2018 से अधूरा पंचायत भवन, बारिश में कीचड़ से बदहाल गुंदरई-अर्जनी; ग्रामीणों ने SDM को सौंपा ज्ञापन
संवाददाता: विपिन शर्मा
बम्होरी। ग्राम पंचायत गुंदरई-अर्जनी में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन का निर्माण वर्ष 2018 से जारी है, लेकिन करीब आठ वर्ष बीतने के बावजूद भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। पंचायत भवन के अभाव में ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर बारिश के मौसम में गांव की सड़कें और गलियां कीचड़ से भर गई हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने गांव की विभिन्न समस्याओं को लेकर गुरुवार को सिलवानी पहुंचकर SDM अलका सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का निरीक्षण एवं सर्वे कराकर मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने की मांग की है।
वर्षों से अधूरा पड़ा पंचायत भवन
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत गुंदरई-अर्जनी के पंचायत भवन का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही पंचायत को अपना भवन मिल जाएगा और पंचायत के सभी कार्य व्यवस्थित रूप से संचालित होने लगेंगे। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन नहीं होने के कारण पंचायत संबंधी कामकाज को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में परेशानी होती है। वर्तमान में पंचायत के सहायक सचिव कवींद्र धाकड़ द्वारा पंचायत का संचालन किया जा रहा है। पंचायत भवन जैसी महत्वपूर्ण सुविधा के लंबे समय से अधूरे रहने को लेकर ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभाग से निर्माण कार्य की स्थिति स्पष्ट करने और शेष कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन केवल एक सरकारी इमारत नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के लिए पंचायत से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रमुख केंद्र होता है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, योजनाओं से संबंधित जानकारी, पंचायत के विकास कार्यों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर सुविधा मिलना आवश्यक है। ऐसे में भवन का वर्षों से अधूरा रहना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

बारिश में पंचायत भवन तक पहुंचना मुश्किल
पंचायत भवन के अधूरे निर्माण की समस्या के साथ-साथ बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश के कारण कीचड़ से सराबोर हो गया है। कई स्थानों पर पानी जमा होने के कारण लोगों को पैदल चलने में भी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन के आसपास स्थित गांव के सबसे पुराने मंदिर तक पहुंचने में भी लोगों को कठिनाई हो रही है। धार्मिक स्थल तक जाने वाले रास्ते की स्थिति खराब होने के कारण बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था पहले से होती तो बारिश के दौरान ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने पंचायत भवन तक पहुंचने वाले मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराने की मांग की है।
गांव की सड़कें भी बदहाल
ग्रामीणों के अनुसार केवल पंचायत भवन तक जाने वाला रास्ता ही खराब नहीं है, बल्कि गांव की कई गलियों और मुख्य मार्गों पर भी कीचड़ की समस्या बनी हुई है। बारिश के बाद जगह-जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा हो जाता है।
इससे पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क और जलभराव की समस्या के कारण बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत होती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की सभी प्रमुख सड़कों और गलियों का सर्वे कराया जाए। जहां सड़क निर्माण या मरम्मत की आवश्यकता है, वहां जल्द काम शुरू कराया जाए।

नालियां चौक, जल निकासी की समस्या
ग्रामीणों ने गांव में नालियों की स्थिति को लेकर भी शिकायत की है। उनका कहना है कि कई नालियां चौक पड़ी हैं और उनकी नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालियों की सफाई नहीं होने से बारिश का पानी और गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है।
जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से ग्रामीणों को लंबे समय तक जलभराव का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने नालियों की सफाई कराने के साथ-साथ आवश्यकता वाले स्थानों पर नई नालियों का निर्माण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ जल निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है। यदि नालियां व्यवस्थित नहीं होंगी तो नई सड़क बनने के बाद भी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रह सकती है।
सामुदायिक भवन को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
गांव में सामुदायिक भवन की आवश्यकता को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीण मनोज लोधी ने बताया कि गांव में लंबे समय से सामुदायिक भवन की जरूरत महसूस की जा रही है।
मनोज लोधी ने आरोप लगाया कि सामुदायिक भवन के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग मंदिर में किया गया है। ग्रामीणों ने इस आरोप की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सामुदायिक भवन होना आवश्यक है। इसके अभाव में ग्रामीणों को कार्यक्रम आयोजित करने में कठिनाई होती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सामुदायिक भवन से संबंधित स्वीकृति, राशि और उसके उपयोग की जांच कराई जाए तथा यदि भवन की आवश्यकता है तो उसके निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

शासकीय स्कूल में सुविधाओं की कमी
ग्रामीणों ने गांव के शासकीय स्कूल से जुड़ी समस्याओं को भी ज्ञापन में शामिल किया है। उनका कहना है कि स्कूल में आवश्यक भवन, पर्याप्त कमरे और शौचालय सहित कई मूलभूत सुविधाओं की कमी है।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए स्कूल भवन और अन्य जरूरी सुविधाओं का होना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा विभाग और प्रशासन से स्कूल का निरीक्षण कर आवश्यकताओं का आकलन कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए। स्कूल भवन से जुड़ी कमियों को दूर करने के साथ विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पेयजल व्यवस्था भी ग्रामीणों की प्रमुख मांग
गांव में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था की मांग भी ग्रामीणों ने उठाई है। ग्रामीणों के अनुसार गर्मी के अलावा अन्य मौसम में भी कई बार पानी की उपलब्धता और वितरण को लेकर परेशानी सामने आती है।
ग्रामीणों ने पानी की टंकी और पाइपलाइन की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गांव में व्यवस्थित जलापूर्ति के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा तैयार किया जाए तो ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव की पेयजल व्यवस्था का सर्वे कराने और आवश्यकता के अनुसार पानी की टंकी एवं पाइपलाइन का प्रस्ताव तैयार करने की मांग की है।

स्ट्रीट लाइट की भी जरूरत
ग्रामीणों ने गांव में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने की समस्या भी सामने रखी है। उनका कहना है कि कई गलियों और मुख्य मार्गों पर रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं रहती।
इस कारण ग्रामीणों को रात में आने-जाने में परेशानी होती है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रमुख स्थानों और गांव की गलियों में स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, नाली और पेयजल जैसी सुविधाओं के साथ प्रकाश व्यवस्था भी गांव के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए स्ट्रीट लाइट के लिए भी प्राथमिकता से कार्रवाई की जानी चाहिए।
SDM को सौंपा ज्ञापन
ग्राम पंचायत गुंदरई-अर्जनी की समस्याओं को लेकर ग्रामीण गुरुवार को सिलवानी पहुंचे। उन्होंने SDM अलका सिंह को ज्ञापन सौंपकर गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य रूप से वर्ष 2018 से अधूरे पंचायत भवन का निर्माण पूरा कराने, सड़क एवं नाली निर्माण, जल निकासी व्यवस्था सुधारने, शासकीय स्कूल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, सामुदायिक भवन की व्यवस्था, पेयजल के लिए पानी की टंकी एवं पाइपलाइन तथा स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का मौके पर निरीक्षण और विस्तृत सर्वे कराने की मांग करते हुए कहा कि जिन कार्यों की तत्काल आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत किया जाए।
ग्रामीणों को प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं और अब उन्होंने प्रशासन के समक्ष सामूहिक रूप से अपनी मांग रखी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि ज्ञापन के बाद संबंधित विभाग गांव की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक विकास कार्यों के लिए प्रक्रिया शुरू करेंगे।
ग्रामीणों ने विशेष रूप से पंचायत भवन के निर्माण को जल्द पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2018 से अधूरा पड़ा भवन अब प्रशासन की प्राथमिकता में होना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज लोधी, रविशंकर लोधी, कीरत सिंह लोधी, राघवेंद्र सिंह लोधी, अनिल गौर, कैलास गौर, लोकेश गौर, संदीप लोधी, पप्पू पटेल और आदित्य भार्गव सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि गांव का निरीक्षण कर सड़क, नाली, पेयजल, स्कूल, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन और पंचायत भवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो इससे गुंदरई-अर्जनी के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है।
