गुरु पूर्णिमा पर मानसपीठ खजुरीताल में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज का मिठाई से हुआ तुलादान
अभिषेक त्रिवेदी की रिपोर्ट।
खजुरीताल। गुरु परंपरा, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के महापर्व गुरु पूर्णिमा का आयोजन श्री मानसपीठ खजुरीताल में अत्यंत भव्य और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामललाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा और भक्ति समर्पित की।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रातःकाल से ही श्री मानसपीठ खजुरीताल आश्रम में श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। मध्यप्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों ने गुरु पूजन, दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। आश्रम परिसर में वेदमंत्रों की गूंज, भक्ति संगीत और मंगल कलशों की शोभा ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।
पूर्वाचार्यों के पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ पूज्य जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज द्वारा आश्रम की गुरु परंपरा के पूर्वाचार्यों के पूजन और वंदन के साथ किया गया। इसके बाद श्री मानसपीठ परिवार एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गुरु पूजन, आरती और गुरु वंदना की।
भक्तों ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए गुरुदेव के चरणों में श्रद्धा अर्पित की। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
गुरु जीवन को ज्ञान और धर्म का मार्ग दिखाते हैं — जगद्गुरु
अपने आशीर्वचन में पूज्य जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, उत्साह और समर्पण का महान पर्व है। गुरु ही शिष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर उसे ज्ञान, धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु की महिमा अनंत है और गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना कठिन है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं होते, बल्कि वे अपने शिष्यों को संस्कार, सेवा, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

लगभग 100 वर्ष पुराना है मानसपीठ खजुरीताल आश्रम
जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्री मानसपीठ खजुरीताल आश्रम लगभग 100 वर्षों से गुरु परंपरा, साधना, सेवा और सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र स्थान से वर्षों से असंख्य श्रद्धालु आध्यात्मिक प्रेरणा और गुरुकृपा प्राप्त करते आ रहे हैं।
उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए धर्म, सेवा, संस्कार और मानवता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।
मिठाई से हुआ जगद्गुरु का भव्य तुलादान
गुरु पूर्णिमा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण धौरहरा निवासी श्री उमाकांत शुक्ला एवं उनके परिवार द्वारा पूज्य जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज का मिठाई से किया गया भव्य तुलादान रहा।
इस विशेष धार्मिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। तुलादान के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का भाव दिखाई दिया। इसके पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने लिया आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी और श्रद्धालु शामिल हुए। अमरपाटन विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह, रामपुर विधायक विक्रम सिंह “विक्की भैया”, भोपाल डीएसपी बी.एम. द्विवेदी, सतना जेल अधीक्षक लीना कोस्टा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष डॉ. सुष्मिता सिंह सहित अनेक गणमान्य लोगों ने पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके अलावा डॉ. पंकज सिंह परिहार, जिला पंचायत सदस्य हरिशकांत त्रिपाठी, जिला पंचायत सदस्य पूजा आशुतोष गुप्ता, अमरपाटन नगर पालिका अध्यक्ष समर सिंह, जे.पी. शर्मा, इंजीनियर एस.बी. सिंह, मंडल अध्यक्ष विकास तिवारी सहित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से आए अनेक श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

भक्ति, सेवा और संस्कारों का बना संगम
पूरे आयोजन के दौरान सेवा, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में अपनी आस्था प्रकट करते हुए धर्म और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने एक बार फिर श्री मानसपीठ खजुरीताल को गुरु भक्ति, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का यादगार आध्यात्मिक अनुभव बताया।
