सद्भावना एवं अक्षय ऊर्जा दिवस का आयोजन संपन्न
संवाददाता :कौशिक पण्डित
मनावर, जिला धार। स्थानीय विद्योदय महाविद्यालय में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सद्भावना दिवस एवं अक्षय ऊर्जा दिवस का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय वाघे ने की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे, मानवता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयीन स्टाफ की सहभागिता से हुई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और जीवनशैलियां होने के बावजूद सभी नागरिक एक राष्ट्र की भावना से जुड़े हुए हैं। इसी एकता और सद्भावना को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। विद्यार्थियों को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारतीय संस्कृति के मूल भाव से परिचित कराते हुए बताया गया कि संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान रही है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराया गया। विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, मानवता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने तथा देशहित में कार्य करने की शपथ ली। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र की प्रगति केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है।
इस अवसर पर अक्षय ऊर्जा दिवस के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे सीमित संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण के लिए भी चुनौती बन रहा है। ऐसे में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

विद्यार्थियों को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए बताया गया कि ऊर्जा की बचत केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी हुई है। घर, महाविद्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक रूप से बिजली के उपकरण चालू न रखना, आवश्यकता के अनुसार ऊर्जा का उपयोग करना तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विकल्पों को अपनाना छोटे लेकिन प्रभावी कदम हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति ऊर्जा संरक्षण को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बना ले, तो सामूहिक रूप से इसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की बर्बादी रोकने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने कहा कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य की आधारशिला है और यदि युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जाए, तो देश को नई दिशा दी जा सकती है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय वाघे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाना भी है। उन्होंने राष्ट्रीय सद्भावना को जीवन का हिस्सा बनाने तथा समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र जैसी विविधताओं के बावजूद आपसी सम्मान एवं सहयोग की भावना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है।
कार्यक्रम में प्रो. आर.एस. मुकाती ने राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक समरसता बनाए रखने तथा देश की एकता एवं अखंडता के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। प्रो. चेतन शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा यदि अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाएंगे तो समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

प्रो. संतोष शर्मा ने अक्षय ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण के विषय पर विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वहीं डॉ. सुनीता पाटीदार ने सामाजिक मूल्यों, मानवता और आपसी सद्भाव पर अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे का वातावरण बनाए रखने का आह्वान किया।
आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं ऊर्जा संरक्षण से जुड़े संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि देश की प्रगति और पर्यावरण की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और संरक्षण करना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय सद्भावना दिवस का आयोजन विद्यार्थियों को यह समझाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना कि राष्ट्र की एकता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि नागरिकों के बीच विश्वास, सम्मान और सहयोग से भी मजबूत होती है। इसी प्रकार अक्षय ऊर्जा दिवस ने विद्यार्थियों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि ऊर्जा के वर्तमान स्रोतों के साथ-साथ भविष्य के लिए स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार ने राष्ट्रीय एकता, सद्भावना, मानवता और ऊर्जा संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आयोजन ने विद्यार्थियों में सामाजिक एवं राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रभावी ढंग से पहुंचाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. बालाजी अवसरकर ने किया। महाविद्यालय परिवार की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। आयोजन ने राष्ट्रीय एकता, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना तथा अक्षय ऊर्जा के महत्व का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
