मंडलेश्वर में उत्साह के साथ मनाया गया ‘तिरंगा अंगीकार दिवस’, ध्वजारोहण के साथ छात्राओं ने गाया राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत
रिपोर्ट: गौतम साल्वे, जिला ब्यूरो चीफ, मंडलेश्वर
मंडलेश्वर। भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को आधिकारिक रूप से अपनाए जाने की ऐतिहासिक स्मृति में तिरंगा अंगीकार दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। इसी क्रम में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मंडलेश्वर में भी तिरंगा अंगीकार दिवस गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, तिरंगे के इतिहास एवं महत्व पर विचार गोष्ठी तथा छात्राओं को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में राष्ट्रप्रेम, संविधान के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय ध्वज के गौरव के प्रति जागरूकता विकसित करना था। विद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और राष्ट्रभक्ति के गीतों से गूंज उठा तथा विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
ध्वजारोहण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
तिरंगा अंगीकार दिवस के अवसर पर विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य श्रीमती अरुणा सोलंकी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ध्वजारोहण के दौरान विद्यालय का पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया।
ध्वजारोहण के बाद उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का सामूहिक गायन किया। इसके पश्चात राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया गया, जिससे विद्यालय का वातावरण देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।
छात्राओं ने दिखाई अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की मिसाल
कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने अनुशासित ढंग से भाग लिया। सभी छात्राएं निर्धारित गणवेश में उपस्थित रहीं और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देकर राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के दौरान पूरे परिसर में अनुशासन और गरिमा का विशेष वातावरण देखने को मिला। छात्राओं ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े नियमों और उसके महत्व को भी गंभीरता से सुना।
संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया था तिरंगा
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने छात्राओं को बताया कि भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था।
स्वतंत्रता प्राप्ति से ठीक पहले लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय भारत की राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बना। इसके बाद से तिरंगा देश की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया जाता है।
पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था तिरंगे का प्रारूप
विद्यालय के शिक्षकों ने राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय तिरंगे का मूल प्रारूप पिंगली वेंकैया द्वारा तैयार किया गया था।
बाद में संविधान सभा ने इसमें आवश्यक संशोधन करते हुए चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को शामिल किया और इसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया।
आज यही तिरंगा भारत की संप्रभुता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक है।
तिरंगे के तीन रंगों का महत्व
कार्यक्रम में छात्राओं को राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
केसरिया रंग
केसरिया रंग साहस, त्याग, बलिदान और निस्वार्थ सेवा की भावना का प्रतीक माना जाता है। यह राष्ट्रहित में समर्पण और वीरता का संदेश देता है।
सफेद रंग
सफेद रंग सत्य, शांति, ईमानदारी और पवित्रता का प्रतीक है। यह समाज में सद्भाव, नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
हरा रंग
हरा रंग समृद्धि, विकास, कृषि, पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। यह देश की उन्नति और खुशहाली का संदेश देता है।
अशोक चक्र का विशेष महत्व
शिक्षकों ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज के मध्य स्थित नीले रंग का अशोक चक्र भारत की सांस्कृतिक और नैतिक विरासत का प्रतीक है।
24 तीलियों वाला यह चक्र—
- धर्म
- न्याय
- कर्तव्य
- सतत प्रगति
- गतिशीलता
का संदेश देता है।
अशोक चक्र यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्र और समाज को निरंतर विकास एवं सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ते रहना चाहिए।
शिक्षकों ने दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश
इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य श्रीमती अरुणा सोलंकी सहित विद्यालय के शिक्षकों—
- शबनम खान
- प्रकाश भंडोले
- दीपक चौबे
- सीमा भटोरे
- ज्योत्सना शर्मा
- हीरालाल डावर
- संजय राज
- अतुल शर्मा
- कविता भालसे
- किरण दवाड़े
ने छात्राओं को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाओं, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है।
तिरंगे का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य
शिक्षकों ने छात्राओं को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह तिरंगे का सदैव सम्मान करे और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े सभी संवैधानिक नियमों का पालन करे।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने परिवार और समाज में भी राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का संदेश पहुंचाएं।
नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना जरूरी
विद्यालय परिवार ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के इतिहास, संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व की जानकारी भी होना आवश्यक है।
ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन, जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय परिसर में रहा देशभक्ति का माहौल
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर देशभक्ति के गीतों, नारों और राष्ट्रीय भावना से सराबोर रहा। छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि वे राष्ट्र की एकता, अखंडता और संविधान की गरिमा बनाए रखने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे तथा तिरंगे का सम्मान जीवनभर करेंगे।
राष्ट्रीय ध्वज है भारत की पहचान
भारत का तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के अनगिनत बलिदानों, लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और करोड़ों भारतीयों के आत्मसम्मान का प्रतीक है। तिरंगा अंगीकार दिवस जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व से परिचित कराते हैं और उनमें राष्ट्रप्रेम तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। मंडलेश्वर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।
