Datia Bypoll में हार के बाद बीजेपी में मंथन तेज, भितरघात की जांच करेगी दो सदस्यीय समिति
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गठित की कमेटी, गौरव रणदिवे और अंबाराम कराड़ा करेंगे चुनाव परिणाम की समीक्षा
भोपाल। मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली हार के बाद पार्टी संगठन में समीक्षा और मंथन का दौर शुरू हो गया है। चुनाव परिणाम को लेकर पार्टी के भीतर कई सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।
बीजेपी द्वारा बनाई गई इस समिति में गौरव रणदिवे और अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। समिति दतिया उपचुनाव के परिणामों का विस्तृत अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी संगठन स्तर पर आगे की रणनीति और आवश्यक कदम तय कर सकता है।
चुनाव में पूरी ताकत लगाने के बावजूद मिली हार
दतिया विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा था। पार्टी ने चुनाव प्रचार से लेकर संगठनात्मक स्तर तक पूरी ताकत झोंक दी थी। बड़े नेताओं की सभाएं, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर पर रणनीति के बावजूद पार्टी प्रत्याशी को सफलता नहीं मिल सकी।
चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी के अंदर हार के कारणों को लेकर समीक्षा शुरू हो गई है। पार्टी यह जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों के कारण चुनावी रणनीति अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई।
आशुतोष तिवारी के खिलाफ भितरघात की चर्चाएं
दतिया उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ कथित भितरघात की चर्चाएं चुनाव परिणाम के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं की भूमिका को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने मामले की समीक्षा कराने का फैसला लिया है।
हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक किसी नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। समीक्षा समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मतदान के दिन भी सामने आई थीं शिकायतें
सूत्रों के अनुसार, मतदान के दिन भी संगठन के अंदर असंतोष और भितरघात को लेकर चर्चाएं सामने आई थीं। बताया जा रहा है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान कुछ नाराज कार्यकर्ताओं को लेकर शिकायतें मिली थीं।
सूत्रों का दावा है कि मतदान वाले दिन करीब 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। ये लोग पार्टी से जुड़े नाराज कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
यदि समिति को जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो वह संबंधित कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बातचीत कर सकती है। समिति चुनाव के दौरान सामने आई सभी शिकायतों और घटनाक्रमों का विश्लेषण करेगी।
कमेटी करेगी बूथ स्तर तक समीक्षा
बीजेपी की दो सदस्यीय समिति केवल चुनाव परिणामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन की भूमिका की समीक्षा कर सकती है। इसमें चुनाव प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, प्रचार अभियान, मतदाता संपर्क और संगठनात्मक तालमेल जैसे विषयों को शामिल किया जा सकता है।
पार्टी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि किन क्षेत्रों में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और कहां संगठनात्मक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है।
संगठन में जवाबदेही तय करने की तैयारी
दतिया उपचुनाव की हार के बाद बीजेपी नेतृत्व संगठन में जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव में सामने आई कमियों को दूर किया जाए और भविष्य के चुनावों के लिए संगठन को और मजबूत बनाया जाए।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा केवल हार के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रिपोर्ट के बाद हो सकते हैं बड़े फैसले
बीजेपी की समीक्षा समिति अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी। इसके बाद संगठन स्तर पर आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं। इनमें जिम्मेदारियों में बदलाव, संगठनात्मक सुधार या कार्यकर्ताओं को लेकर दिशा-निर्देश शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। दतिया उपचुनाव की समीक्षा के जरिए बीजेपी न केवल हार के कारणों को समझने की कोशिश कर रही है, बल्कि भविष्य में चुनावी तैयारियों को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है।
