MP में 14 महीनों में 81 बाघों की मौत: कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 16 मौतें, करंट बना बड़ा कारण
MP को देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय में बाघों की मौत के बढ़ते आंकड़ों ने वन विभाग और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में पिछले 14 महीनों के दौरान कुल 81 बाघों की मौत दर्ज की गई है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें 37 मादा बाघ, 35 नर बाघ और 8 शावक शामिल हैं।
बाघों की मौत के मामलों में सबसे ज्यादा संख्या कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सामने आई है। वहीं, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भी बाघों की मौत के मामलों में दूसरे स्थान पर है। प्रारंभिक जांच में ज्यादातर मौतों के पीछे करंट लगना और बाघों के बीच आपसी संघर्ष जैसे कारण सामने आए हैं। हालांकि, कई मामलों में मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
2025 में 52 और 2026 में अब तक 29 बाघों की मौत
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान मध्यप्रदेश में कुल 52 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 29 बाघों की मौत हो चुकी है।
अगर औसत देखा जाए तो वर्ष 2025 में हर महीने लगभग 4 बाघों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 7 बाघ प्रति माह तक पहुंच गया है। इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा मौतें
MP के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले 14 महीनों में सबसे ज्यादा 16 बाघों की मौत दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में कान्हा क्षेत्र में 10 बाघों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में 6 और बाघों की मौत सामने आई।
कान्हा टाइगर रिजर्व को देश के सबसे बेहतर बाघ आवास क्षेत्रों में शामिल किया जाता है। यहां बाघों के लिए अनुकूल वातावरण और बड़ी संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं। इसके बावजूद मौतों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।
बांधवगढ़ में 13 बाघों की मौत
कान्हा के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सबसे ज्यादा बाघों की मौत हुई है। यहां पिछले 14 महीनों में कुल 13 बाघों की मौत दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में बांधवगढ़ में 8 बाघों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2026 में शुरुआती चार महीनों के दौरान 5 बाघों की मौत सामने आई।
बांधवगढ़ क्षेत्र लंबे समय से बाघों की बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है। यहां बाघों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर वन विभाग लगातार प्रयास करता है, लेकिन मौतों के मामलों ने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।
करंट और आपसी संघर्ष बने बड़ी वजह
वन विभाग के अनुसार, ज्यादातर बाघों की मौत के पीछे प्राकृतिक और मानवजनित कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण करंट लगना और बाघों के बीच आपसी संघर्ष बताया जा रहा है।
कई बार जंगलों के आसपास अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार वन्यजीवों के लिए खतरा बन जाते हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय संघर्ष के कारण भी बाघों की मौत होती है।
छिंदवाड़ा जिले में एक बाघ के शिकार का मामला भी सामने आया था। वन विभाग ने इस मामले में जांच की थी। हालांकि, अधिकांश मामलों में मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच के आधार पर की जाती है।
37 मादा, 35 नर और 8 शावकों की मौत
मृत बाघों के आंकड़ों में मादा और नर दोनों शामिल हैं। पिछले 14 महीनों में कुल 37 मादा बाघों, 35 नर बाघों और 8 शावकों की मौत दर्ज की गई है।
वर्ष 2025 में 27 नर बाघ, 20 मादा बाघ और 3 शावकों की मौत हुई थी। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक 8 नर बाघ, 17 मादा बाघ और 5 शावकों की मौत हो चुकी है।
MP में सबसे ज्यादा बाघ
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान की अखिल भारतीय बाघ आकलन रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में कुल करीब 3682 बाघ पाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्यप्रदेश में दर्ज किए गए हैं।
बाघों की सबसे अधिक संख्या के कारण मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है। बाघों की संख्या के मामले में कर्नाटक दूसरे स्थान पर है, जहां करीब 563 बाघ हैं। वहीं उत्तराखंड में 560 बाघ दर्ज किए गए हैं।
कान्हा को मिला सर्वश्रेष्ठ बाघ आवास का दर्जा
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व बाघों के लिए देश के सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्रों में शामिल है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कान्हा क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या काफी अधिक है, जिससे बाघों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध रहता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र बाघ संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
टाइगर रिजर्व में बढ़ रहा पर्यटन
MP के टाइगर रिजर्व न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारतीय पर्यटकों की संख्या 7 लाख 38 हजार 637 रही, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या 85 हजार 742 दर्ज की गई। कुल मिलाकर करीब 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटकों ने प्रदेश के टाइगर रिजर्व का दौरा किया।
बाघों की बढ़ती मौतों के बीच अब वन विभाग के सामने चुनौती है कि वह संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करे, ताकि मध्यप्रदेश का टाइगर स्टेट का दर्जा कायम रहे और बाघों की संख्या सुरक्षित रह सके।
