चमोली की निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा, 7 मजदूरों की मौत; 3 अब भी लापता
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में मलबे और पानी आने से फंसे थे मजदूर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
Chamoli । उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसा टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) लिमिटेड के अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत प्रोजेक्ट की टनल में हुआ। हादसे के समय सुरंग में बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग में काम के दौरान अचानक धमाका हुआ और ऊपर से मलबे के साथ पानी आने लगा। इस दौरान वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए और कई लोग सुरंग के भीतर फंस गए।
22 कर्मचारियों के फंसने की सूचना
जानकारी के मुताबिक हादसे के समय सुरंग के अंदर करीब 22 कर्मचारी मौजूद थे। इनमें से 19 लोगों को अब तक बाहर निकाला जा चुका है। बाहर निकाले गए मजदूरों में 12 घायल बताए गए हैं, जबकि हादसे में 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है।
वहीं, तीन मजदूर अभी भी सुरंग के भीतर लापता हैं। रेस्क्यू टीमें लगातार इन तीनों की तलाश में जुटी हुई हैं।
7 मजदूरों की मौत की पुष्टि
हादसे में अब तक जिन सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, उनमें प्रदीप पंवार, उम्र 31 वर्ष, निवासी टिहरी गढ़वाल, मुकेश सिंह निवासी चमोली, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा और जितेंद्र कुमार निवासी उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ निवासी लोकेश्वर, पुत्र सोन सिंह पोयम और भुनेश्वर, पुत्र सुरेंद्र कुमार की भी हादसे में मौत हुई है।
तीन मजदूरों की तलाश जारी
रेस्क्यू एजेंसियां अब सुरंग के भीतर फंसे तीन लापता मजदूरों को तलाशने में जुटी हैं। इनमें झारखंड निवासी लुकास टोपनो तथा छत्तीसगढ़ निवासी चेतन पोयाम और देवनाथ शामिल बताए गए हैं।
मलबे और सुरंग के भीतर की परिस्थितियों को देखते हुए रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बनी हुई है। बचावकर्मी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से सुरंग के भीतर पहुंचने और लापता मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार
हादसे में घायल हुए 12 मजदूरों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल गोपेश्वर में घायलों का उपचार जारी है। वहीं बेस अस्पताल श्रीनगर में रोहित पांडेय का इलाज चल रहा है।
गोविंदो मंडाल को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। गंभीर स्थिति को देखते हुए बेस अस्पताल श्रीनगर और AIIMS ऋषिकेश को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान
हादसे के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस के 22 जवान, CISF के 25 जवान, NDRF के 105 बचावकर्मी, SDRF के 42 बचावकर्मी और ITBP के 52 जवान शामिल हैं।
इसके अलावा DDFR के चार बचावकर्मी, फायर सर्विस के 14 कर्मचारी, सेना की टीम, डॉग स्क्वॉड, मेडिकल टीम और जिला प्रशासन की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं। HCC कंपनी की मशीनरी और मानव संसाधन का भी बचाव अभियान में इस्तेमाल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया जायजा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। खराब मौसम के बीच मुख्यमंत्री पीपलकोटी पहुंचे। प्रतिकूल मौसम के कारण हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कराई गई।
मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू अभियान में जुटी सभी एजेंसियों के अधिकारियों से जानकारी ली और सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना और उपचार की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
आपदा प्रबंधन के तहत ESF-9 Search and Rescue (SAR) को सक्रिय किया गया है। रेस्क्यू टीमों की प्राथमिकता सुरंग में लापता तीनों मजदूरों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
प्रशासन द्वारा घायलों के इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। गंभीर घायलों को जरूरत पड़ने पर श्रीनगर बेस अस्पताल या AIIMS ऋषिकेश रेफर करने की तैयारी भी रखी गई है।
प्रोजेक्ट की 3.5 किलोमीटर लंबी है टनल
यह हादसा 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के तहत बनाई जा रही सुरंग में हुआ। परियोजना के निर्माण कार्य में हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) शामिल है।
बताया गया है कि परियोजना के तहत करीब 3.5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है और इसका लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हादसा उस समय हुआ जब मजदूर सुरंग के करीब 1.8 किलोमीटर अंदर काम कर रहे थे।
अंतिम आंकड़ा रेस्क्यू पूरा होने के बाद स्पष्ट होगा
फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान सुरंग में लापता तीन श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही हादसे में मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
खराब मौसम और सुरंग के भीतर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बचाव टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं। पूरे घटनाक्रम पर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की नजर बनी हुई है।
