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12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, सूतक काल भी नहीं होगा मान्य; ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना

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Published On: 6 August 2026
सूर्य ग्रहण

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12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, सूतक काल भी नहीं होगा मान्य; ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना

मुरैना (मनोज जैन नायक)। वर्ष 2026 में लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। यह ग्रहण 12 अगस्त, बुधवार को श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या के दिन घटित होगा। हालांकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल और वेध दोष मान्य नहीं होगा।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न होती है। इस बार लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण विश्व के कुछ विशेष हिस्सों में दिखाई देगा, लेकिन भारत के लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे।

उन्होंने बताया कि भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का स्पर्श रात्रि 9 बजकर 4 मिनट पर होगा। इसका मध्य समय रात्रि 11 बजकर 16 मिनट रहेगा, जबकि ग्रहण का मोक्ष रात्रि 1 बजकर 28 मिनट पर होगा। यह ग्रहण आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तर अमेरिका के उत्तरी भाग, पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के कई क्षेत्रों में दिखाई देगा।

भारत में नहीं रहेगा सूतक काल

डॉ. जैन ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय सूतक काल का विशेष महत्व होता है, लेकिन यह नियम मुख्य रूप से उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल या किसी प्रकार का वेध दोष मान्य नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि भारत में लोग सामान्य दिनों की तरह अपने धार्मिक, सामाजिक और शुभ कार्य कर सकते हैं। मंदिरों में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों पर भी इस ग्रहण का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाएगा।

कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगेगा ग्रहण

वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहण के समय कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, गुरु और बुध की युति बनने की स्थिति रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की यह स्थिति विभिन्न राशियों, आर्थिक गतिविधियों और प्राकृतिक घटनाओं पर प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने बताया कि ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र और राशियों के आधार पर अलग-अलग परिणामों की संभावना व्यक्त की जाती है।

राशियों पर संभावित प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है। हालांकि कुछ राशियों के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कर्क, मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए यह समय सावधानी का बताया गया है। इन राशियों के लोगों को मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता हो सकती है। बड़े निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय सोच-विचार करने की सलाह दी गई है।

वहीं कन्या, मकर और मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत अनुकूल बताया गया है। नौकरी, व्यवसाय और व्यक्तिगत जीवन में नए अवसर मिलने की संभावना जताई गई है।

सिंह और तुला राशि के लोगों को करियर और निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार धैर्य और संतुलन बनाए रखना लाभदायक रहेगा।

व्यापारिक गतिविधियों पर असर के संकेत

डॉ. जैन ने बताया कि ग्रहण के समय बनने वाली ग्रह स्थितियों का असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से सोना-चांदी, शेयर बाजार और सट्टा बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई गई है।

उन्होंने कहा कि कर्क राशि में चार ग्रहों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता आ सकती है। कीमती धातुओं, विशेषकर सोने के बाजार में अचानक तेजी आने के संकेत भी ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर बताए गए हैं।

इसके अलावा खाद्य पदार्थ, तिलहन, घी, तेल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के व्यापार में भी कुछ समय के लिए बदलाव देखने को मिल सकता है। लोहा, तांबा, रसायन और अन्य धातु आधारित उद्योगों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।

प्राकृतिक घटनाओं को लेकर भी चर्चा

ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण को प्राकृतिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां मौसम में परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, चक्रवात या समुद्री तूफानों जैसी परिस्थितियों की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों जैसी भूगर्भीय घटनाओं को लेकर भी संकेत दिए गए हैं।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इन घटनाओं का ग्रहण से सीधा संबंध प्रमाणित नहीं है। सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से एक खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन ज्योतिषीय परंपराओं में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण

सूर्य ग्रहण को विज्ञान और धार्मिक परंपराओं दोनों में अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है। वैज्ञानिकों के लिए यह अंतरिक्ष में होने वाली एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जबकि धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है।

भारत में सदियों से सूर्य ग्रहण को लेकर कई परंपराएं चली आ रही हैं। हालांकि इस बार ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कोई विशेष नियम लागू नहीं होंगे।

लोगों में बनी रहेगी उत्सुकता

भले ही भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर रहेगा। दुनिया के जिन हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी इस घटना का अध्ययन करेंगे।

सूर्य ग्रहण ब्रह्मांड की अद्भुत घटनाओं में से एक है, जो पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण होती है। ऐसी घटनाएं हमें अंतरिक्ष की विशालता और प्रकृति की अद्भुत व्यवस्था को समझने का अवसर देती हैं।

कुल मिलाकर 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा और यहां इसका धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है, जिसके प्रभावों को लेकर विभिन्न मान्यताएं और आकलन सामने आ रहे हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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