रामघाट की पारंपरिक आरती को लेकर पंडों की निवेदन यात्रा, मुंह पर पट्टी बांधकर जताया मौन विरोध
Ujjain। रामघाट पर पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक आरती की व्यवस्था को लेकर तीर्थ पुरोहित पंडों और महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी मामले में शुक्रवार को तीर्थ पुरोहित पंडों ने अपनी मांगों और विरोध को लेकर निवेदन यात्रा निकाली। यात्रा में शामिल पंडों ने मुंह पर पट्टी बांधकर मौन विरोध दर्ज कराया और हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों की ओर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित किया।
पारंपरिक आरती की व्यवस्था को लेकर विवाद
तीर्थ पुरोहित पंडों का कहना है कि रामघाट पर होने वाली पारंपरिक आरती उज्जैन की धार्मिक पहचान और प्राचीन परंपराओं से जुड़ी हुई है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शहर की सदियों पुरानी आस्था और तीर्थ पुरोहित समाज की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पंडों के अनुसार, आरती की परंपरा और उसके संचालन की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई है। उनका आरोप है कि परंपरागत व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं और मांगों का अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।
मुंह पर पट्टी बांधकर निकाली निवेदन यात्रा
अपनी बात जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए तीर्थ पुरोहित पंडों ने निवेदन यात्रा का आयोजन किया। यात्रा में शामिल लोगों ने अपने मुंह पर पट्टी बांध रखी थी। इसके माध्यम से उन्होंने मौन रहकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न तख्तियां भी थीं, जिन पर रामघाट की पारंपरिक आरती की व्यवस्था और धार्मिक परंपरा के संरक्षण से संबंधित संदेश लिखे हुए थे। शांतिपूर्ण तरीके से निकाली गई इस यात्रा के माध्यम से पंडों ने प्रशासन और संबंधित जिम्मेदारों से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
पीढ़ियों पुरानी परंपरा के संरक्षण की मांग
तीर्थ पुरोहित पंडों का कहना है कि रामघाट की आरती से उनकी धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि कई पीढ़ियों से इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया जाता रहा है। ऐसे में आरती की व्यवस्था में होने वाले बदलावों को लेकर तीर्थ पुरोहित समाज में असंतोष है।
पंडों की मांग है कि रामघाट की पारंपरिक आरती की मूल व्यवस्था और धार्मिक स्वरूप को संरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े निर्णय लेते समय स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और वर्षों से इन परंपराओं से जुड़े लोगों की भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
लगातार बढ़ रहा विरोध
रामघाट की पारंपरिक आरती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है। पंडों की निवेदन यात्रा इसी विरोध की अगली कड़ी मानी जा रही है। मुंह पर पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने का उद्देश्य यह संदेश देना रहा कि उनकी बात को लंबे समय से सुना नहीं जा रहा है और अब वे मौन विरोध के माध्यम से अपनी भावनाएं जिम्मेदारों तक पहुंचा रहे हैं।
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चाओं का दौर जारी है। रामघाट उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का
महत्वपूर्ण केंद्र होने के कारण यहां होने वाली आरती से जुड़े विवाद पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भी नजर बनी हुई है।
प्रशासन के सामने समाधान की चुनौती
अब पूरे मामले में प्रशासन और महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पंडों की मांगों और पारंपरिक आरती की व्यवस्था को लेकर उत्पन्न मतभेद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
तीर्थ पुरोहित समाज अपनी वर्षों पुरानी परंपरा के संरक्षण की मांग कर रहा है, वहीं व्यवस्था से जुड़े निर्णयों को लेकर विवाद सामने आया है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर ऐसा रास्ता निकालने की आवश्यकता है, जिससे धार्मिक परंपरा के साथ-साथ व्यवस्थागत पहलुओं का भी संतुलन बना रहे।
श्रद्धालुओं की भी मामले पर नजर
रामघाट पर होने वाली आरती उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखती है। महाकाल की नगरी में धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक आयोजनों की अपनी अलग पहचान है। ऐसे में आरती की व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद पर श्रद्धालुओं की भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल तीर्थ पुरोहित पंडों की निवेदन यात्रा के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति पंडों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और रामघाट की पारंपरिक आरती को लेकर चल रहे विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
दैनिक स्वराज वाणी
प्रियंका गुजराती
