सारंगपुर ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में शिव भजन संध्या आयोजित, माताओं-बहनों ने लिया आध्यात्मिक आनंद
संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद
सारंगपुर, 4 अगस्त 2026। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर स्थानीय ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में महिला मंडली द्वारा शिव भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने सहभागिता करते हुए भगवान शिव की भक्ति में भाव विभोर होकर भजनों का आनंद लिया।
कार्यक्रम के दौरान सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर श्रावण मास और शिव उपासना के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने अपने आशीर्वचन में कहा कि भगवान शिव सभी के आराध्य हैं और शिव की भक्ति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं शक्ति का संचार करती है।
शिव भक्ति से जीवन में आती है आध्यात्मिक शक्ति
ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि सनातन संस्कृति में भगवान शिव की महिमा अनंत है। शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप, स्वयंभू और अविनाशी परमात्मा हैं। परमपिता परमात्मा शिव ही इस सृष्टि के संचालक और नियंता हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में प्रतिदिन ईश्वरीय ज्ञान और योग के लिए समय निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास केवल बाहरी पूजा-अर्चना का समय नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर है। भगवान शिव की आराधना के साथ उनके बताए ज्ञान और जीवन मूल्यों को समझना आवश्यक है।
सच्चा रुद्राभिषेक है विकारों का त्याग
ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान शिव पर दूध अर्पित करना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में पवित्रता और निर्मलता अपनाने का संदेश है। जिस प्रकार दूध को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को स्वच्छ एवं सकारात्मक बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सच्ची शिव उपासना केवल बाहरी पूजा-पद्धतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने अंदर छिपे क्रोध, अहंकार, लोभ, ईर्ष्या और अन्य विकारों का त्याग करना ही वास्तविक आध्यात्मिक साधना है। जीवन के नकारात्मक संस्कारों को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर श्रेष्ठ गुणों को अपनाना ही सच्चे अर्थों में रुद्राभिषेक है।
दीदी ने बताया कि जब व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक विचारों, श्रेष्ठ संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों को स्थान देता है, तब उसके अंदर आत्मिक शक्ति का विकास होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुष्टि और आनंद का अनुभव बढ़ने लगता है तथा वह परमात्मा के अधिक निकट पहुंचता है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि श्रावण मास के इस पवित्र अवसर पर केवल भगवान शिव का स्मरण ही नहीं, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लें, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके।
राजयोग और ध्यान से मिली शांति की अनुभूति
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने उपस्थित माताओं-बहनों को परमात्मा शिव से शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की सरल विधि राजयोग एवं मेडिटेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित ध्यान और ईश्वरीय चिंतन के माध्यम से मन को शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। राजयोग व्यक्ति को तनाव, नकारात्मक विचारों और मानसिक अशांति से दूर कर आत्मिक सुख एवं संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करता है।
दीदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ध्यान की अनुभूति कराई, जिसमें सभी ने कुछ समय के लिए गहन शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। ध्यान के इस अभ्यास से सेवाकेंद्र का वातावरण सकारात्मक और शांतिमय हो गया।
शिव भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। माताओं और बहनों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भजनों में सहभागिता की और भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन नजर आए। भक्ति संगीत और आध्यात्मिक संदेशों से सेवाकेंद्र का वातावरण शिवमय हो गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर भगवान भोलेनाथ की विधिवत महाआरती की गई। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। उपस्थित माताओं-बहनों ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला प्रेरणादायी अनुभव रहा।
श्रावण मास के इस पावन अवसर पर आयोजित शिव भजन संध्या ने श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी दी।
