अक्षय ऊर्जा के महत्व पर हुए व्याख्यान, विद्यार्थियों को दिलाई सामूहिक शपथ
आठनेर। शासकीय महाविद्यालय आठनेर में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस कार्यक्रम उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज पाटिल के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने अक्षय ऊर्जा के महत्व, उसके विभिन्न स्रोतों तथा भविष्य में इसकी आवश्यकता को लेकर विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत अक्षय ऊर्जा विषय पर व्याख्यान से हुई। डॉ. निलेश धुर्वे ने अपने संबोधन में अक्षय ऊर्जा की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि अक्षय ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो प्राकृतिक स्रोतों से लगातार प्राप्त होती रहती है। सूर्य का प्रकाश, हवा, जल, जैव ऊर्जा और पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा इसके प्रमुख स्रोत हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए प्राकृतिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है। अक्षय ऊर्जा स्रोत पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अक्षय ऊर्जा की दिलाई सामूहिक शपथ
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज पाटिल ने उपस्थित विद्यार्थियों और स्टाफ को अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर सामूहिक शपथ दिलाई। उन्होंने अक्षय ऊर्जा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऊर्जा के संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग आज की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
जीवाश्म ईंधन सीमित, अक्षय ऊर्जा जरूरी
कार्यक्रम में अगला व्याख्यान प्रोफेसर भूपेंद्र अहिरवार ने दिया। उन्होंने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रही ऊर्जा की मांग पर चर्चा करते हुए कहा कि औद्योगिक विकास, परिवहन और दैनिक जीवन में ऊर्जा की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन सीमित संसाधन हैं। इनका लगातार दोहन भविष्य में ऊर्जा संकट का कारण बन सकता है। ऐसे में अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
प्रोफेसर अहिरवार ने विद्यार्थियों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग पर प्रकाश
इसके बाद डॉ. विकेश सिंह ने अक्षय ऊर्जा विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से सौर एवं पवन ऊर्जा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग सौर पैनलों के माध्यम से विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। इसी प्रकार पवन चक्कियों की सहायता से हवा की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों सहित विभिन्न स्थानों पर सौर ऊर्जा का उपयोग बिजली की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं अक्षय ऊर्जा के महत्व को समझें और अपने परिवार तथा समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है अक्षय ऊर्जा का महत्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी बताया कि अक्षय ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण से भी है। जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हैं।
विद्यार्थियों को बताया गया कि ऊर्जा संरक्षण की शुरुआत दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों से की जा सकती है। अनावश्यक रूप से बिजली के उपकरण चालू न रखना, बिजली की बचत करना तथा उपलब्ध होने पर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना ऊर्जा संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम हो सकते हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत आयोजन
यह कार्यक्रम महाविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत आयोजित किया गया। प्रकोष्ठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ-साथ समसामयिक विषयों पर भी जागरूक किया जा रहा है।
अक्षय ऊर्जा जैसे विषय को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संदर्भ में समझना विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापकों और स्टाफ की उपस्थिति रही। सभी ने अक्षय ऊर्जा के संरक्षण और उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए।

ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में डॉ. वर्जिनिया दवंडे, प्रोफेसर माधुरी तुम्बेकर, प्रोफेसर भूपेंद्र अहिरवार, डॉ. साधना ठाकुर, डॉ. निर्मल विश्वास, डॉ. निलेश धुर्वे, डॉ. विकेश सिंह, डॉ. सुरेंद्र जीतपुरे तथा भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रोफेसर हरिकिशन कोगे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रोफेसर प्रमोद गायकवाड ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अंत में डॉ. गजानंद ठाकरे ने उपस्थित सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है। अक्षय ऊर्जा के स्रोत भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी ने ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
