Sarangpur क्षेत्र में अवैध उत्खनन का बोलबाला, खनन माफियाओं पर कार्रवाई की मांग तेज
संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद
कई गांवों में खुलेआम मुरम का खनन, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
Sarangpur । सारंगपुर विकासखंड सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों अवैध उत्खनन का कारोबार तेजी से बढ़ने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के अनेक गांवों में मुरम का अवैध खनन खुलेआम किया जा रहा है। दिन-रात बड़ी संख्या में डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मुरम का परिवहन करती हुई नजर आती हैं। इससे स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में मुरम कहां से निकाली जा रही है और किस अनुमति के आधार पर उसका परिवहन किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में वर्तमान में कोई वैध शासकीय मुरम खदान संचालित नहीं है, इसके बावजूद बड़ी मात्रा में मुरम निकालकर निर्माण कार्यों में उपयोग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो अवैध उत्खनन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पटरिया धाकड़ सहित कई स्थानों पर अवैध उत्खनन के आरोप
ग्रामीणों के अनुसार सारंगपुर क्षेत्र के कई गांवों में अवैध रूप से मुरम निकाली जा रही है। पटरिया धाकड़ गांव में भी ठेकेदार द्वारा नियमों को दरकिनार कर उत्खनन किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर बिना अनुमति के जमीन को खोदकर मुरम निकाली जा रही है और उसे विभिन्न निर्माण कार्यों में भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अवैध रूप से निकाली गई मुरम का उपयोग सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में किया जा रहा है। यदि यह सही है तो इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकारी नियमों की अनदेखी भी हो रही है।
शासन के राजस्व को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका
अवैध उत्खनन से शासन को भी भारी आर्थिक नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। नियमानुसार खनिज उत्खनन के लिए अनुमति, रॉयल्टी और अन्य प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। लेकिन अवैध तरीके से खनन होने पर शासन को मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है तो इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की है कि अवैध उत्खनन करने वालों के साथ-साथ अवैध परिवहन में शामिल वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।
पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव
अवैध उत्खनन का असर केवल राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। खेतों, पहाड़ियों और प्राकृतिक क्षेत्रों से बिना अनुमति मुरम निकालने के कारण भूमि का स्वरूप बदल रहा है।
कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से ग्रामीणों और पशुओं के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा भूमि की गुणवत्ता, भू-जल स्तर और प्राकृतिक संतुलन पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पर्यावरण जानकारों का मानना है कि अनियंत्रित उत्खनन लंबे समय में क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित होने का आरोप
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि अवैध उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई प्रभावी नहीं दिखाई देती। ग्रामीणों का कहना है कि कभी-कभार एक-दो वाहनों या मशीनों पर कार्रवाई कर दी जाती है, जबकि बड़े स्तर पर चल रहे अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाती।
लोगों का कहना है कि जब तक लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध खनन करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल है। उन्होंने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और राजस्व विभाग से संयुक्त अभियान चलाने की मांग की है।
हालूहेड़ी कला में प्रशासन ने जब्त की जेसीबी
इसी बीच मंगलवार देर रात पचोर क्षेत्र के ग्राम हालूहेड़ी कला में अवैध खनन की सूचना पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एक जेसीबी मशीन जब्त की। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेज तैयार किए।
पचोर तहसीलदार नीलम पारसेतिया ने बताया कि अवैध खनन की जानकारी मिलने पर वे और माइनिंग अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौके का पंचनामा बनाया गया है और आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण तैयार किया गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि यदि इसी तरह लगातार अभियान चलाया गया तो अवैध उत्खनन पर रोक लगाई जा सकती है।
ग्रामीणों ने की विशेष अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सारंगपुर, पचोर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मुरम से भरे वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि यह खनिज किस स्थान से निकाला जा रहा है और इसके परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं।
लोगों ने मांग की है कि खनिज विभाग और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से पूरे क्षेत्र का सर्वे करें। अवैध खनन स्थलों की पहचान कर वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर भी सख्ती बरती जाए।
प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा जरूरी
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए खनिज संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए नियमों का पालन जरूरी है। अनियंत्रित और अवैध उत्खनन से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संकट खड़ा हो सकता है।
लोगों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि अवैध उत्खनन के खिलाफ प्रभावी और निरंतर अभियान चलाया जाए, ताकि शासन के राजस्व की सुरक्षा हो सके और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
इनका कहना है
नीलम पारसेतिया, तहसीलदार पचोर:
“हालूहेड़ी कला में अवैध खनन की जानकारी मिलते ही मैं और माइनिंग अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौका पंचनामा तैयार कर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रकरण भेजा गया है।”
