MP Weather: मानसून ने बदली चाल, अब उत्तर-मध्य और पश्चिमी हिस्सों में बढ़ेगी बारिश; 3 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
MP में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता नजर आ रहा है। बारिश का फोकस अब प्रदेश के पूर्वी हिस्सों से खिसककर उत्तर, मध्य और पश्चिमी जिलों की ओर बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने बुधवार को भिंड, दतिया और सागर में अति भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर ढाई इंच से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
प्रदेश में मानसूनी सीजन के दौरान अब तक करीब 25.5 इंच बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, इस अवधि तक सामान्य तौर पर करीब 28.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक लगभग 3.1 इंच बारिश कम हुई है। कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम है।
मानसून की दिशा में हुआ बदलाव
मौसम के मौजूदा पैटर्न के मुताबिक अब बारिश की गतिविधियां पूर्वी मध्य प्रदेश की तुलना में उत्तर, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में अधिक बढ़ सकती हैं। अगले दो दिनों के दौरान भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग में बारिश का जोर बढ़ने की संभावना है।
भिंड, दतिया और सागर में बुधवार को अति भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं ढाई इंच से अधिक बारिश हो सकती है। भारी बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर जलभराव और निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बन सकती है।
40 जिलों में बारिश की कमी
MP में मानसून के बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में जिले सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। अब तक 40 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों में बारिश की कमी अलग-अलग स्थानों पर करीब 3 से 50 प्रतिशत तक बताई जा रही है।
वहीं, प्रदेश के केवल 15 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इससे साफ है कि मानसून की गतिविधियां पूरे प्रदेश में समान नहीं रही हैं। कुछ इलाकों में लगातार अच्छी बारिश हुई, जबकि कई जिलों में अपेक्षाकृत कम पानी गिरा है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं।
28.6 इंच के मुकाबले हुई 25.5 इंच बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि तक प्रदेश में करीब 28.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इसके मुकाबले अभी तक 25.5 इंच पानी ही दर्ज किया गया है। यानी प्रदेश करीब 3.1 इंच बारिश से पीछे है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी करीब 14 प्रतिशत बताई जा रही है। हालांकि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से इस अंतर के कम होने की उम्मीद है।
इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
बुधवार को भिंड, दतिया और सागर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।
इसके अलावा ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, दमोह, मैहर और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
वहीं भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खंडवा, खरगोन, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर समेत कई अन्य जिलों में भी बारिश होने का अनुमान है।
इन जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है, जबकि कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
जून में कमजोर रहा मानसून
इस मानसून सीजन की शुरुआत मध्य प्रदेश में कुछ कमजोर रही थी। जून के दौरान प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई में मानसून ने जोर पकड़ा और अच्छी बारिश के कारण जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया।
जुलाई की बेहतर बारिश ने जून की कमी को काफी हद तक कम किया, लेकिन मानसून के दौरान दो बार बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण शुरुआती कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। यही वजह है कि अगस्त के अंत तक प्रदेश कुल बारिश के मामले में सामान्य से पीछे बना हुआ है।
अगले तीन दिनों तक बारिश का जोर
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में बारिश कराने वाली मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले तीन दिनों तक कई जिलों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। विशेष रूप से उत्तर, मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
आने वाले दिनों में बारिश का फोकस बदलने से उन जिलों को राहत मिल सकती है जहां अब तक सामान्य से कम पानी गिरा है। हालांकि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में प्रशासन और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।
मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए नदी-नालों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। किसानों के लिए भी आने वाले दिनों की बारिश महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे खेतों में नमी की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ने के संकेत दिए हैं। अब देखना होगा कि अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश प्रदेश की मौजूदा 11 प्रतिशत बारिश की कमी को कितना कम कर पाती है।
