नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता और वैश्विक सहयोग को बताया स्थायी शांति की आधारशिला, ‘Vision Impossible to Possible’ के लिए हुए सम्मानित
नई दिल्ली, 18 जुलाई। नेल्सन मंडेला की 108वीं जयंती के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में आयोजित National Peace Conclave में देश-विदेश के राजनयिकों (Diplomats), नीति-निर्माताओं, सामाजिक प्रतिनिधियों तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लेकर विश्व शांति, सामाजिक समरसता और वैश्विक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इस गरिमामय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इंदौर के प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन को विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में विश्व शांति की स्थापना के लिए मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संतुलन और मानवीय मूल्यों की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वस्थ समाज ही विश्व शांति की आधारशिला
अपने संबोधन में डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने कहा कि विश्व शांति केवल राजनीतिक या कूटनीतिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक नींव एक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ समाज में निहित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता मानसिक तनाव, भावनात्मक असंतुलन और सामाजिक अलगाव विश्वभर में संघर्ष एवं अस्थिरता के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाया जाए, तो परिवार, समाज और राष्ट्र सभी स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

मानसिक स्वास्थ्य पर दिया वैज्ञानिक दृष्टिकोण
डॉ. जैन ने अपने विचारों में मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक पक्ष को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन की स्थिति में रहता है, तो वह साइकोसोमैटिक (Psychosomatic) विकारों का शिकार हो सकता है। इसका प्रभाव केवल उसके स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समय रहते जागरूकता बढ़ाकर तथा उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। यह प्रयास विश्व में स्थायी शांति और सामाजिक स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
चिकित्सक की भूमिका केवल उपचार तक सीमित नहीं
अपने उद्बोधन में डॉ. जैन ने कहा कि एक चिकित्सक का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा, “एक चिकित्सक होने के नाते मेरा दायित्व केवल लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ करना ही नहीं, बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाना है। स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र ही विश्व शांति की वास्तविक आधारशिला हैं।”
‘Vision Impossible to Possible’ के लिए मिला सम्मान
नेशनल पीस कॉन्क्लेव के दौरान डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन को उनके प्रेरणादायी विज़न “Vision Impossible to Possible” के लिए विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। देश-विदेश के राजनयिकों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने उनके कार्यों और समाज के प्रति समर्पण की सराहना की।
सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और वैश्विक सहयोग के माध्यम से शांति स्थापित करने के प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

आधुनिक होम्योपैथिक चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन इंदौर स्थित आरोग्य सुपर स्पेशलिटी मॉडर्न होम्योपैथिक क्लीनिक के निदेशक हैं। वे ब्रिक्स देशों के लिए होम्योपैथिक चिकित्सा के प्रतिनिधि (Representative of Homeopathic Medicine for BRICS Countries – BCMF) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वे आधुनिक होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों के उपचार के लिए जाने जाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
स्वस्थ जीवन का दिया संदेश
डॉ. जैन का मानना है कि बीमारी के साथ समझौता कर जीवन बिताने की अपेक्षा वैज्ञानिक एवं उचित उपचार के माध्यम से बीमारी पर विजय प्राप्त कर स्वस्थ, सम्मानपूर्ण और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संतुलन की पूर्ण अवस्था है। इसी सोच के साथ वे चिकित्सा सेवा के साथ समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य भी निरंतर कर रहे हैं।

विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक
कार्यक्रम के समापन पर सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि विश्व शांति, सामाजिक समरसता और मानवता के कल्याण के लिए सरकारों, चिकित्सा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। सामूहिक प्रयास, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और मानवीय मूल्यों का संरक्षण ही एक शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
