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MP Tiger Deaths 2025-2026: टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में 14 महीने में 81 बाघों की मौत, वन विभाग की बढ़ी चिंता

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Published On: 29 July 2026
MP Tiger Deaths 2025-2026: टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में 14 महीने में 81 बाघों की मौत, वन विभाग की बढ़ी चिंता

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MP Tiger Deaths 2025-2026: टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में 14 महीने में 81 बाघों की मौत, वन विभाग की बढ़ी चिंता

कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा मौतें, बांधवगढ़ दूसरे स्थान पर; मानवजनित कारणों की भी जांच जारी

भोपाल। देश में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या वाले राज्य मध्यप्रदेश में बाघों की मौत के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में पिछले 14 महीनों के दौरान कुल 81 बाघों की मौत दर्ज की गई है। वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 52 बाघों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 29 बाघों की जान जा चुकी है।

2026 के चार महीनों में हुई बाघों की मौत का आंकड़ा पिछले पूरे साल की मौतों के आधे से अधिक है। लगातार बढ़ती मौतों के कारण वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा बाघों की मौत

पिछले 14 महीनों के आंकड़ों के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा बाघों की मौत दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक:

  • वर्ष 2025 में कान्हा टाइगर रिजर्व में 10 बाघों की मौत हुई।
  • वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में यहां 6 बाघों की मौत सामने आई।

इस तरह केवल कान्हा क्षेत्र में ही 14 महीनों के दौरान कुल 16 बाघों की मौत हुई है।

कान्हा टाइगर रिजर्व को देश के प्रमुख बाघ आवास क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां बाघों की अच्छी संख्या होने के कारण संरक्षण की दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 13 बाघों की मौत

कान्हा के बाद सबसे अधिक बाघों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दर्ज की गई है।

आंकड़ों के अनुसार:

  • वर्ष 2025 में बांधवगढ़ में 8 बाघों की मौत हुई।
  • वर्ष 2026 के चार महीनों में 5 बाघों की मौत दर्ज की गई।

इस तरह पिछले 14 महीनों में बांधवगढ़ क्षेत्र में कुल 13 बाघों की मौत सामने आई है।

करंट और आपसी संघर्ष बने प्रमुख कारण

वन विभाग के अनुसार, अधिकांश बाघों की मौत के पीछे मुख्य कारण आपसी संघर्ष और करंट लगना सामने आया है।

कुछ मामलों में मानवजनित कारण भी पाए गए हैं। छिंदवाड़ा जिले में एक बाघ के शिकार का मामला सामने आया था।

हालांकि, कई मामलों में मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

वन विभाग मौतों के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है।

37 मादा, 35 नर और 8 शावकों की हुई मौत

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 14 महीनों में हुई बाघों की मौतों में:

  • 37 मादा बाघ
  • 35 नर बाघ
  • 8 शावक

शामिल हैं।

वर्ष 2025 में:

  • 27 नर बाघों की मौत
  • 20 मादा बाघों की मौत
  • 3 शावकों की मौत

दर्ज की गई थी।

वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में:

  • 8 नर बाघ
  • 17 मादा बाघ
  • 5 शावक

मारे गए हैं।

2026 में बढ़ी मौतों की रफ्तार

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में औसतन हर महीने करीब 4 बाघों की मौत हुई थी। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में यह औसत बढ़कर करीब 7 बाघ प्रति माह पहुंच गया है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनके क्षेत्र में आपसी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसके अलावा मानव-बाघ संघर्ष और जंगलों के आसपास बढ़ती गतिविधियां भी चुनौती बन रही हैं।

भारत में सबसे ज्यादा बाघ मध्यप्रदेश में

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान की अखिल भारतीय बाघ आकलन 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल करीब 3682 बाघ दर्ज किए गए थे।

इनमें सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्यप्रदेश में पाए गए हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है।

बाघों की संख्या के मामले में:

  • मध्यप्रदेश — 785 बाघ
  • कर्नाटक — 563 बाघ
  • उत्तराखंड — 560 बाघ

के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल हैं।

कान्हा टाइगर रिजर्व को मिला है सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र का दर्जा

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व बाघों के लिए देश के सबसे बेहतर आवास क्षेत्रों में शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, कान्हा क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या काफी अच्छी है, जिससे बाघों के लिए प्राकृतिक भोजन उपलब्ध रहता है।

टाइगर रिजर्व देखने पहुंचे लाखों पर्यटक

मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी काफी लोकप्रिय हैं।

पिछले पांच वर्षों में राज्य के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में:

  • भारतीय पर्यटक: 7 लाख 38 हजार 637
  • विदेशी पर्यटक: 85 हजार 742

पहुंचे।

इस तरह कुल मिलाकर करीब 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व क्षेत्रों का भ्रमण किया।

बाघ संरक्षण के लिए बढ़ानी होगी निगरानी

मध्यप्रदेश में बाघों की बड़ी आबादी राज्य की पहचान है, लेकिन लगातार हो रही मौतें संरक्षण व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए जंगलों में निगरानी बढ़ाने, अवैध शिकार रोकने, मानव-बाघ संघर्ष कम करने और वैज्ञानिक तरीकों से संरक्षण योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

वन विभाग अब बाघों की मौत के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर भविष्य के लिए रणनीति तैयार करने में जुटा है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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