MP Mandi Board New Rule 2026: मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों में बड़े बदलाव, अब एक व्यापारी को मिलेगी एक ही दुकान
दुकान, गोदाम और प्लॉट का आवंटन होगा ऑनलाइन, लाइसेंस अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष की गई
भोपाल। मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों की व्यवस्थाओं में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। मंडी बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए गए हैं। कृषि विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब प्रदेश की मंडियों में दुकान, गोदाम और प्लॉट के आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
नई व्यवस्था के तहत अब एक पंजीकृत व्यापारी को मंडी में केवल एक ही दुकान आवंटित की जाएगी। राज्य सरकार ने पहली बार प्रदेश की कृषि उपज मंडियों के लिए इस तरह की व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य मंडियों में दुकानों के समान वितरण और व्यापारिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करना बताया जा रहा है।
ऑफलाइन आवंटन व्यवस्था होगी समाप्त
नए नियमों के अनुसार अब मंडियों में दुकान, गोदाम या प्लॉट का आवंटन ऑफलाइन प्रक्रिया से नहीं किया जाएगा। सभी प्रकार के आवंटन ऑनलाइन माध्यम से होंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और पात्र व्यापारियों को समान अवसर मिल सकेगा।
सरकार का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से आवंटन प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगेगी और व्यापारियों को घर बैठे आवेदन एवं जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।
मंडी लाइसेंस की अवधि बढ़ाकर 30 साल की गई
राज्य सरकार ने मंडी व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए लाइसेंस अवधि में भी बदलाव किया है। अब व्यापारियों को मंडी लाइसेंस अधिकतम 30 वर्षों तक के लिए दिया जाएगा।
इससे पहले व्यापारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में लाइसेंस का नवीनीकरण कराना पड़ता था, जिससे उन्हें बार-बार प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से व्यापारियों को लंबे समय तक स्थायित्व मिलेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया भी आसान होगी।
हालांकि लाइसेंस शुल्क में निर्धारित नियमों के अनुसार वृद्धि की जाएगी। व्यापारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में वार्षिक लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि के साथ शुल्क जमा करना होगा।
यदि निर्धारित समय सीमा के बाद शुल्क जमा किया जाता है तो विलंब शुल्क के रूप में 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से राशि देनी होगी।
प्रदेश की 557 मंडियों में लागू होंगे नए नियम
मध्यप्रदेश में वर्तमान में मंडी बोर्ड के अंतर्गत कुल 557 कृषि उपज मंडियां संचालित हैं। इन मंडियों में लगभग 35 हजार दुकानें और प्लॉट तथा 3 हजार से अधिक गोदाम उपलब्ध हैं।
नई व्यवस्था का सीधा प्रभाव प्रदेशभर के हजारों व्यापारियों और मंडी कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य मंडियों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाना है।
तीन बार नीलामी के बाद भी खरीदार नहीं मिला तो किराए पर दी जाएंगी दुकानें
नए नियमों में दुकान, प्लॉट और गोदामों के उपयोग को लेकर भी बदलाव किया गया है। यदि किसी दुकान या प्लॉट की तीन बार नीलामी आयोजित करने के बाद भी कोई खरीदार नहीं मिलता है तो उसे किराए पर दिया जा सकेगा।
ऐसी स्थिति में संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरों के आधार पर अधिकतम तीन वर्ष के लिए किराया अनुबंध किया जाएगा। इससे लंबे समय तक खाली पड़ी मंडी संपत्तियों का उपयोग हो सकेगा और मंडी बोर्ड को राजस्व भी प्राप्त होगा।
नीलामी प्रक्रिया में भी बदलाव
नई व्यवस्था के तहत दुकान, प्लॉट और गोदामों की नीलामी की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। नीलामी की तारीख से कम से कम 15 दिन पहले विज्ञापन जारी करना अनिवार्य होगा।
बोली लगाने वाले व्यापारियों को बयाना राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। नीलामी में सफल होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा करना आवश्यक होगा।
नए नियमों के अनुसार आवंटन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को तय समय सीमा के अनुसार भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे प्रक्रिया में देरी और विवादों को कम किया जा सके।
दुकान, प्लॉट और गोदाम आवंटन पर लगेगी प्रोसेसिंग फीस
नई व्यवस्था के अनुसार मंडी में दुकान, प्लॉट या गोदाम के आवंटन के दौरान व्यापारियों को 10 हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी।
इसके अलावा यदि कोई व्यापारी अपनी दुकान या संपत्ति का हस्तांतरण करना चाहता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हस्तांतरण के लिए कलेक्टर गाइडलाइन या सौदे की कीमत के आधार पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है।
व्यापारियों और मंडी व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार द्वारा किए गए इन बदलावों का उद्देश्य मंडी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। ऑनलाइन आवंटन प्रक्रिया से जहां व्यापारियों को सुविधा मिलेगी, वहीं मंडी बोर्ड की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी।
एक व्यापारी को एक ही दुकान आवंटित करने की व्यवस्था से छोटे और नए व्यापारियों को अवसर मिलने की संभावना है। वहीं लंबे समय के लाइसेंस से पुराने व्यापारियों को स्थायित्व मिलेगा।
नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
मंडी बोर्ड के नए नियमों को कृषि व्यापार व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऑनलाइन प्रक्रिया, निर्धारित शुल्क व्यवस्था और स्पष्ट नियमों के कारण मंडी प्रशासन और व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य है कि कृषि उपज मंडियां केवल खरीद-बिक्री के केंद्र न रहकर आधुनिक व्यापारिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित बाजार के रूप में विकसित हों। नए नियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं।
