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3 पैरों पर चलने को मजबूर घायल नंदी, जिम्मेदारों की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

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Published On: 10 August 2026
नंदी

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तीन पैरों पर चलने को मजबूर घायल नंदी, जिम्मेदारों की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

कई दिनों से पैर में गंभीर चोट, टूटे पैर को घसीटकर चल रहा नंदी, जीवदया प्रेमियों ने पशु चिकित्सालय को दी सूचना, फिर भी नहीं मिला समुचित उपचार

झकनावदा (मनीष कुमट) । नगर में एक घायल नंदी (बैल) पिछले कई दिनों से दर्द और तकलीफ में तीन पैरों के सहारे चलने को मजबूर है। नंदी के एक पैर में गंभीर चोट होने के कारण वह उस पैर पर वजन नहीं डाल पा रहा है। शरीर का वजन अधिक होने के चलते वह अपने घायल पैर को जमीन पर घसीटते हुए किसी तरह आगे बढ़ रहा है। उसकी हालत देखकर जीवदया प्रेमियों में चिंता और आक्रोश दोनों दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नंदी के पैर में चोट की जानकारी पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों को भी दी गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि नंदी को समुचित एवं स्थायी उपचार देने के बजाय केवल उसके घायल पैर पर पावडर का छिड़काव कर उसे छोड़ दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी अबोल पशु को गंभीर चोट लगी हो तो क्या केवल पावडर का छिड़काव ही उसका उपचार है?

दर्द से कराहता रहा अबोल पशु, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल

घायल नंदी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। वह तीन पैरों पर अपना शरीर संभालते हुए चल रहा है और घायल पैर को घसीटने के कारण उसकी परेशानी और बढ़ने की आशंका है। समय पर उचित उपचार नहीं मिलने से संक्रमण या चोट गंभीर होने का खतरा भी बना हुआ है। जीवदया प्रेमियों का कहना है कि नंदी बोल नहीं सकता, अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं सकता, लेकिन उसकी हालत साफ तौर पर दिखाई दे रही है। ऐसे में पशु चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह मौके पर पहुंचकर पशु की स्थिति का परीक्षण करे और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराए।

कलेक्टर लें संज्ञान, लापरवाही बरतने वालों पर हो कार्रवाई

मामले को लेकर अब स्थानीय लोगों और जीवदया प्रेमियों ने जिला प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि पशु चिकित्सालय को सूचना मिलने के बाद भी घायल नंदी को समुचित उपचार नहीं मिला है तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जीवदया प्रेमियों ने मांग की है कि कलेक्टर स्वयं मामले का संज्ञान लेकर संबंधित पशु चिकित्सक एवं कर्मचारियों से जवाब-तलब करें तथा नंदी का तत्काल मौके पर पहुंचकर उपचार करवाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि घायल पशुओं के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

अब सवाल सिर्फ एक नंदी का नहीं, अबोल पशुओं की जिंदगी का है

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी पशु चिकित्सालय का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि घायल और बीमार पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। यदि गंभीर रूप से घायल पशु को केवल पावडर छिड़ककर छोड़ दिया जाएगा तो फिर पशु चिकित्सा व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर घायल नंदी का उचित उपचार करवाना चाहिए, ताकि वह फिर से चारों पैरों पर खड़ा होकर चल सके। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

जीवदया प्रेमियों की मांग

जीवदया प्रेमियों ने अपनी मांग रखी है कि घायल नंदी का तत्काल विशेषज्ञ पशु चिकित्सक से उपचार कराया जाए। पैर की चोट की जांच कर आवश्यक दवा एवं उपचार दिया जाए। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे एवं उचित चिकित्सकीय प्रक्रिया कराई जाए। नंदी की नियमित निगरानी की जाए। उपचार में लापरवाही की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। जिले में घायल एवं बेसहारा पशुओं के उपचार की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। अबोल की आवाज बने प्रशासन — घायल नंदी को तत्काल उपचार दिलाना जरूरी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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