प्रेम, सेवा, करुणा और मानवता की प्रतिमूर्ति दादी प्रकाशमणि को इंदौर में दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
19वीं पुण्यतिथि ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाई, वक्ताओं ने दादी प्रकाशमणि के आध्यात्मिक जीवन, नेतृत्व और नारी सशक्तिकरण में योगदान को किया याद
इंदौर, 25 अगस्त 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 19वीं पुण्यतिथि इंदौर में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाई गई। ज्ञान शिखर ओमशांति भवन में आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े सदस्यों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने दादी प्रकाशमणि को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने दादी प्रकाशमणि के व्यक्तित्व, उनके आध्यात्मिक जीवन, विश्व शांति के लिए किए गए प्रयासों और राजयोग के प्रसार में उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि दादी प्रकाशमणि ने प्रेम, सेवा, करुणा, मानवता, अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारकर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
विश्व शांति और बंधुत्व के लिए समर्पित रहा जीवन: हेमलता दीदी
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निर्देशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने दादी प्रकाशमणि के साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं थीं, बल्कि प्रेम, करुणा, सेवा और मानवता की जीवंत मिसाल थीं। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण विश्व शांति, सद्भावना और विश्व बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा।
हेमलता दीदी ने बताया कि 18 जनवरी 1969 को प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से दादी प्रकाशमणि को विश्व सेवा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ संस्था की आध्यात्मिक सेवाओं को आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिकता और राजयोग का संदेश दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा। उन्होंने मां के समान प्रेम और वात्सल्य दिया तो आध्यात्मिक जीवन में पवित्रता, अनुशासन और ईश्वरीय मर्यादाओं के पालन के लिए भी सभी को प्रेरित किया।
कुशल नेतृत्व के साथ विनम्र सेवाधारी की बनाई पहचान
हेमलता दीदी ने कहा कि विश्वव्यापी संस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के बावजूद दादी प्रकाशमणि ने स्वयं को हमेशा एक विनम्र सेवाधारी के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी प्रबंधन क्षमता और नेतृत्व शैली ने उन्हें हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनाया।
उनके अनुसार दादी प्रकाशमणि की विशेषता यह थी कि वे जिम्मेदारियों के शीर्ष पर रहते हुए भी सरलता और विनम्रता से जुड़ी रहीं। उन्होंने आध्यात्मिक मूल्यों के साथ संगठन और सेवा को आगे बढ़ाया।
‘प्रकाश की मणि और बेशकीमती रत्न थीं दादी प्रकाशमणि’

शिक्षाविद् एवं कवि प्रोफेसर राजीव शर्मा ने दादी प्रकाशमणि से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उन्हें ‘प्रकाश की मणि’ और बेशकीमती रत्न बताया। उन्होंने कहा कि दादी से पहली मुलाकात में ही लोगों को अपनेपन और मातृत्व की अनुभूति होती थी।
प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में मातृत्व के साथ कुशल नेतृत्व का अद्भुत समन्वय था। वे सुख-दुख, मान-अपमान और निंदा-स्तुति जैसी परिस्थितियों से ऊपर उठकर सदैव प्रसन्नचित्त रहती थीं। उनका प्रयास लोगों के मन में सद्भाव, सकारात्मकता और आपसी प्रेम की भावना जगाना था।
नारी सशक्तिकरण की साक्षात मिसाल बताया
उषाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दादी प्रकाशमणि को नारी सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बताया।
उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि ने आध्यात्मिक गुणों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए ब्रह्मा बाबा के आदर्शों और मूल्यों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन यह संदेश देता है कि आध्यात्मिकता के साथ मजबूत नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी को भी निभाया जा सकता है।
आत्मिक प्रेम से जीवन में परिवर्तन की देती थीं प्रेरणा

वी वन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. ए.एल. शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें वर्ष 2006 में दादी प्रकाशमणि से मिलने और उनका सान्निध्य प्राप्त करने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि लोगों की कमियों और कमजोरियों को देखने के बजाय उन्हें आत्मिक प्रेम और शुभकामनाओं के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देती थीं। उनका व्यवहार लोगों को अपनी कमजोरियों से ऊपर उठकर बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता था।
हर दिल को महान बनने की प्रेरणा देती थीं: उषा दीदी
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि दादी प्रकाशमणि में अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति थी। उनके संपर्क में आने वाले लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और महान लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती थी।
उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि का जीवन आध्यात्मिक साधना के साथ सेवा और मानव कल्याण की भावना से जुड़ा रहा। यही कारण है कि आज भी उनके विचार और जीवन मूल्य लोगों को प्रेरणा देते हैं।
प्रशासन में ‘लव और लॉ’ का था संतुलन: अमीन वैद्य
उद्योगपति अमीन वैद्य ने दादी प्रकाशमणि के व्यक्तित्व और प्रशासनिक क्षमता को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में ‘लव और लॉ’ यानी प्रेम और अनुशासन का संतुलन दिखाई देता था।
उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि एक ओर सभी को स्नेह और अपनापन देती थीं, वहीं दूसरी ओर संस्था की मर्यादाओं और अनुशासन को भी महत्व देती थीं। इसी संतुलित नेतृत्व शैली के कारण उनसे जुड़े लोग संतुष्ट और प्रेरित रहते थे।
पुष्पांजलि अर्पित कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने दादी प्रकाशमणि को सामूहिक रूप से पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके जीवन मूल्यों, सेवा भावना और आध्यात्मिक विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया गया।
श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से प्रेम, शांति, करुणा, सेवा, सद्भाव और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि दादी प्रकाशमणि की स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि उनके बताए आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाकर ही दी जा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने किया।
