इंदौर में मिड-डे मील खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 23 अस्पताल में भर्ती; चार को ICU में रखा
सांवेर क्षेत्र के शासकीय स्कूल में कढ़ी-चावल खाने के बाद बच्चों ने पेट दर्द, चक्कर और सिरदर्द की शिकायत की; फूड पॉइजनिंग की आशंका, प्रशासन ने शुरू की जांच
इंदौर/सांवेर। इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र में शनिवार को एक शासकीय स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। भोजन करने के कुछ समय बाद बच्चों ने पेट दर्द, चक्कर और सिरदर्द जैसी परेशानियों की शिकायत की। एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत खराब होने से स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों में चिंता फैल गई। बच्चों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 23 बच्चों को भर्ती किया गया। इनमें से चार बच्चों को अधिक निगरानी की जरूरत के चलते आईसीयू में रखा गया।
राहत की बात यह है कि अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है। बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। दूसरी ओर प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। बच्चों की तबीयत भोजन के कारण बिगड़ी या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
दोपहर में परोसा गया था कढ़ी-चावल
जानकारी के अनुसार घटना सांवेर क्षेत्र के ग्राम सिंहाना स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय की बताई जा रही है। शनिवार को स्कूल में रोज की तरह विद्यार्थियों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया गया था। दोपहर करीब 1:30 बजे बच्चों को भोजन में कढ़ी और चावल परोसे गए।
बताया जा रहा है कि भोजन करने के कुछ समय बाद कुछ विद्यार्थियों ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। इसके बाद अन्य बच्चों को भी चक्कर आने, सिरदर्द और असहज महसूस होने जैसी परेशानियां होने लगीं। देखते ही देखते ऐसे बच्चों की संख्या बढ़कर करीब 38 तक पहुंच गई।
बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ती देख स्कूल प्रबंधन सक्रिय हुआ और बच्चों के परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
23 बच्चों को अस्पताल में किया गया भर्ती
बीमार बच्चों को उपचार के लिए इंदौर के अरविंद अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने बच्चों की जांच की। जानकारी के मुताबिक कुल 38 बच्चों ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की शिकायत की थी, जिनमें से 23 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा गया।
चार बच्चों को अधिक चिकित्सकीय निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया है। हालांकि चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल बच्चों की स्थिति नियंत्रण में है और किसी की हालत गंभीर नहीं है।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बच्चों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्हें करीब छह घंटे तक ऑब्जर्वेशन में रखने की बात सामने आई है। चिकित्सकों की टीम बच्चों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए हुए है।
बताया गया कि उपचार के लिए पहुंची एक बच्ची को पहले से करीब तीन दिनों से बुखार भी था। ऐसे में चिकित्सक प्रत्येक बच्चे की स्थिति और लक्षणों का अलग-अलग आकलन कर रहे हैं।
फूड पॉइजनिंग की आशंका, अभी पुष्टि नहीं
एक ही स्कूल के इतने बच्चों में भोजन के बाद एक जैसे लक्षण सामने आने के कारण शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रशासन का कहना है कि भोजन के नमूनों की जांच, बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर ही यह तय किया जा सकेगा कि बच्चों की तबीयत किस वजह से बिगड़ी।
घटना के बाद मिड-डे मील में परोसे गए भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि भोजन तैयार करने में इस्तेमाल की गई सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
भोजन कहां बना और स्कूल तक कैसे पहुंचा, इसकी भी होगी जांच
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों द्वारा मिड-डे मील से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें भोजन कहां तैयार किया गया, किन खाद्य सामग्रियों का उपयोग हुआ, खाना तैयार होने के बाद किस तरह स्कूल तक पहुंचाया गया और विद्यार्थियों को परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं, जैसे पहलुओं को शामिल किया जा रहा है।
इसके साथ ही भोजन के नमूने लेकर जांच कराने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि भोजन में किसी प्रकार की गड़बड़ी थी या बच्चों की तबीयत बिगड़ने का कारण कुछ और था।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मामले से संबंधित जानकारी जुटा रही हैं।
सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे अभिभावक
स्कूल में बच्चों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलते ही अभिभावकों में चिंता फैल गई। बड़ी संख्या में परिजन अस्पताल पहुंचे और अपने बच्चों की स्थिति की जानकारी ली।
अचानक हुई इस घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। हालांकि चिकित्सकों ने बच्चों का उपचार शुरू कर परिजनों को उनकी स्थिति के बारे में जानकारी दी।
बच्चों की हालत स्थिर होने की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। इसके बावजूद अभिभावक पूरे मामले की विस्तृत जांच और मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने की मांग कर रहे हैं।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिड-डे मील योजना संचालित की जाती है। ऐसे में भोजन के बाद एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ना गंभीर चिंता का विषय है।
इस घटना के बाद भोजन तैयार करने, उसके भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़े मानकों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि भोजन बनाने और बच्चों तक पहुंचाने के दौरान साफ-सफाई एवं खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पहले भी सामने आ चुके हैं भोजन से बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले
इंदौर में इससे पहले भी स्कूली बच्चों के भोजन से जुड़ा मामला सामने आ चुका है। जून 2026 में एक स्कूल में भोजन करने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना सामने आई थी। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित रसोई की जांच की थी और कार्रवाई भी की गई थी।
ताजा घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और नियमित निगरानी की आवश्यकता को सामने ला दिया है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा कारण
फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान बच्चों के स्वास्थ्य और घटना के वास्तविक कारण का पता लगाने पर है। अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही भोजन से जुड़े नमूनों और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे फूड पॉइजनिंग थी या कोई अन्य कारण। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
