भायंदर में चातुर्मास ग्रंथ वोहराने का धार्मिक आयोजन संपन्न, साध्वी सोम्यकला श्रीजी ने दिया ज्ञान और गुरु महिमा का संदेश
श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन संघ में श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ कार्यक्रम, 2 अगस्त को “मां तू ही मां” विषय पर विशेष प्रवचन
भायंदर। शहर के प्रथम जैन मंदिर श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन संघ में चातुर्मास वर्षावास के अंतर्गत धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला जारी है। इसी क्रम में चातुर्मास के दौरान जिन पवित्र ग्रंथों के माध्यम से आध्यात्मिक प्रवचन किए जाएंगे, उन ग्रंथों के वोहराने का विशेष धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
चातुर्मास प्रवचन के लिए पवित्र ग्रंथों का हुआ वोहराने
चातुर्मास के दौरान होने वाले प्रवचनों के लिए श्री गौतम प्रच्छा ग्रंथ और श्री जिनसेन रामसेन चरित्र ग्रंथ का वोहराने कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह आयोजन परम पूज्य वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य देव श्री धर्मधुरंधर सूरीश्वर जी म. सा. के आज्ञानुवर्ती साध्वी मंडल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
साध्वी बरखेड़ा तीर्थ उद्धारिका, महत्तरा शासन दीपिका साध्वी श्री सुमंगला श्रीजी म. सा. की शिष्या परम विदुषी साध्वी प्रफुल्लप्रभा श्रीजी म. सा. की शिष्या साध्वी श्री पूर्णकला श्रीजी म. सा. की शिष्या साध्वी सोम्यकला श्रीजी (नानकी म. सा.) के सानिध्य में यह धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।
भव्य शोभायात्रा के रूप में लाए गए ग्रंथ
संघ के तत्वावधान में लाभार्थी परिवार के निवास स्थान से दोनों ग्रंथों को धार्मिक परंपराओं के अनुसार वाजते-गाजते हुए मंदिर परिसर तक लाया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। धार्मिक विधियों के साथ ग्रंथों का पूजन और सम्मान किया गया।
ग्रंथ वोहराने के लाभार्थी परिवार के रूप में संजय बाबुलालजी राठौड़, रानीगांव परिवार ने धर्म लाभ प्राप्त किया।

अष्ट प्रकारी पूजा के लाभार्थियों ने लिया भाग
कार्यक्रम के दौरान दोनों ग्रंथों की अष्ट प्रकारी पूजा के विभिन्न लाभार्थी परिवारों ने भी अपनी सहभागिता निभाई।
धार्मिक अनुष्ठान में ज्ञान और आध्यात्मिक साधना से जुड़े विभिन्न पूजन के लाभार्थियों ने पूजा-अर्चना कर धर्म आराधना की।
इनमें श्री मतिज्ञान, श्री श्रुतज्ञान, अवधि ज्ञान, मन:पर्यव ज्ञान और श्री केवलज्ञान से संबंधित पूजा के लाभार्थी परिवार शामिल रहे।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक भावनाओं के साथ पूजा संपन्न कर भगवान और गुरुओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
धर्मसभा में साध्वीजी ने बताया ज्ञान और गुरु का महत्व
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी सोम्यकला श्रीजी ने ज्ञान और गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिए ज्ञान की आराधना अत्यंत आवश्यक है। केवल बाहरी उपलब्धियां ही जीवन की सफलता का आधार नहीं होतीं, बल्कि सही ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को श्रेष्ठ मार्ग प्रदान करते हैं।
साध्वीजी ने कहा कि तपस्या के साथ-साथ ज्ञान की साधना भी जरूरी है। ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है और आत्मिक उन्नति की ओर आगे बढ़ता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म मार्ग पर चलते हुए संयम, सेवा और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
चातुर्मास में आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन जारी
चातुर्मास के दौरान जैन समाज में धार्मिक अध्ययन, प्रवचन, पूजा और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है। इसी उद्देश्य से श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन संघ द्वारा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
संघ पदाधिकारियों ने बताया कि चातुर्मास काल में श्रद्धालुओं को धर्म, ज्ञान और आत्मचिंतन से जोड़ने के लिए लगातार आयोजन किए जाएंगे।
2 अगस्त को “मां तू ही मां” विषय पर होगा विशेष प्रवचन
संघ की ओर से जानकारी दी गई कि आगामी 2 अगस्त को “मां तू ही मां” विषय पर विशेष जाहिर प्रवचन का आयोजन किया जाएगा।
यह विशेष प्रवचन सुबह 9 बजे से आयोजित होगा, जिसमें साध्वीजी धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगी।
इसके साथ ही उसी दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चिकित्सा शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। शिविर के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
16 अगस्त को मनाया जाएगा भगवान नेमिनाथजी का जन्म कल्याणक
जैन संघ की ओर से बताया गया कि आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में 16 अगस्त को भगवान नेमिनाथजी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
इस अवसर पर विशेष पूजा, धार्मिक कार्यक्रम और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। संघ ने सभी श्रद्धालुओं से इन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।
धार्मिक आयोजनों से बना आध्यात्मिक वातावरण
चातुर्मास के अवसर पर आयोजित हो रहे इन धार्मिक कार्यक्रमों से भायंदर जैन समाज में उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे आयोजनों से धर्म के प्रति आस्था मजबूत होती है और समाज में आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार होता है। संघ द्वारा लगातार किए जा रहे धार्मिक प्रयासों से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं।
