कर्म सत्ता को हराने की ताकत केवल धर्म सत्ता में है — साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब
संवाददाता : सचिन भंडारी
महिदपुर रोड में धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने बताया मनुष्य जीवन का महत्व, धर्म आराधना और आत्मकल्याण का मार्ग
महिदपुर रोड। मनुष्य जीवन हमें पुण्य का पोषण और पाप का शोषण करने के लिए मिला है। यह भव केवल भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्म उत्थान, संयम और धर्म आराधना के लिए प्राप्त हुआ है। कर्मों को पराजित करने की शक्ति केवल धर्म सत्ता में है। यह प्रेरक विचार परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने शनिवार को आयोजित मंगलकारी प्रवचन के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य रागी से विरागी और विरागी से वितरागी बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। संसार में अर्जित किया हुआ धन, संपत्ति और वैभव यहीं रह जाता है, लेकिन धर्म, संस्कार और सद्कर्म ही आत्मा के साथ आगे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म के प्रति रुचि और आस्था व्यक्ति को सही मार्ग दिखाती है। धर्म केवल बाहरी क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और कर्मों के क्षय का माध्यम है।
धर्म से जुड़ने वाले लोगों की तीन श्रेणियां
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने धर्म में रुचि रखने वाले लोगों का वर्णन करते हुए कहा कि सामान्य रूप से तीन प्रकार के लोग होते हैं — सदेया, भदेया और कदेया।
उन्होंने बताया कि सदेया वे लोग होते हैं जो वर्ष के 365 दिन परमात्मा की शरण में रहकर धर्म आराधना से जुड़े रहते हैं और नियमित रूप से आध्यात्मिक जीवन का पालन करते हैं।
भदेया वे होते हैं जो अवसर मिलने पर धर्म और आराधना से जुड़ते हैं, जबकि कदेया वे लोग होते हैं जो कभी-कभार ही धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धर्म को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं और नियमित रूप से आत्मचिंतन, भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ें।

धर्म आराधना से होता है आत्मकल्याण
धर्मसभा में साध्वीश्री ने कहा कि कर्मों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है, लेकिन धर्म, तप, संयम और सत्कर्मों के माध्यम से मनुष्य अपने कर्मों का क्षय कर सकता है।
उन्होंने कहा कि संसार की उपलब्धियां क्षणिक हैं, जबकि धर्म से प्राप्त आत्मिक आनंद और शांति स्थायी होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म के प्रति समर्पण और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाना चाहिए।
भंडारी परिवार ने लिया धार्मिक प्रभावना का लाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि शनिवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में संपूर्ण दिवस की भक्ति, आराधना और प्रभावना का लाभ रितेश कुमार पारसमल भंडारी परिवार, खरवा द्वारा लिया गया। परिवार ने धर्म कार्यों में सहभागिता करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सकल जैन श्री संघ के सदस्यों के साथ क्षेत्रीय विधायक दिनेश जैन बोस सहित अनेक गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में भाग लेकर साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के मंगलकारी प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक विचारों को आत्मसात करते हुए धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन में उपस्थित समाजजनों ने धार्मिक वातावरण में भक्ति और श्रद्धा के साथ सहभागिता निभाई।
जैन श्री संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से ऐसे धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य समाज में धर्म के प्रति आस्था बढ़ाना और लोगों को आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करना है।
समाजजनों से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान
जैन श्री संघ अध्यक्ष अजय चोरडिया एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष परेश चत्तर ने सभी समाजजनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में धर्मसभा में उपस्थित होकर साध्वीश्री के अमृतमय प्रवचनों का लाभ लें।
उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और धर्म के प्रति आस्था मजबूत होती है।
