झकनावदा में घायल नंदी की मौत के बाद पशुप्रेमियों में शोक छा गया। बजरंग दल के जिला संयोजक बादल प्रजापत ने ग्रामीणों के सहयोग से विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया।
झकनावदा में घायल नंदी की मौत: उपचार के दौरान ली अंतिम सांस, ढोल के साथ निकली अंतिम यात्रा
झकनावदा | रिपोर्टर: मनीष कुमट
झकनावदा में घायल नंदी की मौत के बाद नगर के पशुप्रेमियों और स्थानीय लोगों में दुख का माहौल देखने को मिला। नगर में घायल अवस्था में मिले नंदी का लंबे समय से पशु चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। पशु चिकित्सक एवं गौ सेवक संतोष गेहलोद सेमलिया द्वारा लगातार उपचार और देखभाल किए जाने के बावजूद आखिरकार उपचार के दौरान नंदी ने अंतिम सांस ले ली।
नंदी की मृत्यु की खबर मिलते ही पशुप्रेमियों और नगरवासियों में शोक की लहर दौड़ गई। घायल नंदी को बचाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया।
घायल नंदी का लंबे समय से चल रहा था उपचार
बताया गया कि घायल अवस्था में मिले नंदी को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया था। यहां चिकित्सक द्वारा लंबे समय से उसका उपचार किया जा रहा था। नंदी के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
पशु चिकित्सक एवं गौ सेवक संतोष गेहलोद सेमलिया भी नंदी की देखभाल और उपचार में लगातार सहयोग कर रहे थे। तमाम प्रयासों के बावजूद नंदी के स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और आखिरकार उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
नंदी की मौत की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पशुप्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता भी भावुक नजर आए। लोगों ने नंदी की सेवा और उपचार में जुटे लोगों के प्रयासों की सराहना की।
बजरंग दल के जिला संयोजक बादल प्रजापत ने की अंतिम संस्कार की व्यवस्था
नंदी की मृत्यु के बाद बजरंग दल के जिला संयोजक बादल प्रजापत ने ग्रामीणों के सहयोग से उसके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। स्थानीय लोगों ने मिलकर नंदी को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया।
इसके बाद नंदी को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इस दौरान नगर के कई लोग और पशुप्रेमी मौजूद रहे।
ढोल के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से निकली नंदी की अंतिम यात्रा
झकनावदा में घायल नंदी की मौत के बाद निकाली गई अंतिम यात्रा भी लोगों के लिए भावुक कर देने वाली रही। नंदी को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाया गया।
इस दौरान ढोल के साथ नंदी को अंतिम विदाई दी गई। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली इस अंतिम यात्रा में ग्रामीणों एवं पशुप्रेमियों ने सहभागिता की। नंदी के प्रति लोगों की आस्था और गोवंश के प्रति सेवा भाव इस दौरान देखने को मिला।
विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाज से किया अंतिम संस्कार
अंतिम यात्रा के बाद उचित स्थान पर नंदी को विधि-विधान एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने नंदी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
नंदी के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने गोवंश की सेवा और संरक्षण को लेकर अपनी भावनाएं भी व्यक्त कीं।
बेसहारा पशुओं की देखभाल के लिए समाज आगे आए
ग्रामीणों ने बताया कि घायल एवं बेसहारा पशुओं के उपचार तथा उनकी देखभाल के लिए समाज के लोगों को आगे आना चाहिए। सड़कों या अन्य स्थानों पर घायल अवस्था में मिलने वाले पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए तो कई पशुओं की जान बचाई जा सकती है।
वहीं नंदी की सेवा एवं उपचार में सहयोग करने वाले लोगों के प्रयासों की भी सराहना की गई। लोगों का कहना था कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव समाज की जिम्मेदारी भी है।
नंदी की सेवा से अंतिम विदाई तक दिखी मानवता की मिसाल
झकनावदा में घायल नंदी की मौत से नगरवासियों में दुख रहा, लेकिन घायल अवस्था में उसे उपचार दिलाने से लेकर अंतिम विदाई तक ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने पशु सेवा का संदेश दिया।
नंदी की अंतिम यात्रा के दौरान नगरवासियों में गोवंश के प्रति संवेदना और सेवा भाव देखने को मिला। घायल अवस्था में नंदी को उपचार दिलाने, लगातार उसकी देखभाल करने और मृत्यु के बाद धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करने तक स्थानीय लोगों ने सहयोग किया।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा की गई यह पहल मानवता एवं पशु सेवा की मिसाल बनी। स्थानीय लोगों ने नंदी को श्रद्धांजलि देते हुए भविष्य में भी घायल और बेसहारा गोवंश की मदद के लिए आगे आने की बात कही।
