सिंधिया राजघराने की संपत्ति का विवाद फिर गहराया, प्रतिमा देवी ने मां पद्माराजे के हिस्से का किया दावा; 10 सितंबर को होगी बहस
Scindia Family Property Dispute: सिंधिया राजघराने की अरबों रुपये की संपत्ति के बंटवारे और फैमिली सेटलमेंट से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। प्रतिमा देवी राना ने अपनी मां पद्माराजे के हिस्से को लेकर अदालत में दावा पेश किया है। उनकी आपत्ति के जवाब में वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अदालत में अपना पक्ष रखा गया है। अब मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 10 सितंबर को होगी, जब दोनों पक्षों की ओर से पेश आवेदनों और आपत्तियों पर बहस होने की बात कही गई है।
प्रतिमा देवी राना 25 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत पहुंचीं और अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से दाखिल जवाबों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग भी की। इसके साथ ही जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया।
जुलाई 2026 में प्रतिमा देवी ने दर्ज कराई थी आपत्ति
सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे से संबंधित फैमिली सेटलमेंट के मामले में प्रतिमा देवी राना ने जुलाई 2026 में आपत्ति दर्ज कराई थी। बताया गया है कि यह आपत्ति उनकी बेटी शिवांगी देवी के माध्यम से अदालत के सामने रखी गई थी।
आपत्ति में प्रतिमा देवी की ओर से दावा किया गया कि अदालत में प्रस्तुत सिंधिया परिवार के समझौते में कुछ तथ्य भ्रामक हैं और फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी अदालत के सामने नहीं रखी गई है।
इसी के साथ प्रतिमा देवी ने अपनी मां पद्माराजे के हिस्से का सवाल उठाते हुए संपत्ति में उनके अधिकार का दावा किया। इस आपत्ति के बाद संपत्ति विवाद में एक नया कानूनी पक्ष जुड़ गया और मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।
मां पद्माराजे के हिस्से को लेकर किया दावा
प्रतिमा देवी राना की आपत्ति का प्रमुख आधार उनकी मां पद्माराजे के कथित हिस्से से जुड़ा है। उनका कहना है कि सिंधिया राजघराने की संबंधित संपत्ति में उनकी मां का भी हिस्सा था और फैमिली सेटलमेंट की प्रक्रिया में इस पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
यह दावा महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। अब प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद अदालत को इस नए दावे और दूसरे पक्ष के जवाबों पर विचार करना है।
हालांकि संपत्ति में हिस्सेदारी और संबंधित दावों पर अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने दिया जवाब
प्रतिमा देवी की ओर से आपत्ति दाखिल किए जाने के बाद मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी अदालत में आवेदन पेश किए गए। 17 अगस्त को ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से अदालत में आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई।
वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का विरोध किया गया। उनके पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि पहले समझौते पर सहमति जताई गई थी तो बाद में उस पर आपत्ति दर्ज कराने का क्या आधार है।
इसके साथ ही प्रतिमा देवी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग भी आवेदन में किए जाने की बात कही गई है। अब इस आवेदन पर प्रतिमा देवी की ओर से जवाब पेश किया जाना है।
25 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट पहुंचीं प्रतिमा देवी
जुलाई में आपत्ति दाखिल होने के बाद अदालत ने प्रतिमा देवी राना को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में 25 अगस्त 2026 को प्रतिमा देवी अदालत पहुंचीं।
इस दौरान उन्होंने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई में वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से दाखिल जवाबों पर भी चर्चा हुई। इसके बाद प्रतिमा देवी ने इन जवाबों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की।
इन दस्तावेजों के आधार पर अब उनकी ओर से विस्तृत जवाब तैयार कर अदालत के सामने पेश किए जाने की संभावना है।
जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय
ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से पेश किए गए आवेदनों पर अपना जवाब देने के लिए प्रतिमा देवी ने अदालत से समय मांगा है।
अदालत की ओर से उन्हें 10 सितंबर तक का समय दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अगली सुनवाई इस विवाद के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस दिन दोनों पक्ष अपने-अपने आवेदनों, आपत्तियों और जवाबों को लेकर कानूनी तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं।
10 सितंबर को होगी महत्वपूर्ण बहस
अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख 10 सितंबर 2026 तय की गई है। इस दिन दोनों पक्षों के आवेदनों पर बहस होने की बात कही गई है। प्रतिमा देवी की ओर से भी अदालत के सामने विस्तृत पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिमा देवी की आपत्ति और पद्माराजे के हिस्से के दावे पर दूसरे पक्ष की ओर से क्या तर्क रखे जाते हैं। साथ ही वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर प्रतिमा देवी की तरफ से क्या जवाब दिया जाता है।
फैमिली सेटलमेंट को लेकर बढ़ी कानूनी खींचतान
सिंधिया राजघराने की संपत्ति से जुड़ा विवाद पहले से ही जटिल कानूनी मामला रहा है। परिवार के भीतर संपत्ति के अधिकार और बंटवारे को लेकर विभिन्न पक्ष अदालत तक पहुंचे हैं। फैमिली सेटलमेंट के जरिए मामले को सुलझाने की प्रक्रिया के बीच प्रतिमा देवी की नई आपत्ति से कानूनी खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है।
अब अदालत के सामने केवल समझौते की शर्तों का सवाल नहीं है, बल्कि प्रतिमा देवी की ओर से अपनी मां पद्माराजे के हिस्से को लेकर उठाया गया दावा भी विचाराधीन है।
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद से कई प्रमुख नाम जुड़े होने के कारण मामले पर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी नजर बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और प्रतिमा देवी राना के नाम कानूनी प्रक्रिया में सामने आए हैं।
फिलहाल किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संपत्ति में वास्तविक हिस्सेदारी, फैमिली सेटलमेंट की वैधता और आपत्तियों के कानूनी प्रभाव पर अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अब सभी की निगाहें 10 सितंबर की सुनवाई पर रहेंगी, जब दोनों पक्षों के आवेदनों पर बहस होने की उम्मीद है। यह सुनवाई सिंधिया राजघराने की संपत्ति से जुड़े विवाद की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
