45 साल के भरोसे को मिला नया स्वरूप, इंदौर में लॉन्च हुई सांची की नई ब्रांड पहचान
नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की गोंड कला और ग्रामीण जीवन की झलक, आधुनिक बाजार के अनुरूप सांची को मिली नई पहचान
इंदौर, 25 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित सहकारी डेयरी ब्रांड ‘सांची’ ने अपने करीब 45 वर्षों के विश्वास और विरासत को नया स्वरूप देते हुए इंदौर में नई ब्रांड पहचान और री-डिजाइन पैकेजिंग लॉन्च की है। बदलते बाजार, उपभोक्ताओं की नई पसंद और आधुनिक ब्रांडिंग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सांची की पैकेजिंग को आकर्षक और एकरूप स्वरूप दिया गया है। खास बात यह है कि आधुनिकता के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन को भी नई पैकेजिंग का हिस्सा बनाया गया है।
इंदौर के कृषि महाविद्यालय में आयोजित रीब्रांडिंग समारोह में संयुक्त आयुक्त पुरुषोत्तम पाटीदार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में एमपीसीडीएफ के पूर्व प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी, इंदौर दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विशाल मिश्रा, एनडीडीबी के ग्रुप हेड (मार्केटिंग) स्वप्न सिन्हा सहित वरिष्ठ अधिकारी, वितरक और रिटेलर्स मौजूद रहे।
नई पैकेजिंग में परंपरा और आधुनिकता का संगम
सांची की नई ब्रांड पहचान तैयार करते समय जहां आधुनिक डिजाइन और उपभोक्ताओं की जरूरतों पर ध्यान दिया गया है, वहीं मध्यप्रदेश की स्थानीय कला और संस्कृति को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। नई पैकेजिंग में आधुनिक रंगों, एकरूप लेआउट और आकर्षक डिजाइन का उपयोग किया गया है।
पैकेजिंग की एक महत्वपूर्ण विशेषता गोंड कला से प्रेरित डिजाइन है। इसमें गाय, ग्रामीण परिवेश, दूध और महिला दुग्ध उत्पादकों जैसे तत्वों को कलात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके जरिए सहकारी डेयरी व्यवस्था की ग्रामीण जड़ों और दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
नई पहचान का उद्देश्य वर्षों से उपभोक्ताओं के बीच विश्वसनीयता का प्रतीक रहे सांची ब्रांड को आधुनिक बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ाना है।
45 वर्षों का विश्वास सांची की सबसे बड़ी पूंजी: पुरुषोत्तम पाटीदार
समारोह को संबोधित करते हुए संयुक्त आयुक्त पुरुषोत्तम पाटीदार ने कहा कि सांची केवल एक डेयरी ब्रांड नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के सहकारी आंदोलन और बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक परिवारों की मेहनत से जुड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों में उपभोक्ताओं का विश्वास सांची की सबसे बड़ी पूंजी रहा है। नई ब्रांड पहचान आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप सांची को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
पाटीदार ने नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की कला और ग्रामीण जीवन को स्थान दिए जाने की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक स्वरूप अपनाने के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना सांची की बड़ी ताकत है। उन्होंने विश्वास जताया कि रीब्रांडिंग से उपभोक्ताओं के साथ सांची का जुड़ाव और मजबूत होगा तथा किसानों पर आधारित सहकारी व्यवस्था को भी गति मिलेगी।
गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मूल वादे को रखा बरकरार
एमपीसीडीएफ के पूर्व प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी ने कहा कि सांची के 45 वर्षों के सफर में दो पक्ष सबसे महत्वपूर्ण रहे हैं—उपभोक्ताओं का विश्वास और दुग्ध उत्पादक किसानों का योगदान।
उन्होंने कहा कि नई पहचान सांची की इसी विरासत को आगे ले जाने का प्रयास है। बदलते समय के साथ ब्रांड ने स्वयं को आधुनिक बनाने का प्रयास किया है, लेकिन गुणवत्ता और विश्वसनीयता के अपने मूल वादे को हमेशा प्राथमिकता दी है।
डॉ. गोवानी के मुताबिक नई पैकेजिंग वर्षों से अर्जित इसी भरोसे को नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मदद करेगी। साथ ही आधुनिक और एकरूप पैकेजिंग से बाजार में उत्पादों की पहचान मजबूत होने और बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं तक पहुंच मजबूत करने का प्रयास

एनडीडीबी के ग्रुप हेड (मार्केटिंग) स्वप्न सिन्हा ने सांची की नई ब्रांड पहचान को सहकारी डेयरी क्षेत्र को आधुनिक उपभोक्ता की बदलती जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि बाजार में मजबूत और एकरूप ब्रांड पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे ग्राहकों के लिए अलग-अलग उत्पादों को पहचानना आसान होता है और पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
स्वप्न सिन्हा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सांची द्वारा दशकों में अर्जित विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए नई पीढ़ी के ग्राहकों के बीच ब्रांड की मौजूदगी को और मजबूत करना है।
किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक व्यवस्था मजबूत करने का लक्ष्य
इंदौर दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि संघ लगातार किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक पूरी सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सांची की नई ब्रांड पहचान और आधुनिक पैकेजिंग से उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं के साथ ब्रांड का जुड़ाव बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
विशाल मिश्रा के अनुसार संघ का प्रमुख लक्ष्य दुग्ध उत्पादक किसानों को बेहतर और स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सांची के दूध एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की पहुंच और बिक्री का विस्तार करना भी प्राथमिकताओं में शामिल है।
ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य उपलब्ध कराना प्रमुख उद्देश्य

इंदौर सहकारी दुग्ध संघ, मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल की एक महत्वपूर्ण इकाई है और वर्तमान में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा संचालित की जा रही है।
सहकारी व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन करने वाले किसानों से उनके गांव में ही उचित मूल्य पर दूध खरीदना है। इसके बाद दूध को आधुनिक संयंत्रों में निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रसंस्कृत किया जाता है।
प्रसंस्करण के बाद दूध और विभिन्न दुग्ध उत्पादों को सांची ब्रांड के माध्यम से बाजार में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में ग्रामीण दुग्ध उत्पादक किसान और उपभोक्ता दोनों हैं।
59 हजार से अधिक दुग्ध उत्पादकों से जुड़ा इंदौर दुग्ध संघ
इंदौर दुग्ध संघ से 59 हजार से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों के जुड़े होने के कारण सांची की ब्रांड पहचान में होने वाला बदलाव केवल बाजार और पैकेजिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इससे सहकारी दुग्ध व्यवस्था, किसानों के लिए बाजार और उपभोक्ताओं तक उत्पादों की पहुंच को भी मजबूत करने की उम्मीद है।
सांची की नई ब्रांडिंग में एक तरफ आधुनिक बाजार की जरूरतों को शामिल किया गया है तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, ग्रामीण परिवेश और दुग्ध उत्पादकों के योगदान को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है।
नई पैकेजिंग के साथ सांची अब अपने 45 वर्षों के भरोसे को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी में है। रीब्रांडिंग के जरिए ब्रांड की बाजार में दृश्यता बढ़ाने, विभिन्न उत्पादों को एक समान पहचान देने और उपभोक्ताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
