—Advertisement—

आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की भर्ती कैंसर से भी खतरनाक, सरकारी नौकरियों में आरक्षण जरूरी : आरबी सिंह पटेल

Author Picture
Published On: 24 August 2026
BCVBXCV

—Advertisement—

आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की भर्ती कैंसर से भी खतरनाक, सरकारी नौकरियों में आरक्षण जरूरी : आरबी सिंह पटेल

अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव ने आउटसोर्स और संविदा भर्तियों में ओबीसी, एससी-एसटी आरक्षण लागू करने की उठाई मांग

भोपाल, 24 अगस्त 2026। अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आरबी सिंह पटेल ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग और संविदा के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इन भर्तियों में भी आरक्षण लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में नियमित और सीधी भर्ती के स्थान पर आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर रहा है। पटेल ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे “कैंसर से भी खतरनाक” साबित होने वाली व्यवस्था बताया।

उन्होंने जातीय जनगणना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि इसके आंकड़ों के आधार पर सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़ी नीतियों की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित वंचित वर्गों को आउटसोर्सिंग एवं संविदा के माध्यम से होने वाली सरकारी भर्तियों में भी आरक्षण का लाभ दिए जाने की वकालत की।

आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण नहीं तो वंचित वर्गों के साथ अन्याय

आरबी सिंह पटेल ने कहा कि यदि सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति होती है और इन भर्तियों में ओबीसी एवं एससी-एसटी वर्गों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है, तो यह सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के साथ अन्याय होगा।

उनका कहना है कि सरकारी विभागों और सरकारी नियंत्रण वाली संस्थाओं में कार्य करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति चाहे किसी एजेंसी या अन्य व्यवस्था के माध्यम से की जाए, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन सामाजिक वर्गों को सरकारी व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना भी है, जो ऐतिहासिक रूप से अवसरों से वंचित रहे हैं। ऐसे में नियमित पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

नियमित और सीधी भर्तियां कम होने पर जताई चिंता

पटेल ने कहा कि पहले सरकारी विभागों में नियमित और सीधी भर्ती के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलता था। खासकर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समय के साथ नियमित भर्तियों की जगह आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था का विस्तार हुआ है। इसका असर उन युवाओं पर अधिक पड़ सकता है, जो सरकारी नौकरियों में आरक्षण के जरिए अवसर और प्रतिनिधित्व की उम्मीद रखते हैं।

पटेल के अनुसार सरकारी नौकरियां कमजोर और वंचित वर्गों के लिए केवल आय का साधन नहीं रही हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी रही हैं। इसलिए सरकारी रोजगार की प्रकृति में होने वाले बदलाव का सामाजिक न्याय पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी समीक्षा आवश्यक है।

संविदा कर्मचारियों को भी मिले आरक्षण का लाभ

आरबी सिंह पटेल ने संविदा कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी सरकार के अधीन किसी विभाग या संस्था का कार्य कर रहे हैं और उनकी नियुक्ति सरकारी व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रिया के तहत की जा रही है, तो वहां सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी नियमित हो, संविदा आधारित हो या आउटसोर्सिंग के किसी मॉडल के तहत दी गई हो, नियुक्ति व्यवस्था में संविधान में निहित सामाजिक न्याय की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।

पटेल ने इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रोजगार की व्यवस्था बदलने के कारण आरक्षण से मिलने वाले अवसर कम नहीं होने चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिससे पात्र वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

जातीय जनगणना में पारदर्शिता की मांग

अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव ने जातीय जनगणना के मुद्दे को भी सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक जनसंख्या के साथ उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति की सही तस्वीर सामने आना जरूरी है।

उनके मुताबिक जातीय जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर यह समझने में मदद मिलेगी कि किन वर्गों की सरकारी सेवाओं, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कितनी भागीदारी है और किन वर्गों को अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

उन्होंने मांग की कि जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद आरक्षण एवं सामाजिक न्याय की नीतियों की समीक्षा और निर्धारण निष्पक्ष तरीके से किया जाए।

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग दोहराई

आरबी सिंह पटेल ने न्यायपालिका में वंचित और पिछड़े वर्गों की भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में देश के सभी सामाजिक वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

उनका कहना है कि अखिल भारतीय स्तर पर न्यायिक सेवा की व्यवस्था बनने से चयन प्रक्रिया को व्यापक स्वरूप देने के साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व के विषय पर व्यापक चर्चा और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई।

पंचायतों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर दिया जोर

पटेल ने ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायत स्तर पर लंबित शिकायतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायतों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय स्तर पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं होता है तो लोगों को बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने मांग की कि पंचायत स्तर की शिकायतों की निगरानी और समयबद्ध निस्तारण के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।

किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता से हो समाधान

आरबी सिंह पटेल ने किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं और सरकारों को उनके समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों को केवल चुनावी या राजनीतिक विषय के रूप में देखने के बजाय दीर्घकालीन नीति के साथ समाधान की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय और रोजगार नीति पर व्यापक चर्चा की जरूरत

पटेल ने कहा कि बदलती रोजगार व्यवस्था के बीच सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। सरकारी विभागों में यदि नियमित पदों के स्थान पर संविदा या आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़ती है तो इसका आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन होना चाहिए।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि सरकारी सेवाओं में रोजगार के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें आउटसोर्स और संविदा भर्तियों में भी वंचित एवं आरक्षित वर्गों के हितों की रक्षा हो सके। इसके साथ ही उन्होंने जातीय जनगणना में पारदर्शिता, न्यायपालिका में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व, पंचायत स्तर की शिकायतों के समयबद्ध समाधान और किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp