खुफिया एजेंसीयो की नाकामी के कारण सफल हुआ जंतर-मंतर का आंदोलन
विपक्ष के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण बेकार हुआ मानसून सत्र
बिना कोई काम किये जनता का 180 करोड रुपए खा गए सांसद
अपने को संविधान से ऊपर समझते विपक्षी नेता
(अतिवीर जैन पराग, पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय)
संसद का मानसून सत्र बिना किसी काम काज के समाप्त हो गया । जनता की गाड़ी कमाई के 180 करोड रुपए सांसदों को खाने-पीने वेतन भक्तों में दे दिए गए । जब संसद में कोई काम ही नहीं हुआ तो सांसदों को किस बात का वेतन भत्ता दिया जाए । विपक्षी दलों ने जो कि संविधान की बात करते हैं संविधान का मजाक बनाते हुए संसद के बाहर प्रदर्शन और पोस्टर ही दिखा नारे लगाते रहे ।
और संसद में आकर भी हंगामा ही किया और एक भी सत्र चलने नहीं दिया । ऐसे सांसदों का वेतन भत्ता रोका जाना चाहिए । इन्हें जनता ने संसद में जनता की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए भेजा है ना की स्कूल कॉलेज की तरह पोस्टर बाजी और नारेबाजी करने के लिए । दस पंद्रह दिन तक अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए ?
अगर पेलेट गन प्रदर्शनकारियों पर चलाई भी गई थी तो उसमें क्या बड़ी बात हो गई ? जब प्रदर्शनकारी संसद तक आ पहुंचे थे तो उन पर पेलेट गन तो क्या गन भी चलाई जा सकती थी । क्योंकि संसद की सुरक्षा सर्वोपरि होती है । सवाल यह भी है कि प्रदर्शनकारियों को संसद भवन तक आने क्यों दिया गया ? उन पर पहले ही लाठी चार्ज या पेलेट गन चला कर क्यों नहीं रोका गया ?प्रदर्शनकारियों को रोकने में और उनके साथ कार्रवाई करने में सरकार चूक गई ।
जब यह पता लग गया है कि प्रदर्शनकारियों में लगभग ढाई हजार से ज्यादा अपराधी तत्व थे । जो की तरह-तरह के नुकीले हथियार और कील लगे डंडे लेकर वहां पर आए हुए थे ।
क्या पता इन्हीं अपराधी तत्वों ने पेलेट गन चलाई हो ? लगभग 200 पुलिसकर्मी गंभीर चोटों में घायल हुए । जिसमें पुलिस के अनेक उच्च अधिकारी भी शामिल है । मान लें ऐसे में अगर पुलिस ने पेलेट गन का प्रयोग किया तो क्या गलत किया ? अगर पुलिस पेलेट गन का प्रयोग ना करती तो शायद स्थिति इससे ही भयंकर हो सकती थी ।
पर अगर पेलेट गन का प्रयोग हुआ है तो इसको स्वीकार करने में सरकार क्यों घबरा रही है ? उसको मानना चाहिए कि पेलेट गन का प्रयोग हुआ है ,क्योंकि संसद की सुरक्षा सर्वोपरि थी । प्रदर्शनकारियों में अपराधी तत्वों की अधिकता थी । छात्रों के नाम पर प्रदर्शनकारियों में कांग्रेस के और वामपंथी दलों के छात्र और गुंडे घुसे हुए थे । क्योंकि वो चाहते थे कि किसी भी तरह स्थिति बिगड़े, जिसमें वो सफल रहे ।
जिससे कि सरकार को कोसा और घेरा जा सके । दीपके को अमेरिका से बुलाकर और असामाजिक तत्वों को एकत्रित कर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की योजना जब से कजरीवाल दिल्ली में हारे तब से चल रही थी और गृह मंत्रालय का खुफिया तंत्र सो रहा था। राहुल गांधी और केजरीवाल का जो षड्यंत्र था वह सफल हो गया । क्योंकि सरकार ठीक से प्रदर्शनकारियों को समय पर नहीं संभाल पायी। गृह मंत्रालय का खुफिया तंत्र स्थिति को आंकने में पूरी तरह विफल रहा ।
गृह मंत्रालय को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि गिरफ्तार किए गए और बाद में छोड़े गए कितने लोग वास्तव में छात्र थे और कितने गुंडा तत्व थे । जिन असामाजिक तत्वों पर एफ आई आर की गई थी क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया ? और नहीं तो क्यों ? यह तथ्य जनता के सामने लाई जानी चाहिए । जिससे जनता को प्रदर्शनकारियों की असलियत पता लग सके।
जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर दबाव बनाकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी करवा दिया । और अपने पर सभी तरह की एफ आई आर भी वापस करवा दिए । तो उधर झारखंड में कांग्रेस समर्थित सरकार ने पहले छात्रों पर जमकर लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े । उसके बाद 600 एफ आई आर छात्रों पर दर्ज कर दी । झारखंड में छात्रों के आंदोलन का कारण बहुत ही दिलचस्प है। वहां पर ना तो पेपर लीक हुआ ना ही नकल हुई । बरन अपने चहेतो को नौकरी दिलाने के लिए कॉपियों पर नंबर ही बदल दिए गए । जब उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी तब भी नौकरियों में ऐसे ही धांधली होती थी ।
जिसके कारण जितने भी नौकरियों के परिणाम निकले उन सबमें अदालतों में सुप्रीम कोर्ट तक अभी भी कई केस पेंडिंग पड़े हुए हैं । क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी सपा सरकार अपने
चहेतो को नौकरी देने के लिए हर तरह की हेरा फेरी करती थी । ऐसा ही पंजाब में आपकी सरकार में हो रहा है । पर विपक्ष को यह सब नहीं दिखता ।उसको तो किसी भी तरह केंद्र सरकार को घेरना है । और मोदी को नीचा दिखाना है । विपक्षी दलों के सभी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत खुंदक रखते हैं। वह यह भूल जाते हैं कि यह लोकतंत्र हैं और नरेंद्र मोदी जनता द्वारा बहुमत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री बने हैं । वैसे तो राहुल गांधी संविधान हाथ में लेकर घूमते हैं। पर उन्हें संविधान का एबीसीडी भी नहीं मालूम । तभी वह मोदी जी को प्रधानमंत्री कब से हटाने के लिए संविधान विरोधी हरकतें करते रहते हैं ।
परिवार बाद के चलते राहुल गांधी भले नेता विपक्ष बन गए हैं पर ऊ उनमें सांसद बनने की भी काबिलियत नहीं है। अफसो स की बात यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिन्हें सभी संसदीय परंपराओं का ज्ञान है और वर्षों सत्ता में रहे हैं वह भी गांधी परिवार के आगे नतमस्तक होकर राहुल गांधी के उल जलूल कदमों में उसका साथ दे रहे हैं ।
राहुल गांधी भारतीय परंपरा और संस्कृति से कोसों दूर है । उन्हें अपनों से बड़ों के लिए बात करते समय शब्दों का चयन करने की भी तमीज नहीं है । ऐसे में परिवार वाद चलते विपक्ष के नेता बने ,यह भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा । और उनके विपक्ष का नेता रहते भारतीय संसद आगे भी चल पाएगी या नहीं यह भी नहीं कहा जा सकता ।
यह भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास कहा जाएगा । संविधान की बात करने वाले राहुल गांधी स्वयं ही सबसे ज्यादा संविधान का उल्लंघन और मजाक बना रहे हैं । राहुल चाहते हैं कि उन्हें किसी भी तरह संविधान को तोड़ मोड कर या बदलकर देश का प्रधानमंत्री बना दिया जाए ।
सम्पर्क सूत्र:-
इंजी. कवि अतिवीर जैन * पराग *
पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय
कवि, लेखक , व्यंग्यकार ,
साहित्यकार,स्वतंत्र पत्रकार ,
स्तंभकार,सामाजिक कार्यकर्ता
संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष : राष्ट्रीय साहित्य परिषद
जैन साहित्य परिषद , राष्ट्रवादी लेखक संघ,
राष्ट्रीय नागरिक संघ ।
मोबाइल 94569 66722 what’s up
हर्ष कुटीर, 232/1डी,शिवलोक ,
कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001
