपने संबोधन में डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि “ज्योतिष का अर्थ ही ज्योति अर्थात प्रकाश है।” उन्होंने इसे उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार अंधेरे कमरे में रखी वस्तुएं दिखाई नहीं देतीं, लेकिन प्रकाश होते ही वे स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं, उसी प्रकार ज्योतिष जन्मकुंडली के आधार पर जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने का प्रयास करता है।
उनके अनुसार ज्योतिषीय गणनाओं और जन्मकुंडली के अध्ययन के माध्यम से व्यक्ति के जीवन से जुड़े भूत, वर्तमान और भविष्य के संभावित घटनाक्रमों का आकलन किया जाता है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष का उद्देश्य व्यक्ति को जीवन में आने वाली परिस्थितियों के प्रति जागरूक और सजग बनाना है।
संभावित परिस्थितियों के लिए पहले से सजग रहने में मार्गदर्शन
डॉ. जैन ने कहा कि ज्योतिषीय अध्ययन के जरिए किसी घटना के संभावित समय और परिस्थितियों का अनुमान लगाने का प्रयास किया जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति पहले से सावधानी बरत सकता है और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बताए गए उपायों को अपना सकता है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष को मार्गदर्शन देने वाली विद्या माना जाता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के सामने आने वाली परिस्थितियों को समझने और उसके अनुसार निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है।
मुहूर्त निर्धारण में चंद्रमा की स्थिति को बताया महत्वपूर्ण
अधिवेशन में डॉ. हुकुमचंद जैन ने शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त निर्धारण में चंद्रमा की भूमिका पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए मुहूर्त देखते समय चंद्रमा की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. जैन के अनुसार, ज्योतिषीय मान्यताओं में यदि मुहूर्त सामान्य रूप से अनुकूल हो, लेकिन व्यक्ति की राशि के संदर्भ में चंद्रमा चौथे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो उस समय कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
शुभ कार्यों में चंद्रमा के बल को माना जाता है अहम
डॉ. जैन ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक शुभ कार्य के लिए चंद्रमा का बलवान होना महत्वपूर्ण माना गया है। चंद्रमा को शीघ्रगामी ग्रह माना जाता है और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उसका संबंध व्यक्ति के मन और भावनाओं से जोड़ा जाता है।
इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने या अन्य मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त तय करते समय चंद्रमा की स्थिति का अध्ययन किया जाता है। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त के निर्धारण में तिथि और समय के साथ ग्रहों की स्थिति का भी विचार किया जाता है।
शोध और अनुभवों के आदान-प्रदान पर रहा जोर
दो दिवसीय ज्योतिष अधिवेशन के दौरान केवल परंपरागत विषयों पर चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि विद्वानों ने अपने शोध और लंबे अनुभवों को भी साझा किया। विभिन्न शहरों से आए विशेषज्ञों ने ज्योतिष के अलग-अलग आयामों को लेकर विचार-विमर्श किया।
अधिवेशन का उद्देश्य ज्योतिष से जुड़े विद्वानों को एक मंच उपलब्ध कराना भी रहा, जहां वे अपने अध्ययन, शोध और अनुभवों को दूसरे विशेषज्ञों के साथ साझा कर सकें। इस दौरान ज्योतिष के अध्ययन को आगे बढ़ाने और विभिन्न विषयों पर शोध की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
नई संभावनाओं और अध्ययन पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में मौजूद विद्वानों ने ज्योतिषीय अध्ययन के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक संवाद किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे अधिवेशन अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे विद्वानों को एक-दूसरे के अनुभवों से परिचित होने का अवसर प्रदान करते हैं।
दिल्ली और तिजारा में आयोजित इस दो दिवसीय अधिवेशन का समापन ज्योतिष के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने के संदेश के साथ हुआ। वहीं डॉ. हुकुमचंद जैन को मिला सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
