यूसीसी विधेयक के विरोध में जोबट मुस्लिम समाज ने सौंपा ज्ञापन
धार्मिक स्वतंत्रता और पर्सनल लॉ से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की मांग
जोबट। समान नागरिक संहिता (UCC ) विधेयक 2026 को लेकर जोबट मुस्लिम समाज ने विरोध दर्ज कराते हुए तहसील कार्यालय पहुंचकर एसडीएम मनोज गरवाल को ज्ञापन सौंपा। शहर काजी के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधियों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं प्रशासन के सामने रखीं और शासन से इन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
शहर काजी के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि शहर काजी सैयद अनवारउल हसन के नेतृत्व में तहसील कार्यालय पहुंचे। इस दौरान ज्ञापन का वाचन एडवोकेट केसर जावेद ने किया। समाज की ओर से कहा गया कि यूसीसी विधेयक के कुछ प्रस्तावित प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम समाज के पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे संवेदनशील विषय पर कानून बनाने से पहले सभी समुदायों की चिंताओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। समाज ने प्रशासन के माध्यम से अपनी मांग शासन तक पहुंचाने का आग्रह किया।
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला
ज्ञापन में समाज की ओर से संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों की बात रखी गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं और आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि व्यक्तिगत कानून और धार्मिक परंपराएं समुदायों की सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी भी नए कानून के संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि यूसीसी विधेयक के उन प्रावधानों की विशेष रूप से समीक्षा की जाए, जिनको लेकर मुस्लिम समाज को आपत्ति या आशंका है। समाज ने कहा कि कानून लागू करने से पहले सभी पक्षों के साथ संवाद किया जाना चाहिए।
राज्यपाल से समीक्षा की मांग
ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल से आग्रह किया गया कि यूसीसी विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जाएं। समाज की ओर से कहा गया कि विधेयक को लेकर विभिन्न समुदायों में जो चिंताएं हैं, उन्हें दूर करने के लिए व्यापक चर्चा और संवाद की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत रखी जा रही है। उनका उद्देश्य यह है कि किसी भी कानून के लागू होने से पहले उससे प्रभावित होने वाले सभी पक्षों की बात सुनी जाए और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाए।
समाज ने रखी अपनी चिंताएं
मुस्लिम समाज की ओर से कहा गया कि यूसीसी से संबंधित विषय केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इसके विभिन्न प्रावधानों पर विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और संबंधित समुदायों के प्रतिनिधियों से चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।
समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से आग्रह किया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों को उचित माध्यम से राज्य शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि विधेयक पर आगे की प्रक्रिया में उनकी चिंताओं को भी शामिल किया जा सके।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान शहर काजी सैयद अनवारउल हसन, सैयद तनवीर हसन, खत्री मुस्लिम जमात सदर रफीक खत्री, पूर्व सदर मखमुद्दीन रेंजर, मुस्लिम जमात सदर अख्तर बाबूजी, हाजी मोहम्मद हुसैन खत्री, रफीक लोहार, रईस पठान, आसिफ शेख सहित मुस्लिम समाज के अनेक लोग मौजूद रहे।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से शासन-प्रशासन के समक्ष रखते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधेयक से जुड़े विषयों पर सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।
दैनिक स्वराज वाणी
ब्यूरो चीफ खलील मंसूरी, अलीराजपुर
