खबर प्रकाशित होने से नाराज बिजली विभाग के निजी कर्मचारी ने पत्रकार से की मारपीट, जान से मारने की धमकी
रतलाम जिले के बछोड़िया गांव की घटना
रतलाम जिले के मावता क्षेत्र के ग्राम बछोड़िया में बिजली विभाग की लापरवाही उजागर करने वाली खबर प्रकाशित करवाना एक पत्रकार को महंगा पड़ गया। आरोप है कि खबर प्रकाशित होने से नाराज मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) से जुड़े एक निजी कर्मचारी ने पहले पत्रकार के घर की बिजली काट दी और बाद में सार्वजनिक स्थान पर उनके साथ अभद्रता करते हुए मारपीट की। आरोपी ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद क्षेत्र के पत्रकारों और ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों ने पुलिस और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
विद्युत तारों की गंभीर समस्या उजागर की थी
जानकारी के अनुसार, ग्राम बछोड़िया में सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के पास 11 हजार केवी की विद्युत लाइन के तार काफी नीचे लटक रहे थे। बताया गया कि ये तार कई स्थानों पर पेड़ों से भी छू रहे थे। इससे गांव के लोगों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। मंदिर के पास ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, इसलिए नीचे लटकते विद्युत तार कभी भी बड़ी जनहानि का कारण बन सकते थे।
ग्रामीणों का आरोप था कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। समस्या बनी रहने के कारण ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही थी।
इसी गंभीर मामले को पत्रकार ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने 18 अगस्त 2026 को विद्युत तारों की स्थिति और विभागीय लापरवाही से संबंधित खबर प्रकाशित करवाई। खबर में यह बताया गया था कि 11 हजार केवी लाइन के तार नीचे लटकने और पेड़ों से छूने के कारण किसी भी समय हादसा हो सकता है। खबर सामने आने के बाद बिजली विभाग में हलचल मची।
खबर के बाद कर्मचारियों ने तारों को ठीक किया
खबर प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के पास लटक रहे विद्युत तारों को ठीक किया और उन्हें निर्धारित ऊंचाई पर व्यवस्थित किया। इससे ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब दुर्घटना का खतरा कम होगा और बिजली विभाग भविष्य में भी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पर ध्यान देगा।
हालांकि, आरोप है कि इसी कार्रवाई से बिजली विभाग से जुड़े निजी कर्मचारी धर्मेन्द्र सिंह नाराज हो गए। बताया जा रहा है कि धर्मेन्द्र सिंह, निवासी ग्राम सुजापुर, ने खबर प्रकाशित करवाने के लिए पत्रकार को जिम्मेदार माना और उनके प्रति रंजिश पाल ली।

पत्रकार के घर की बिजली काटने का आरोप
पीड़ित पत्रकार के अनुसार, जब वह अपने घर पर मौजूद नहीं थे, उसी दौरान आरोपी धर्मेन्द्र सिंह ने कथित रूप से उनके घर की बिजली काट दी। आरोप है कि बिजली काटने की कार्रवाई किसी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि खबर प्रकाशित होने की नाराजगी और बदले की भावना से की गई।
बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद पत्रकार ने मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया। उन्हें बताया गया कि उनके घर का कनेक्शन बकाया बिल के कारण काटा गया है। इसके बाद पत्रकार आरोपी से बात करने के लिए बस स्टैंड पहुंचे। पत्रकार का कहना है कि वह केवल बिजली काटे जाने का कारण जानना चाहते थे, लेकिन आरोपी ने वहां उनके साथ विवाद शुरू कर दिया।
बस स्टैंड पर गाली-गलौज और मारपीट
शिकायत के अनुसार, बस स्टैंड पर बिजली काटने का कारण पूछने पर धर्मेन्द्र सिंह ने पत्रकार के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और अभद्रता शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपी ने सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे और पत्रकार को थप्पड़ मारा। इसके बाद उसने पत्रकार की गर्दन पकड़कर उनके साथ मारपीट की।
पीड़ित पत्रकार ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के दौरान बस स्टैंड पर मौजूद लोगों ने विवाद बढ़ता देखकर बीच-बचाव किया। ग्रामीण विजयदास, बद्रीलाल, बसन्तसिंह, नागेश्वर सेन और अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया तथा स्थिति को शांत कराया।
ग्रामीणों के हस्तक्षेप के कारण मामला उस समय और अधिक गंभीर होने से बच गया। घटना के बाद पत्रकार ने अपने साथ हुई मारपीट, गाली-गलौज और धमकी की जानकारी परिजनों तथा स्थानीय लोगों को दी।

पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना के बाद पीड़ित पत्रकार ने मावता पुलिस चौकी, थाना कालूखेड़ा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी धर्मेन्द्र सिंह पिता भेरूसिंह सौलंकी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296 और 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, मामले में मारपीट, गाली-गलौज और धमकी से संबंधित आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि पत्रकार के घर की बिजली किस आधार पर काटी गई और क्या इसके लिए विभागीय नियमों का पालन किया गया था।
पुलिस यह भी पता लगाएगी कि आरोपी धर्मेन्द्र सिंह को विद्युत कनेक्शन काटने का अधिकृत अधिकार प्राप्त था या नहीं। यदि बिजली काटने की कार्रवाई विभागीय अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना की गई है, तो इस संबंध में बिजली विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
पत्रकार संगठनों में नाराजगी
पत्रकार पर हमला और खबर प्रकाशित होने के बाद कथित रूप से बिजली कनेक्शन काटे जाने की घटना को लेकर स्थानीय पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक समस्या को सामने लाना मीडिया की जिम्मेदारी है। यदि किसी खबर में तथ्यात्मक त्रुटि हो, तो संबंधित विभाग या व्यक्ति को उसका खंडन करने और अपना पक्ष रखने का अधिकार है। लेकिन खबर से नाराज होकर पत्रकार को धमकाना, उसके साथ मारपीट करना या किसी प्रकार का दबाव बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराने की मांग की गई है। पत्रकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को अक्सर स्थानीय मीडिया ही प्रशासन और विभाग के सामने लाता है। ऐसे मामलों में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए घटना से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। पहला, ग्राम बछोड़िया में 11 हजार केवी के तारों के नीचे लटकने और पेड़ों से छूने की शिकायत, जिसे खबर प्रकाशित होने के बाद ठीक किया गया। दूसरा, खबर से नाराजगी के चलते पत्रकार के घर की बिजली काटने और बस स्टैंड पर मारपीट व धमकी देने का आरोप।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को क्षेत्र में लटकते तारों, खुले विद्युत उपकरणों और अन्य खतरनाक स्थितियों की नियमित जांच करनी चाहिए। वहीं, पुलिस कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट और बिजली कनेक्शन काटने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
मावता चौकी और कालूखेड़ा थाना पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करती है और बिजली विभाग इस गंभीर घटनाक्रम पर क्या कदम उठाता है।
