परमात्मा की बात मानना है या परमाधामी की—साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब
चातुर्मास प्रवचन में धर्म, तप, साधना और जीवदया का संदेश; मानव जीवन को सार्थक बनाने पर दिया जोर
महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने सोमवार को उपस्थित श्रद्धालुओं को जिनवाणी का रसपान कराते हुए धर्म, जीवदया, तप, साधना और मानव जीवन की सार्थकता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
प्रवचन के दौरान साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करते हुए भगवान महावीर द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
“इस पेट को कितना भी खिलाओ, सब वेस्ट ही होना है”
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने जीवन में संयम और विवेक के महत्व को समझाते हुए कहा कि मनुष्य भोजन और भौतिक सुखों के पीछे भागता रहता है, लेकिन अंततः शरीर की आवश्यकताएं सीमित हैं।
उन्होंने प्रेरक भाव से कहा कि “इस पेट को कितना भी खिलाओ, सब वेस्ट ही होना है।” इसलिए मनुष्य को केवल शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति में जीवन नहीं लगाना चाहिए, बल्कि धर्म, आराधना, तप और साधना के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय आत्मचिंतन, साधना और धार्मिक आराधना के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में धार्मिक गतिविधियों को स्थान देकर आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
जीवदया और अहिंसा पर दिया विशेष जोर
प्रवचन के दौरान साध्वी जी ने जैन धर्म में जीवदया और अहिंसा के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि संसार में अनगिनत सूक्ष्म जीवों का अस्तित्व है और मनुष्य को अपने दैनिक जीवन में भी उनके प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।
उन्होंने पानी को छानकर पीने तथा भोजन में जीव हिंसा से बचने की जैन परंपरा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को संयमित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
साध्वी जी ने कहा कि अहिंसा केवल किसी बड़े जीव को नुकसान नहीं पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूक्ष्म जीवों के प्रति भी संवेदनशीलता रखना जैन दर्शन की महत्वपूर्ण शिक्षा है।
जमीकंद के सेवन को लेकर किया सावधान
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने जमीकंद जैसे खाद्य पदार्थों के संबंध में भी जैन धर्म की मान्यताओं को समझाया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में जमीकंद को लेकर विशेष सावधानी बरतने की शिक्षा दी गई है, क्योंकि इसमें अनेक सूक्ष्म जीवों की उपस्थिति मानी जाती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप आहार और जीवनशैली में संयम रखने का संदेश दिया। प्रवचन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अहिंसा, संयम और जीवदया के सिद्धांतों के प्रति जागरूक करना रहा।

“मनुष्य जीवन वेस्ट नहीं, बेस्ट बनाइए”
साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य को यह विचार करना चाहिए कि उसे अपने जीवन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए करना है। यदि पूरा जीवन केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति में लगा दिया गया और धर्म तथा आत्मकल्याण की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो दुर्लभ मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना, तप और साधना के माध्यम से जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है। मनुष्य को अपने समय का सदुपयोग करते हुए आत्मिक उन्नति के लिए प्रयास करना चाहिए।
परमात्मा के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान
प्रवचन के दौरान साध्वी जी ने कहा कि हम भगवान महावीर के अनुयायी हैं और हमें परमात्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के सामने हमेशा यह विकल्प रहता है कि वह जीवन को धर्म और सदाचार के मार्ग पर ले जाए या फिर अपने कर्मों के परिणामों का सामना करे। इसी भाव को उन्होंने प्रेरक रूप में “परमात्मा की बात मानना है या परमाधामी की” के माध्यम से श्रद्धालुओं के सामने रखा।
उन्होंने भगवान महावीर की अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
“जब जागे तभी सवेरा”
साध्वी जी ने श्रद्धालुओं को समय के महत्व का भी बोध कराया। उन्होंने कहा कि धर्म और आत्मकल्याण के लिए कोई निश्चित उम्र या समय निर्धारित नहीं है।
उन्होंने कहा कि “जब जागे तभी सवेरा”, इसलिए व्यक्ति को धर्म की ओर बढ़ने के लिए भविष्य का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन और समय दोनों अनिश्चित हैं, इसलिए वर्तमान समय का सदुपयोग करते हुए अच्छे कर्म और धार्मिक साधना करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन प्रभु की कृपा से मिला दुर्लभ अवसर है और इसे प्रभु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर ही सार्थक बनाया जा सकता है।
साधार्मिक भक्ति और प्रभावना का लाभ
महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को साधार्मिक भक्ति एवं प्रभावना का लाभ संजय कुमार एवं नमन कुमार चौरडिया परिवार ने लिया।
वहीं प्रभावना का लाभ इंद्रमल एवं राजेंद्र कुमार छजलानी परिवार, पेटलावद वालों द्वारा लिया गया।
इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर साध्वी जी के प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
प्रतिदिन हो रहे प्रवचन
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के प्रवचन महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित किए जा रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान आयोजित इन प्रवचनों में सकल जैन श्री संघ के साथ-साथ पंजाबी, पोरवाल, सिख, ब्राह्मण सहित अन्य समाजों के श्रद्धालु भी उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
धर्म और आत्मचिंतन का संदेश
महिदपुर रोड में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, अहिंसा, जीवदया और आत्मचिंतन की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है। साध्वी जी के प्रवचनों में दैनिक जीवन में धार्मिक मूल्यों को अपनाने और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रवचन का मूल संदेश यही रहा कि मनुष्य को अपने दुर्लभ जीवन का सदुपयोग करते हुए धर्म, तप और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। समय रहते आत्मचिंतन और सद्कर्मों की ओर कदम बढ़ाना ही मानव जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम है।
खास रिपोर्ट — सचिन भंडारी, महिदपुर रोड
दैनिक स्वराज वाणी
